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जर्मन धातुकर्मियों की हड़ताल

जर्मन धातुकर्मियों की हड़ताल
IG Metall की हड़ताल से जर्मनी की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर सवाल

​IG Metall की 3.7 मिलियन कर्मचारियों के लिए 5% वेतन वृद्धि की मांग के बीच जर्मन धातुकर्मियों ने 1 नवंबर, 2026 को हड़ताल शुरू कर दी। यूनियन की औद्योगिक ताकत से नियोक्ताओं को रियायतें देने पर मजबूर होना पड़ सकता है, लेकिन इससे मुनाफे का मार्जिन और सिकुड़ेगा। क्या जर्मनी का धातु और इलेक्ट्रिकल उद्योग बड़े पैमाने के संकट का सामना किए बिना बढ़ी हुई श्रम लागत वहन कर सकता है?

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विवाद का पैमाना

धातु और इलेक्ट्रिकल (M+E) क्षेत्र जर्मनी के औद्योगिक ढांचे में अहम भूमिका निभाता है। इसमें करीब 4 मिलियन लोग काम करते हैं और सालाना €1.3–1.4 ट्रिलियन का कारोबार होता है। यह विनिर्माण के मूल्यवर्धन और निर्यात में भी बड़ा योगदान देता है (क्षेत्र की आधी से अधिक बिक्री अक्सर विदेशों में होती है)। इसके प्रमुख उप-क्षेत्रों में ऑटोमोटिव, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और धातु उद्योग शामिल हैं।

चेतावनी स्वरूप विरोध प्रदर्शन Thyssenkrupp के Rasselstein टिनप्लेट संयंत्र, म्यूनिख में RF 360/Qualcomm, और ढलाई व रोलिंग इकाइयों में शुरू हुए। यूनियन की योजना 2,000 से अधिक कंपनियों में हड़ताल फैलाने की है। यूनियन सदस्यों के अनुसार, महंगाई अब भी करीब 2.5–3% है और कई लोगों की वास्तविक आय घट रही है। नियोक्ता ऊंची ऊर्जा लागत, कमजोर मांग और “औद्योगिकीकरण के क्षरण” को रोकने की जरूरत का हवाला देते हुए उनकी मांगें स्वीकार नहीं करना चाहते।

जर्मनी के प्रमुख उद्योग पर दबाव

जर्मनी का ऑटोमोटिव क्षेत्र पहले ही क्षमता और नौकरियां घटा रहा है, लेकिन अब उसे और बड़े खतरे का सामना करना पड़ रहा है। कई संयंत्रों में उत्पादन क्षमता का उपयोग 60% है, जो लाभप्रदता के लिए जरूरी 75–80% से काफी कम है। विश्लेषकों को 2030 तक ऑटोमोटिव क्षेत्र में करीब 2,00,000 नौकरियां घटने की आशंका है। चीनी निर्माता वाहन उत्पादन में 30% लागत लाभ का प्रभावी ढंग से फायदा उठा रहे हैं।

इसलिए, बढ़ी हुई श्रम लागत जर्मन उद्योगों की प्रतिस्पर्धी स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकती है। जर्मनी में विनिर्माण क्षेत्र की श्रम लागत €45–55 प्रति घंटा है, जो कई EU देशों और कुछ क्षेत्रों में अमेरिका से अधिक है। लंबी हड़तालें जस्ट-इन-टाइम सप्लाई चेन बाधित कर सकती हैं और अल्पावधि में उत्पादन हानि बढ़ा सकती हैं। इससे कम अवधि के काम और उत्पादन स्थानांतरित करने के फैसले तेज हो सकते हैं। वास्तविक वेतन बढ़ने से निजी खपत को लाभ होगा, लेकिन तभी जब कंपनियां मौजूदा रोजगार स्तर बनाए रखने में सक्षम रहें।

यूरोपीय सप्लाई चेन पर असर

जर्मनी में ऑटो-पार्ट्स, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स की आपूर्ति में बाधा से मध्य और पूर्वी यूरोप, फ्रांस, इटली, स्पेन आदि के असेंबली संयंत्र और आपूर्तिकर्ता प्रभावित होते हैं। EU के कई उपकरण निर्माता जर्मन मध्यवर्ती वस्तुओं पर निर्भर हैं। जर्मनी में हड़तालों की लहर से डिलीवरी में देरी और इन्वेंटरी बढ़ने का खतरा है। इसलिए सिंगल मार्केट में अस्थायी उत्पादन ठहराव संभव है।

जर्मनी की अपेक्षाकृत ऊंची प्रति-इकाई श्रम लागत यूरोज़ोन के भीतर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती है। यदि उत्पादकता में समानुपातिक वृद्धि के बिना जर्मन वेतन बढ़ता है, तो कम लागत वाले अन्य EU क्षेत्रों में निवेश अधिक आकर्षक हो जाएगा। साथ ही, जर्मनी की कमजोर औद्योगिक मांग से EU के आपूर्तिकर्ताओं के ऑर्डर घटेंगे। इससे यूरोज़ोन के विनिर्माण PMI पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इस विवाद का केंद्र यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में क्रय शक्ति की रक्षा और निर्यात को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाना है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक प्रभाव

यूरोप से बाहर भी यह स्थिति वैश्विक सप्लाई चेन और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती है। लंबे समय तक व्यवधान रहने पर खरीदार एशिया या उत्तरी अमेरिका के स्रोतों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे इस क्षेत्र के मौजूदा रुझानों को गति मिलेगी। चीन की लागत संबंधी बढ़त और सरकारी समर्थन इलेक्ट्रिक वाहनों तथा पुर्जों के यूरोपीय निर्माताओं पर दबाव डालते हैं। ऐसे में यूरोप में श्रम लागत बढ़ने से यह अंतर और चौड़ा हो सकता है, जबकि इसका मुकाबला करने की कोई स्पष्ट रणनीति पेश नहीं की गई है।

हाइपरस्केलर और विद्युतीकरण व रक्षा में निवेश करने वाली औद्योगिक कंपनियां भी जर्मनी की वार्ताओं पर नजर रख रही हैं। कुछ निवेशक पूंजीगत व्यय को अधिक स्थिर या कम लागत वाले क्षेत्रों में लगाने को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसके विपरीत, ऐसा समझौता जो क्रय शक्ति बनाए रखते हुए प्रतिस्पर्धा को बरकरार रखे, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को समर्थन देगा।

आगे के रास्ते और प्रणालीगत जोखिम

स्थिति अभी भी चिंताजनक है, लेकिन कई परिदृश्य संभव हैं। एक मध्यमार्गी समझौता हो सकता है। जर्मनी में वेतन को लेकर पहले के विवाद अक्सर ऐसे समझौतों पर समाप्त हुए हैं जिनमें वेतन वृद्धि और संघर्षरत कंपनियों की क्षमता के बीच संतुलन बनाया गया। हालांकि, मौजूदा माहौल में पारंपरिक ऑटो क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता, ऊर्जा लागत का नुकसान और तकनीकी बदलाव शामिल हैं। IG Metall की Nadine Boguslawski ने कहा है कि नियोक्ताओं का प्रस्ताव “कामगारों के लिए वेतन कटौती और अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक कमजोर करने के बराबर है।” उनका कहना है कि “क्रय शक्ति के बिना मजबूत अर्थव्यवस्था नहीं हो सकती।” नियोक्ताओं का जवाब है कि लागत में और बढ़ोतरी से नौकरियां और घटेंगी तथा संयंत्र बंद होंगे।

यदि हड़तालें तेज होती हैं, तो जर्मनी में अल्पकालिक उत्पादन हानि यूरोपीय और वैश्विक सप्लाई चेन के जरिए और बढ़ेगी। यदि अंतिम समझौते से श्रम लागत बढ़ती है, तो दीर्घकाल में औद्योगिकीकरण के क्षरण और निवेश घटने का खतरा होगा। इसका नतीजा दिखाएगा कि क्या यूरोप की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्था इस चुनौती से उबरकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती है। हालांकि, मौजूदा अनिश्चितता कई महीनों तक बनी रह सकती है, जिससे इस प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों के लिए सफल समाधान और मुश्किल हो जाएगा।

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