पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ईंधन कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भारत के कई राज्यों ने ईंधन बचत और अनावश्यक खर्च घटाने के लिए नए कदम शुरू किए हैं। इस पहल के तहत वीआईपी काफिलों का आकार घटाया जा रहा है, सरकारी यात्रा सीमित की जा रही है और कोविड काल में अपनाई गई वर्क फ्रॉम होम तथा वर्चुअल बैठकों जैसी व्यवस्थाएं फिर से प्राथमिकता पा रही हैं।
हाइलाइट्स
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भाजपा शासित राज्यों में ईंधन और प्रशासनिक खर्च कटौती हेतु काफिले, विदेशी यात्राएँ, और बैठकों में तत्काल बदलाव लागू किए गए।
- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने मंत्रियों के लिए काफिले के आकार को कम करना, वर्चुअल मीटिंग्स और सार्वजनिक परिवहन उपयोग जैसे सख्त मितव्ययिता उपायों की घोषणा की।
- इन कदमों से सरकारी ईंधन खर्च में उल्लेखनीय कटौती, डिजिटल प्रशासनिक प्रक्रियाओं और दूरस्थ कार्य को संस्थागत बढ़ावा मिलने की संभावना जताई गई है।
राज्यों में मितव्ययिता उपायों का विस्तार
Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भाजपा शासित कई राज्य सरकारें ईंधन खपत और प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए समन्वित कदम उठा रही हैं। यह अभियान ऐसे समय आगे बढ़ रहा है जब भारत के तेल और गैस आयात के लिए अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव पर नजर बनी हुई है।
तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी ने कहा कि कोरोना काल में देश ने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसे तरीकों को अपनाया था और अब राष्ट्रीय हित में उन प्रथाओं को फिर से प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, सोने की खरीद एक वर्ष टालने, स्थानीय उत्पादों के समर्थन और ईंधन तथा खाद्य तेल की खपत घटाने की भी अपील की।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काफिले के वाहनों में 50 प्रतिशत कटौती का आदेश दिया और मंत्रियों तथा जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में कम से कम एक बार सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को कहा। राज्य ने दफ्तरों को अपनी आधी आंतरिक बैठकों को ऑनलाइन करने, जबकि विभागों, स्कूलों और कंपनियों को कारपूलिंग, साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन और अलग-अलग कार्यालय समय को बढ़ावा देने की सलाह दी है।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कथित तौर पर कहा है कि अत्यधिक जरूरी स्थिति को छोड़कर आधिकारिक यात्रा के लिए विमान उपयोग से पहले मंजूरी लेनी होगी। कई विभाग पहले ही बैठकों को ऑनलाइन प्रारूप में स्थानांतरित करना शुरू कर चुके हैं।
प्रशासन और परिवहन पर संभावित असर
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंत्रियों और विधायकों से आधिकारिक वाहनों का उपयोग घटाने और जहां संभव हो मेट्रो, बसों तथा कारपूलिंग को प्राथमिकता देने को कहा है। गुजरात में वरिष्ठ नेताओं ने अपने काफिलों का आकार कम किया है, जबकि कुछ मंत्रियों ने कथित तौर पर एस्कॉर्ट वाहन पूरी तरह छोड़ दिए हैं।गुजरात में विश्वविद्यालयों को साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक "केमिकल इंजन फ्री डे" मनाने का निर्देश दिया गया है। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने अपना काफिला पांच वाहनों तक सीमित किया है, जबकि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने काफिले का आकार 13 से घटाकर आठ वाहन कर दिया है।
कई राज्यों ने अधिकारियों को अनावश्यक यात्राओं से बचने और वर्चुअल बैठकों पर अधिक जोर देने के निर्देश भी दिए हैं। इससे सरकारी ईंधन खर्च में कटौती के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में डिजिटल कामकाज, दूरस्थ कार्य और सार्वजनिक परिवहन उपयोग को अधिक संस्थागत रूप मिलने की संभावना बन रही है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत पर आयात लागत और महंगाई जोखिम बढ़ने की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयम की अपील पर चर्चा की गई थी। उसमें ईंधन, सोना, खाद्य तेल, विदेशी यात्रा और आयातित सामान पर निर्भरता घटाकर विदेशी मुद्रा बचत व ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, साथ ही मेट्रो/कारपूलिंग/EV और वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा देने की बात को रेखांकित किया गया था।
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