मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल कीमतों में लगातार तेजी जारी है। शुक्रवार, October 23 को Brent crude का भाव लगभग $114 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो मई की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। निवेशक फारस की खाड़ी में जहाजों पर हमलों और क्षेत्र से तेल आपूर्ति को संभावित खतरों से जुड़ी खबरों पर करीब से नजर रख रहे हैं।
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CNBC के अनुसार, दिसंबर डिलीवरी वाले Brent crude futures 0.7% बढ़कर $113.50 प्रति बैरल पर पहुंच गए। अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) crude 0.8% चढ़कर $100.24 पर कारोबार कर रहा था।
Brent में इस सप्ताह लगभग 3.3% की बढ़त दर्ज होने की संभावना है। यह रुझान जारी रहा तो लगातार तीसरे सप्ताह इसकी कीमत बढ़ेगी। वहीं, WTI सप्ताह का अंत 1.1% की गिरावट के साथ कर सकता है, जिससे उसकी लगातार दो सप्ताह की बढ़त का सिलसिला टूट जाएगा।
Strait of Hormuz के आसपास तनाव बढ़ा
फारस की खाड़ी के देशों से तेल परिवहन के अहम मार्ग Strait of Hormuz के आसपास की स्थिति तेल बाजार में अस्थिरता के प्रमुख कारणों में से एक बनी हुई है।
October 22 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि Tehran अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले तेल की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
Truth Social पर एक पोस्ट में Trump ने आरोप लगाया कि ईरान जहाजों पर हमले और समुद्री बारूदी सुरंगों से जुड़ी खबरें गढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में अब Strait of Hormuz से अधिक तेल गुजर रहा है।
इस बीच, ईरान की समाचार एजेंसी Tasnim ने Islamic Revolutionary Guard Corps का हवाला देते हुए बताया कि फारस की खाड़ी में चार जहाजों पर हमला हुआ और उनमें आग लग गई। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, Strait of Hormuz में तीन अन्य जहाज बारूदी सुरंगों से टकराए।
इसके अलावा, ईरान के सेना प्रमुख ने कहा कि देश की सशस्त्र सेनाएं अपनी सैन्य क्षमताएं मजबूत करने के बाद असममित युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
हमलों के निशाने पर सऊदी अरब का तेल बुनियादी ढांचा
तनाव सऊदी अरब तक भी फैल गया है। Reuters के अनुसार, सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने कर्मचारियों को धहरान स्थित अपने मुख्यालय से निकलने और घर से काम करने का आदेश दिया।
यह फैसला यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों की एक श्रृंखला के बाद लिया गया।
हाल के सप्ताहों में हूतियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और Saudi Aramco के कई कार्यालयों पर हमले किए हैं। इन हमलों में कई लोगों की मौत हुई है।
जहाजों और तेल बुनियादी ढांचे पर लगातार हो रहे हमलों से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है। कारोबारियों को फारस की खाड़ी के देशों से आपूर्ति में और बाधा आने की आशंका है, जिससे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
तेल की बढ़ती कीमतों से Trump पर राजनीतिक दबाव
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के लिए अतिरिक्त राजनीतिक जोखिम पैदा कर रहा है। कांग्रेस के मध्यावधि चुनाव November 3 को होने हैं, जबकि तेल की बढ़ती कीमतों से पेट्रोल महंगा हो रहा है और अमेरिकी परिवारों का खर्च बढ़ रहा है। इससे मतदाताओं में असंतोष बढ़ रहा है और रिपब्लिकन पार्टी को मिलने वाला समर्थन घट सकता है।
October 18 को प्रकाशित Washington Post, ABC News और Ipsos के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 71% अमेरिकी मानते हैं कि पेट्रोल बहुत महंगा है, जबकि Trump की नौकरी के प्रदर्शन को मंजूरी देने वालों की संख्या घटकर 33% रह गई है। वहीं, AP-NORC के सर्वेक्षण में 69% उत्तरदाताओं ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध की कीमत इसके लाभों के मुकाबले बहुत अधिक है। इसलिए संघर्ष के और बढ़ने तथा ईंधन की कीमतें लगातार ऊंची बने रहने से चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति मुश्किल हो सकती है।
याद दिला दें कि सऊदी अरब पर हमलों के बाद पिछले दिन तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था।
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