नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक, ऊर्जा जोखिम पर सहमति की चुनौती बढ़ी

नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक, ऊर्जा जोखिम पर सहमति की चुनौती बढ़ी
BRICS ऊर्जा पर मुश्किलें

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बीच नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक समूह की कूटनीतिक एकजुटता की कठिन परीक्षा बन रही है। 2026 के लिए BRICS अध्यक्ष भारत पर ऊर्जा सुरक्षा, ईरान से संबंध, इज़राइल के साथ संतुलित संपर्क और खाड़ी भागीदारों के हितों को एक साथ साधने का दबाव है।

हाइलाइट्स

  • BRICS विदेश मंत्रियों की नई दिल्ली बैठक में ईरान ने U.S. व इज़राइल की 'अवैध आक्रामकता' की औपचारिक निंदा की मांग कर मतभेद बढ़ाए।
  • होरमुज जलडमरूमध्य में ईरान की सख्ती एवं U.S. नौसैनिक नाकेबंदी के कारण आपूर्ति बाधा से भारत और चीन जैसे आयातक देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
  • BRICS सदस्य देशों के भीतर तेल व गैस मूल्य वृद्धि से निपटने पर कोई साझा सहमति बनने की संभावना कमजोर दिख रही है, प्राथमिकताएं अलग बनी हुई हैं।

बैठक का एजेंडा और कूटनीतिक दबाव

Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सदस्य देशों से तेहरान के खिलाफ U.S. और इज़राइल की कथित "अवैध आक्रामकता" की औपचारिक निंदा करने का आह्वान किया है, जिससे समूह के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। भारत के लिए यह क्षण विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि वह 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभाल रहा है और उसे UAE, इज़राइल तथा ईरान के साथ अपने अलग-अलग रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना है।

बैठक ऐसे समय हो रही है जब युद्धविराम औपचारिक रूप से लागू होने के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में छिटपुट हमले जारी हैं। लेख के अनुसार, U.S. ने अप्रैल में ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले जहाजों पर नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा कर वैश्विक आपूर्ति झटके को और गहरा किया, जबकि ईरान मार्च की शुरुआत से बिना अनुमति वाले पोतों के लिए होरमुज मार्ग को प्रभावी रूप से बंद किए हुए है।

विश्लेषकों को किसी बड़े साझा बयान की उम्मीद कम दिख रही है। European Council on Foreign Relations के नीति फेलो राफेल लॉस ने Al Jazeera से कहा कि BRICS शिखर बैठक से ऐसा सर्वसम्मत बयान निकलना मुश्किल है जो सामान्य रूप से देशों की संप्रभुता पर हमलों की निंदा से आगे जाए।

तेल, गैस और सदस्य देशों पर असर

भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, होरमुज जलडमरूमध्य पर भारी निर्भरता रखता है और यही मार्ग उसकी ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम धुरी बना हुआ है। लेख के मुताबिक, कभी दुनिया के 20% तेल और LNG प्रवाह का रास्ता रहा यह समुद्री मार्ग अब हालिया समय की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधाओं में से एक का केंद्र बन गया है।

इस संकट का असर BRICS के भीतर अलग-अलग रूप में दिख रहा है। चीन भी भारत की तरह खाड़ी के तेल पर निर्भर है, जबकि सऊदी अरब और UAE, दोनों बड़े तेल निर्यातक होने के साथ उसी समुद्री मार्ग का उपयोग करते हैं जिस पर अब ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps का नियंत्रण है। ब्राजील, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका जैसे सदस्य, भले ही सीधे होरमुज पारगमन पर कम निर्भर हों, फिर भी बढ़ती वैश्विक ईंधन कीमतों के दबाव का सामना कर रहे हैं।

बैठक से ईंधन और गैस कीमतों में उछाल से निपटने पर कुछ साझा समझ विकसित होने की उम्मीद है, लेकिन समूह के भीतर प्राथमिकताएं अलग हैं। ईरान निंदा चाहता है, भारत स्थिरता चाहता है, चीन वॉशिंगटन से संवाद में है, UAE खुली शिपिंग लेन चाहता है और सऊदी अरब तेल कीमतों पर सतर्क नजर रखे हुए है, जिससे BRICS की बहुध्रुवीय व्यवस्था की अवधारणा पर व्यावहारिक दबाव साफ दिख रहा है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के नई दिल्ली पहुंचने और BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले भारत-ईरान के संभावित द्विपक्षीय संवाद पर फोकस किया गया था। हमने यह भी रेखांकित किया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल-एलपीजी आयात, प्रेषण और होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति अनिश्चितता भारत के बाह्य क्षेत्र (रुपया, चालू खाता और विदेशी मुद्रा भंडार) पर दबाव बढ़ा सकती है।

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