भारत में थोक मुद्रास्फीति 11 महीने के उच्च स्तर पर, फरवरी में WPI 2.13% पहुंचा

भारत में थोक मुद्रास्फीति 11 महीने के उच्च स्तर पर, फरवरी में WPI 2.13% पहुंचा
मुद्रास्फीति 11 माह शिखर

सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 2.13% हो गई, जो 11 महीने का उच्च स्तर है। जनवरी के 1.81% के मुकाबले यह उछाल निर्मित उत्पादों और प्राथमिक वस्तुओं में व्यापक बढ़त के चलते आया, जबकि मध्य 2025 में देखी गई गिरावट के बाद यह रुझान तेज पलटाव दिखाता है।

हाइलाइट्स

  • फरवरी 2026 में भारत की WPI मुद्रास्फीति 2.13% रही, जो मार्च 2025 के बाद सबसे उच्चतम स्तर है, जनवरी में यह 1.81% थी।
  • निर्मित वस्तुओं में मुद्रास्फीति 2.92% और प्राथमिक लेखों में 3.27% पहुंची, जिसमें धातु, वस्त्र, तंबाकू, तेल बीज और खाद्य लेख प्रमुख रहे।
  • मुख्य अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी कि मार्च 2026 से ऊंचे कच्चे तेल दाम ($100 प्रति बैरल) और पश्चिम एशिया के संकट के कारण WPI में और तेजी संभव है।

सरकारी आंकड़ों में फरवरी की बढ़त

Forbes India के अनुसार, फरवरी 2026 में WPI 2.13% पर पहुंचा, जो मार्च 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। जनवरी में यह 1.81% था, यानी महीने-दर-महीने गति बढ़ी है। लेख के अनुसार 2025 के मध्य में WPI में कमजोरी दिखी थी और अक्टूबर 2025 में यह -1.02% तक चला गया था, इसलिए मौजूदा आंकड़ा तेज बदलाव को रेखांकित करता है। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण निर्मित वस्तुओं और प्राथमिक वस्तुओं में व्यापक आधार पर कीमतों का बढ़ना बताया गया है।

निर्मित वस्तुएं और प्राथमिक लेखों का योगदान

सूचकांक में सबसे अधिक वेटेज रखने वाले निर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति बढ़कर 2.92% हो गई, जिससे कुल WPI को ऊपर खींचने में बड़ी भूमिका रही। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक इस खंड में बढ़त का बड़ा हिस्सा धातु उत्पादों, वस्त्र और तंबाकू से जुड़ा है। प्राथमिक लेखों में भी दबाव बढ़ा और इस श्रेणी की मुद्रास्फीति 3.27% पर पहुंची। खाद्य लेख 2.19% बढ़े, जिसमें फल, सब्जियां तथा मांस और अंडा खंड प्रमुख रहे, जबकि अनाज और दालें अभी भी डिफ्लेशन में रहकर कुल बढ़त को कुछ हद तक सीमित करती रहीं।

कच्चे तेल के जोखिम और आगे का अनुमान

मदन सबनवीस ने चेतावनी दी कि मार्च के आंकड़ों में पश्चिम एशिया के संघर्ष के असर और सूचकांक में कच्चे तेल को दिए गए अधिक वेटेज के कारण रुझान तेज हो सकता है। उनके अनुसार मार्च से आगे WPI तेजी से बढ़ सकता है, क्योंकि ऊंचे तेल दामों का असर सूचकांक में अधिक स्पष्ट रूप से समाहित होगा और यह CPI की तुलना में कच्चे तेल के $100 प्रति बैरल जैसे स्तरों का प्रभाव बेहतर प्रतिबिंबित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्मित उत्पादों पर प्रभाव अहम होगा, क्योंकि यही आगे चलकर CPI में लागत के प्रसारण का आधार बन सकता है। गैर-खाद्य प्राथमिक वस्तुओं में तिलहनों की कीमतें 25.38% बढ़ीं; सबनवीस के अनुसार अप्रैल के बाद रबी सरसों की आवक से राहत आ सकती है, जबकि चना और गेहूं जैसी रबी फसलों के आने से दालों और अनाज पर दबाव कुछ कम होने की संभावना है। इस बीच ईंधन और बिजली श्रेणी -3.78% के साथ डिफ्लेशन में रही और पेट्रोल, डीजल व LPG में सालाना आधार पर गिरावट दिखी, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल के रुझानों को देखते हुए उन्होंने कहा कि यह ‘बफर’ लंबे समय तक नहीं टिक सकता।

हमने पहले फरवरी 2026 के खुदरा महंगाई (CPI) आंकड़ों पर रिपोर्ट किया था, जिसमें रीडिंग जनवरी के 2.74% से बढ़कर 3.21% रही और मार्च में ईंधन कीमतों व पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण दबाव बने रहने की बात कही गई थी। उस रिपोर्ट में पर्सनल केयर (सोना-चांदी) और खाद्य महंगाई की तेज चाल के साथ राज्यवार तस्वीर व मार्च के लिए 3.2%–3.5% के अनुमान पर भी फोकस था।

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