भारत में मोदी कार्यकाल की नीतियां और बुनियादी ढांचा विस्तार आर्थिक परिदृश्य को बदलते हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4,399 लगातार दिनों तक पद पर रहकर भारत के सबसे लंबे समय तक बिना रुकावट सेवा देने वाले प्रधानमंत्रियों में नई राजनीतिक मिसाल स्थापित करते हैं। यह पड़ाव उनके 2014 से शुरू हुए कार्यकाल के दौरान आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचा निवेश, डिजिटल भुगतान विस्तार और बड़े संवैधानिक फैसलों की विरासत पर बहस को फिर तेज करता है।
हाइलाइट्स
- भारत की GDP 2025 तक 4 ट्रिलियन डॉलर पार करती है और वित्त वर्ष 2025-26 में वृद्धि दर 7% से अधिक बनी रहती है।
- राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2014 के 91,000 किमी से 2026 तक 1.5 लाख किमी और मेट्रो रेल नेटवर्क 1,100 किमी के पार पहुंचता है।
- ऊर्जा क्षेत्र में स्थापित क्षमता 530 गीगावाट पार करती है, सौर और पवन परियोजनाएं मिश्रण में प्रमुख हिस्सेदारी हासिल करती हैं।
12 साल के कार्यकाल की प्रमुख नीतियां
FinancialExpress.com के अनुसार, यह राजनीतिक मील का पत्थर ऐसे समय आता है जब केंद्र सरकार मोदी काल को आर्थिक पुनर्गठन, कल्याण वितरण और निर्णायक नीति हस्तक्षेपों के दौर के रूप में पेश करती है। 26 मई 2014 को शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी को लगातार तीन लोकसभा चुनावी जीत दिलाकर इस रिकॉर्ड तक पहुंचते हैं, जबकि उनके समर्थक इसे जनविश्वास का संकेत बताते हैं और आलोचक केवल लंबे कार्यकाल को सफलता का पैमाना मानने पर सवाल उठाते हैं।2014 में पद संभालने के समय भारत को अक्सर महंगाई, राजकोषीय दबाव और धीमी वृद्धि से जूझती उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था। 2025 तक भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाता है और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचता है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में वृद्धि 7% से ऊपर रहती है।
सरकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग क्षेत्र में सकल एनपीए में गिरावट को भी अपनी उपलब्धियों में शामिल करती है। विनिर्माण क्षेत्र में Make in India, PLI योजनाएं और सेमीकंडक्टर निवेश घोषणाएं घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को रेखांकित करती हैं, जबकि UPI का विस्तार भारत को रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में प्रमुख बाजार के रूप में स्थापित करता है।
बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और राष्ट्रीय प्रभाव
बुनियादी ढांचा विस्तार मोदी सरकार के शासन मॉडल का केंद्रीय स्तंभ बनता है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2014 के लगभग 91,000 किमी से 2026 तक करीब 1.5 लाख किमी तक बढ़ता है, मेट्रो रेल नेटवर्क 1,100 किमी से अधिक तक फैलता है, परिचालन हवाई अड्डों की संख्या दोगुने से अधिक होती है और ब्रॉड-गेज रेलवे विद्युतीकरण लगभग पूर्ण स्तर तक पहुंचता है।ऊर्जा क्षेत्र में स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 530 गीगावाट के पार जाती है और सौर तथा पवन परियोजनियां ऊर्जा मिश्रण में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करती हैं। सरकार का कहना है कि इससे जलवायु लक्ष्यों की दिशा में प्रगति, बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार और उद्योग की प्रतिस्पर्धा को समर्थन मिलता है।
आर्थिक और अवसंरचनात्मक बदलावों के साथ कई बड़े राजनीतिक फैसले भी इस दौर को परिभाषित करते हैं। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने की संसदीय मंजूरी, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा, GST के जरिए एकीकृत अप्रत्यक्ष कर ढांचा, तीन तलाक पर कानून, नक्सलवाद विरोधी अभियान और उरी सर्जिकल स्ट्राइक तथा बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी सुरक्षा कार्रवाइयां केंद्र की अधिक आक्रामक राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन नीति को दर्शाती हैं।
भारत के RCEP से बाहर रहने पर हमारी पिछली रिपोर्ट में पीयूष गोयल के उस रुख को रेखांकित किया गया था कि मोदी सरकार के कार्यकाल में इस व्यापार समझौते में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। लेख में बताया गया था कि सरकार ने घरेलू विनिर्माण, MSME और किसानों पर संभावित दबाव तथा व्यापार घाटे के जोखिम का हवाला दिया, साथ ही चीन सहित थल-सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश पर Press Note 3 के तहत कड़ी जांच और Press Note 2 के जरिए सीमित ढील के संकेत भी दिए।
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