केरल सरकार 15 जून से महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू करेगी, KSRTC पर राजस्व दबाव बढ़ेगा

केरल सरकार 15 जून से महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू करेगी, KSRTC पर राजस्व दबाव बढ़ेगा
महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा

केरल सरकार 15 जून से प्रियदर्शिनी योजना के तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए चुनिंदा KSRTC बसों में मुफ्त यात्रा शुरू करने जा रही है। यह कदम राज्य के सार्वजनिक परिवहन उपयोग और महिला गतिशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है, जबकि KSRTC पहले से ही गंभीर वित्तीय दबाव में है।

हाइलाइट्स

  • केरल सरकार 15 जून से KSRTC की लगभग 3,000 ऑर्डिनरी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा शुरू करेगी, योजना का मासिक राजस्व नुकसान लगभग 65-70 करोड़ रुपये होगा।
  • राज्य सरकार ने कहा कि इस योजना से सालाना 750-800 करोड़ रुपये तक का घाटा होगा, जिसकी भरपाई बजट सहायता से की जाएगी।
  • निजी बस संचालकों को चिंता है कि महिला यात्री मुफ्त सेवा के कारण सरकारी बसों की ओर शिफ्ट होकर उनकी आय और लाभप्रदता पर असर डाल सकती हैं।

योजना का दायरा और कार्यान्वयन

Financial Express के अनुसार, योजना के पहले चरण में KSRTC की केवल ऑर्डिनरी बस सेवाओं में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। ग्रामीण, अर्धशहरी, अंतर-जिला और जिला-भीतर मार्गों पर चलने वाली करीब 3,000 ऑर्डिनरी बसों को इसमें शामिल किया गया है।

फास्ट पैसेंजर, सुपर फास्ट, सुपर क्लास, आरक्षित लंबी दूरी, स्लीपर और अन्य प्रीमियम सेवाओं में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। निजी बसों पर भी यह योजना लागू नहीं होती।

मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कहा कि सरकार कार्यक्रम की हर महीने समीक्षा करेगी और KSRTC की वित्तीय स्थिति तथा यात्री आंकड़ों के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार करने पर विचार करेगी। सरकार का अनुमान है कि नियमित महिला यात्री हर महीने 800 रुपये से 1,000 रुपये तक बचा सकती हैं, जिससे वार्षिक बचत 12,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

KSRTC की वित्तीय स्थिति और क्षेत्रीय प्रभाव

सरकार का कहना है कि ऑर्डिनरी बसों में मुफ्त यात्रा से KSRTC को हर महीने लगभग 65 करोड़ से 70 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है, जो सालाना करीब 750 करोड़ से 800 करोड़ रुपये बैठता है। राज्य सरकार ने इस घाटे की भरपाई बजटीय सहायता से करने की बात कही है, जबकि कुछ आकलनों में पहले चरण का खर्च करीब 60 करोड़ रुपये मासिक बताया गया है।

योजना ऐसे समय लाई जा रही है जब KSRTC पहले से सरकारी सहायता पर बहुत अधिक निर्भर है। राज्य हर साल लगभग 22,000 कर्मचारियों के वेतन और करीब 40,000 सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च करता है।

निगम के पास अभी करीब 4,250 बसें सेवा में हैं, जो 2016-17 में लगभग 6,000 के स्तर से काफी कम हैं। आधे से अधिक बेड़ा 10 साल से पुराना है, जिससे खराबी और सेवा रद्द होने की घटनाएं बढ़ती हैं। उत्तर केरल में ऑर्डिनरी बसों की अपेक्षाकृत कम उपलब्धता भी योजना की पहुंच को सीमित कर सकती है, जबकि लगभग 1,400 KSRTC बसें केवल तिरुवनंतपुरम और कोल्लम जिलों में केंद्रित हैं।

निजी बस संचालकों ने भी आशंका जताई है कि KSRTC में मुफ्त यात्रा मिलने से खासकर महिला यात्री निजी सेवाओं से सरकारी बसों की ओर शिफ्ट हो सकती हैं, जिससे उनकी आय और लाभप्रदता प्रभावित होगी। सरकार इस योजना को इंदिरा गारंटी ढांचे के व्यापक कल्याण पैकेज का हिस्सा मानती है, जिसमें छात्राओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता, विस्तारित स्वास्थ्य बीमा, आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए पेंशन और आंगनवाड़ी तथा ASHA कार्यकर्ताओं के लिए बढ़ा समर्थन भी शामिल है।

मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल और 4,399 दिनों के रिकॉर्ड पर हमारी पिछली रिपोर्ट में आर्थिक सुधारों, डिजिटल भुगतान (UPI) के विस्तार और बुनियादी ढांचा निवेश जैसे प्रमुख कदमों का आकलन किया गया था। लेख में यह भी बताया गया था कि इन नीतिगत फैसलों के साथ GDP वृद्धि, राजमार्ग/मेट्रो नेटवर्क विस्तार और ऊर्जा क्षमता बढ़ने जैसे व्यापक आर्थिक संकेतकों पर सरकार की उपलब्धियों का दावा केंद्र में रहा।

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