महिंद्रा एंड महिंद्रा ने पूंजी अनुशासन से विकास रफ्तार बढ़ाई

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने पूंजी अनुशासन से विकास रफ्तार बढ़ाई
पूंजी अनुशासन से विकास

फोर्ब्स इंडिया के साथ बातचीत में महिंद्रा एंड महिंद्रा के समूह सीईओ और प्रबंध निदेशक अनीश शाह ने कहा कि 2020 में पूंजी आवंटन पर सख्त, डेटा-आधारित फैसलों ने समूह को नुकसान वाले कारोबारों से बाहर निकलने और मुख्य व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की। यह बदलाव उस समय शुरू हुआ जब महामारी के दौरान बोर्ड ने दक्षिण कोरियाई इकाई स्सांगयोंग मोटर के लिए समर्थन योजना वापस ली और हिस्सेदारी बेचने का संकेत दिया। शाह के नेतृत्व के पांच साल पूरे होने के करीब, समूह अब एसयूवी, ट्रैक्टर, ईवी, वित्तीय सेवाओं और चुनिंदा उभरते कारोबारों में टिकाऊ वृद्धि की दिशा पर जोर दे रहा है।

हाइलाइट्स

  • महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 2020 के बाद 15 घाटे वाले व्यवसायों से बाहर निकलकर पूंजी अनुशासन के माध्यम से बाजार पूंजीकरण और लाभप्रदता में वृद्धि की।
  • कंपनी ने जून 2020 में पांच वर्षों में 18 प्रतिशत रिटर्न ऑन इक्विटी का लक्ष्य रखा था, जो मात्र 18 महीनों में हासिल कर लिया।
  • महिंद्रा लॉजिस्टिक्स और महिंद्रा फाइनेंस जैसे ग्रोथ जेम्स ने दिसंबर तिमाही में 11 तिमाहियों बाद मुनाफा और 96 प्रतिशत मुनाफा वृद्धि दर्ज की।

2020 के बाद पूंजी आवंटन और कारोबार पुनर्संरचना

शाह के कार्यभार संभालने से पहले ही समूह पर अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनियों के नुकसान का दबाव था। वित्त वर्ष 2020 में इन इकाइयों का घाटा 5,200 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिससे अन्य कारोबारों से आने वाला अधिकांश लाभ खत्म हो गया और अगस्त 2018 से मार्च 2020 के बीच बाजार पूंजीकरण में करीब 70 प्रतिशत गिरावट आई। इसी पृष्ठभूमि में कंपनी ने 15 से 17 महीनों के भीतर 15 नुकसान वाले व्यवसायों से बाहर निकलकर पूंजी अनुशासन को अपनी रणनीति का केंद्र बनाया।

शाह ने कहा कि उस चरण में तेज फैसले लेना, पूंजी का अनुशासित इस्तेमाल करना और क्रियान्वयन पर सख्ती जरूरी थी। उन्होंने यह भी कहा कि समूह को स्पष्ट रूप से तय करना पड़ा कि किन क्षेत्रों में निवेश जारी रखना है और किनसे बाहर निकलना है। इस रणनीति ने महिंद्रा एंड महिंद्रा को एसयूवी, ट्रैक्टर और ईवी जैसे मुख्य क्षेत्रों पर अधिक केंद्रित बनाया।

दिसंबर 2024 की मोटीलाल ओसवाल वेल्थ क्रिएशन स्टडी में रामदेव अग्रवाल ने लिखा कि इस पूंजी आवंटन रणनीति ने कंपनी की वित्तीय प्रदर्शन क्षमता को मजबूत किया। निवेशकों की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही और मार्च 2020 के कोविड निचले स्तर से अप्रैल 2022 तक शेयर करीब तीन गुना बढ़ा। 19 मार्च 2026 तक शेयर 3,059 रुपये तक पहुंच चुका था।

एसयूवी, ईवी और मुख्य कारोबारों में वृद्धि का आधार

शाह के अनुसार पिछले 15 से 18 महीनों में उनकी आंतरिक चर्चाएं लागत कटौती से हटकर कारोबार की दीर्घकालिक दृष्टि और निवेश आवश्यकताओं पर केंद्रित हैं। जून 2020 में कंपनी ने पांच वर्षों में कम से कम 18 प्रतिशत रिटर्न ऑन इक्विटी का लक्ष्य रखा था, जबकि वित्त वर्ष 2020 में यह 6.4 प्रतिशत था। शाह ने कहा कि यह लक्ष्य पांच साल के बजाय 18 महीनों में हासिल हो गया।

ऑटो कारोबार ने इस बदलाव में प्रमुख भूमिका निभाई। राजेश जेजूरिकर के नेतृत्व में महिंद्रा ऑटो ने एसयूवी के लिए ब्रांड पर्पस रणनीति अपनाई, जिसके तहत एक्सयूवी700, थार के वैरिएंट और स्कॉर्पियो जैसे मॉडल केवल किफायती विकल्प नहीं, बल्कि आकांक्षी उत्पाद के रूप में स्थापित हुए। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही तक राजस्व बाजार हिस्सेदारी के आधार पर कंपनी 24.1 प्रतिशत के साथ एसयूवी श्रेणी में अग्रणी है।

मोटीलाल ओसवाल के विश्लेषकों ने दिसंबर 2025 तिमाही नतीजों के बाद वित्त वर्ष 2025 से 2028 के बीच एबिट्डा में 18 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि का अनुमान जताया। उन्होंने 2026 में आईसीई सेगमेंट में दो रिफ्रेश और ईवी लाइनअप में नई पेशकशों का उल्लेख किया। साथ ही, सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप की तंगी को उद्योग के लिए जोखिम बताया, हालांकि कंपनी ने अल्पकालिक आपूर्ति और दीर्घकालिक लोकलाइजेशन उपायों पर काम किया है।

लॉजिस्टिक्स, वित्त और ग्रोथ जेम्स पर अगला दांव

मुख्य कारोबारों के स्थिर होने के बाद समूह अब छोटे लेकिन उच्च संभावनाशील व्यवसायों पर अधिक ध्यान दे रहा है, जिन्हें शाह ने ग्रोथ जेम्स के रूप में चिह्नित किया है। इस पोर्टफोलियो में नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर टेक सेवाओं तक 10 कारोबार शामिल हैं, जिनकी वैल्यूएशन शाह के कार्यकाल में कई गुना बढ़ी है। शाह का कहना है कि जैविक और अकार्बनिक वृद्धि दोनों संभव हैं, लेकिन अधिग्रहण का अधिकार प्रदर्शन से कमाना होगा।

2025 में महिंद्रा लॉजिस्टिक्स में हेमंत सिक्का की नियुक्ति के बाद कंपनी ने उपभोक्ता और विनिर्माण वर्टिकल अलग किए और व्हिजार्ड तथा लास्ट माइल डिलीवरी को एकीकृत किया। दिसंबर तिमाही में कंपनी 11 लगातार तिमाही घाटों के बाद लाभ में लौटी। यह संकेत देता है कि समूह अपने उभरते कारोबारों में प्रबंधन संरचना और परिचालन फोकस दोनों को मजबूत कर रहा है।

महिंद्रा फाइनेंस ने भी कई वर्षों की परिसंपत्ति गुणवत्ता और मार्जिन चिंताओं के बाद मजबूत वापसी की है। दिसंबर तिमाही में कंपनी का मुनाफा 96 प्रतिशत बढ़ा, जबकि डिस्बर्समेंट 7 प्रतिशत, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 12 प्रतिशत और आय 15 प्रतिशत बढ़ी। शाह का कहना है कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में सीईओ के लिए संकट प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और आपूर्ति निर्भरताओं के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार रखना उतना ही जरूरी है जितना विकास रणनीति बनाना।

हमने पहले भारत के असंगठित उद्यम क्षेत्र में अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के सरकारी सर्वेक्षण के आधार पर श्रम ढांचे में बदलाव पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि वेतनभोगी/नियुक्त श्रमिकों की हिस्सेदारी घट रही है और कामकाजी मालिकों की हिस्सेदारी बढ़ रही है, खासकर विनिर्माण और व्यापार में, जो लागत दबाव के बीच मालिक-चालित मॉडल की ओर झुकाव का संकेत देता है। यह पृष्ठभूमि दिखाती है कि लागत नियंत्रण और संसाधनों का अनुशासित उपयोग किस तरह व्यापक कारोबारी रणनीतियों और पुनर्संरचना फैसलों से जुड़ता है।

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