कर्नाटक बजट में बेंगलुरु के लिए टनल रोड, मेट्रो और बाढ़ नियंत्रण पर बड़े पूंजीगत निवेश
2026-27 के कर्नाटक बजट में बेंगलुरु की ट्रैफिक भीड़ और हर मानसून में उभरने वाली बाढ़ की समस्या को केंद्र में रखकर कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित किए गए हैं। बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शहर को “दुनिया का सबसे रहने योग्य शहर” बनाने के लक्ष्य की बात कही। दस्तावेज में अंडरग्राउंड टनल कॉरिडोर, मेट्रो और सब-अर्बन रेल विस्तार, स्टॉर्मवॉटर ड्रेनेज, कावेरी जलापूर्ति, तथा सामाजिक ढांचे से जुड़े निवेश एक साथ रखे गए हैं।
हाइलाइट्स
- कर्नाटक बजट में बेंगलुरु के लिए दो अंडरग्राउंड टनल रोड कॉरिडोर, जिसकी लागत 40,000 करोड़ रुपये है, BOOT मॉडल के तहत मंजूरी मिली।
- 2026-27 तक नम्मा मेट्रो नेटवर्क में 41 किमी विस्तार, सबअर्बन रेलवे के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटन और दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य।
- बाढ़ और जल प्रबंधन हेतु 5,000 करोड़ रुपये का पांच वर्षीय आपदा कार्यक्रम, कावेरी फेज-VI जल परियोजना के लिए 6,939 करोड़ रुपये प्रस्तावित।
टनल रोड और सड़क नेटवर्क अपग्रेड की योजना
Financial Express के अनुसार, राज्य सरकार ने शहर की सतही सड़कों पर दबाव घटाने के लिए लगभग 40 किमी के दो अंडरग्राउंड टनल कॉरिडोर को मंजूरी दी है, जिनकी अनुमानित लागत 40,000 करोड़ रुपये बताई गई है। यह परियोजना Build-Own-Operate-Transfer (BOOT) मॉडल के तहत लागू करने की योजना है, जिसमें निजी कंपनियां निर्माण और संचालन के बाद संपत्ति सरकार को हस्तांतरित करती हैं। प्रस्तावित कॉरिडोर में हेब्बाल जंक्शन से एचएसआर लेआउट के सिल्क बोर्ड तक नॉर्थ-साउथ टनल और केआर पुरम से मैसूर रोड तक ईस्ट-वेस्ट टनल शामिल हैं।
इसके अलावा, हेब्बाल जंक्शन और मेखरी सर्कल के बीच टनल और एलिवेटेड रोड के लिए 2,250 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसे बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा बनाया जाना है। आउटर रिंग रोड पर सिल्क बोर्ड जंक्शन से केआर पुरम मेट्रो स्टेशन तक के हिस्से को 450 करोड़ रुपये में “ग्लोबल-स्टैंडर्ड” कॉरिडोर में बदलने का प्रस्ताव भी रखा गया है। बजट में 158 किमी सड़कों को 1,700 करोड़ रुपये में व्हाइट-टॉपिंग, अगले तीन वर्षों में 450 किमी व्हाइट-टॉपिंग के लिए 3,000 करोड़ रुपये, 175 जंक्शनों के रीडिजाइन व सौंदर्यीकरण, 500 किमी फुटपाथ अपग्रेड और तीन वर्षों में 100 स्काईवॉक निर्माण जैसी योजनाएं सूचीबद्ध हैं।
मेट्रो, सब-अर्बन रेल और बहु-मॉडल कनेक्टिविटी
बजट के अनुसार, नम्मा मेट्रो का मौजूदा नेटवर्क 96 किमी है और यह रोजाना लगभग 10 लाख यात्रियों को सेवा देता है। सरकार ने 2026-27 में अतिरिक्त 41 किमी मेट्रो लाइनों को पूरा करने की योजना रखी है, ताकि तेजी से बढ़ते उपनगरों तक कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सके। आउटर रिंग रोड पर मेट्रो वायाडक्ट के साथ 9 किमी पैदल वॉकवे के लिए 160 करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है। इस ढांचे का उद्देश्य अंतिम-मील कनेक्टिविटी और पैदल यातायात को बेहतर बनाना है।बेंगलुरु सब-अर्बन रेलवे प्रोजेक्ट में कॉरिडोर 2 (बेन्निगनाहल्ली से चिक्कबनावरा) के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होने और कॉरिडोर 4 (हीलालिगे से राजनकुंटे) के लिए प्रक्रिया जारी होने का उल्लेख किया गया है। राज्य ने इस वर्ष के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं और नेटवर्क को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। इसके अतिरिक्त, बैयप्पनाहल्ली-होसूर और यशवंतपुर-चन्नसंद्रा रेलवे डबलिंग परियोजना 812 करोड़ रुपये की है, जिसमें राज्य का योगदान 406 करोड़ रुपये बताया गया है। इन पहलों का समग्र लक्ष्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाकर सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
बाढ़, जलापूर्ति और सामाजिक अवसंरचना पर खर्च
बजट में बेंगलुरु की बाढ़ समस्या को झीलों पर अतिक्रमण, स्टॉर्मवॉटर ड्रेन्स में रुकावट और अनियोजित निर्माण से जुड़ा बताया गया है। जलापूर्ति के लिए कावेरी फेज-VI परियोजना 6,939 करोड़ रुपये की प्रस्तावित है, जिसे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) का समर्थन बताया गया है। दस्तावेज के अनुसार, इससे शहर को अतिरिक्त छह टीएमसी पानी की आपूर्ति की योजना है, जबकि वर्तमान में पहले के चरणों के माध्यम से लगभग 2,225 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) पानी मिलता है। यह निवेश बढ़ती आबादी और मांग के संदर्भ में सप्लाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में रखा गया है।स्टॉर्मवॉटर मैनेजमेंट में प्राथमिक ड्रेन्स और झील विकास कार्यों के लिए 273 करोड़ रुपये का प्रावधान है। वर्ल्ड बैंक समर्थित ‘कर्नाटक वाटर सिक्योरिटी एंड डिजास्टर रेजिलिएंस प्रोग्राम’ के तहत ड्रेनेज सुधार के लिए 2,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके साथ ही, बेंगलुरु में बाढ़ से निपटने के लिए विशेष रूप से 5,000 करोड़ रुपये का पांच वर्षीय आपदा प्रबंधन कार्यक्रम घोषित किया गया है।
सामाजिक अवसंरचना में, राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिजीजेज में 1,000-बेड चैरिटेबल सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के साथ साझेदारी में विकसित करने का प्रस्ताव है। गोविंदराजनगर में बीबीएमपी अस्पताल में श्री जयदेवा इंस्टीट्यूट के क्षेत्रीय केंद्र, वाणी विलास अस्पताल और गुलबर्गा मेडिकल कॉलेज में नए आईवीएफ केंद्र, तथा वर्किंग वूमेन हॉस्टल, छात्रावास, डिजिटल लाइब्रेरी और माइनॉरिटी ट्रेनिंग सेंटर जैसी घोषणाएं भी बजट में शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि परिवहन और जल-प्रबंधन के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण ढांचे में निवेश शहर की दीर्घकालिक रहने योग्य क्षमता को मजबूत करेगा।
हमने पहले पश्चिम बंगाल में राज्यपाल पद को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और इसके राजनीतिक संकेतों पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में सीवी आनंद बोस के इस्तीफे, आर एन रवि को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा समय-निर्धारण व परामर्श प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों का जिक्र था, साथ ही चुनाव-पूर्व माहौल, प्रशासनिक निरंतरता और केंद्र-राज्य संबंधों पर संभावित असर को रेखांकित किया गया था।
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