केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की ‘भाव्या’ योजना के तहत 100 औद्योगिक पार्कों को मंजूरी दी
केंद्र सरकार के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत ऑद्यौगिक विकास योजना (BHAVYA) को मंजूरी दी है, जिसके तहत 2026-27 से 2031-32 के बीच देशभर में 100 ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्क विकसित किए जाते हैं। सरकार का लक्ष्य 34,000 एकड़ निवेश-तैयार भूमि उपलब्ध कराना और 2031-32 तक 15 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है, ताकि निवेश प्रस्ताव से उत्पादन शुरू होने तक का समय घटता है।
हाइलाइट्स
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की भाव्या योजना के अंतर्गत 100 औद्योगिक पार्कों को मंजूरी दी।
- योजना अंतर्गत सामान्य राज्यों में न्यूनतम 100 एकड़ और पूर्वोत्तर/पहाड़ी राज्यों में 25 एकड़ भूमि पर प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक केंद्र वित्तीय सहायता देगा।
- सरकार ने अनुमानित किया कि भाव्या योजना से 15 लाख प्रत्यक्ष रोजगार और लॉजिस्टिक्स व सेवाओं में अप्रत्यक्ष लाभ सृजित होंगे।
भाव्या योजना की रूपरेखा और चयन प्रक्रिया
फोर्ब्स इंडिया के अनुसार राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम (NICDC) को, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत, इस योजना की नोडल एजेंसी नामित किया जाता है। योजना के क्रियान्वयन के लिए NICDC राज्य सरकारों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के साथ मिलकर विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) बनाता है। सरकार के मुताबिक शहरों और परियोजनाओं का चयन ‘चैलेंज मोड’ के जरिए होता है, जिसमें औद्योगिक सुधार और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रति प्रतिबद्ध राज्यों को प्रतिस्पर्धी आधार पर प्राथमिकता मिलती है।
राज्यों की पात्रता और फंडिंग ढांचा
योजना के तहत सामान्य श्रेणी के राज्यों के लिए कम से कम 100 एकड़ ‘अविवादित’ या ‘अनएन्कम्बर्ड’ भूमि की शर्त रखी जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह न्यूनतम सीमा 25 एकड़ होती है। ब्राउनफील्ड परियोजनाएं भी उन्नयन के लिए पात्र रहती हैं, बशर्ते वे ग्रीनफील्ड विकास के समान मानदंड पूरे करती हैं। सरकार प्रति एकड़ अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता देती है, जो भूमिगत यूटिलिटीज, आईसीटी सिस्टम, रेडी-बिल्ट फैक्ट्री शेड, टेस्टिंग लैब और श्रमिक आवास जैसी सामाजिक अवसंरचना को कवर करती है।उद्योगों के लिए संभावित लाभ और रोजगार अनुमान
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार भारत वैश्विक विनिर्माण के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर रहा है, जिसे नीति-स्थिरता, कुशल प्रतिभा और बढ़ती डिजाइन क्षमताएं समर्थन देती हैं। उनके मुताबिक भाव्या योजना इस बढ़त को ‘शॉवल-रेडी’ अवसंरचना में बदलने के लिए तैयार की जाती है और यह एमएसएमई से लेकर वैश्विक टेक कंपनियों तक के लिए उद्योग-अज्ञेय बनी रहती है। सरकार का अनुमान है कि इससे 15 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां बनती हैं, जबकि लॉजिस्टिक्स और सेवाओं जैसे अप्रत्यक्ष क्षेत्रों में भी अतिरिक्त अवसर पैदा होते हैं। बहु-मॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र बाहरी अवसंरचना लागत का 25% तक वहन करता है, जिससे निवेश को उत्पादन में बदलने की गति बढ़ती है।हमने पहले संसदीय स्थायी समिति (श्रम) की रिपोर्ट पर लिखा था, जिसमें श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से ईएसआईसी योजना के तहत 21,000 रुपये प्रति माह की वेज सीलिंग में संशोधन की प्रक्रिया तेज करने की सिफारिश की गई थी। उस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि वेज सीलिंग बढ़ने पर लाखों अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा कवरेज में आ सकते हैं और समिति ने न्यूनतम पेंशन की पर्याप्तता की समीक्षा व नियमित आवधिक समीक्षा के लिए संरचित तंत्र बनाने पर जोर दिया था।
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