Lenskart वैश्विक विस्तार और उत्पाद रणनीति से भारतीय स्टार्टअप मॉडल को आगे बढ़ाता है

Lenskart वैश्विक विस्तार और उत्पाद रणनीति से भारतीय स्टार्टअप मॉडल को आगे बढ़ाता है
Lenskart की नई उड़ान

फोर्ब्स इंडिया के प्रोफाइल के अनुसार, 2025 के आईपीओ के बाद Lenskart अब 15 देशों में मौजूद है और 19 मार्च तक उसका बाजार पूंजीकरण 88,583 करोड़ रुपये है। लेख में कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी Peyush Bansal की उस रणनीति को रेखांकित किया गया है, जिसमें भारत से उत्पाद-केंद्रित, बहुराष्ट्रीय उपभोक्ता ब्रांड खड़ा करने पर जोर है। यह कहानी ऐसे समय का संदर्भ भी देती है जब भारतीय स्टार्टअप जगत में सेवाधारित मॉडल अधिक आम थे, जबकि Lenskart ने चश्मे के बाजार में आपूर्ति, प्रौद्योगिकी और खुदरा प्रारूप पर एकीकृत दांव लगाया।

हाइलाइट्स

  • Lenskart का 7,278 करोड़ रुपये का IPO नवंबर 2025 में सूचीबद्ध हुआ और उसे 28 गुना से अधिक अभिदान मिला, जिससे कंपनी को संस्थागत अनुशासन और निवेशकों की जवाबदेही मजबूत करने का अवसर मिला।
  • कंपनी ने जून 2022 में करीब 400 मिलियन डॉलर में जापानी ब्रांड Owndays की बहुलांश हिस्सेदारी खरीदी, जिससे Lenskart का वैश्विक विस्तार और ब्रांड निर्माण में गति आई।
  • Lenskart अपनी नई B by Lenskart AI-सक्षम स्मार्ट ग्लासेज तकनीक को सीमित उपभोक्ताओं के लिए टेस्ट कर रहा है, जिसमें Sony, Qualcomm और Google के इंजीनियर शामिल हैं।

उत्पाद, आपूर्ति और ओम्नीचैनल मॉडल की नींव

Bansal ने Microsoft छोड़ने के बाद पहले SearchMyCampus.com शुरू किया, लेकिन बाद में भारत में दृष्टि सुधार की बड़ी अपूर्ण मांग को देखते हुए Lenskart पर ध्यान केंद्रित किया। लेख के मुताबिक, कंपनी ने शुरुआती दौर में यह निष्कर्ष निकाला कि अगर वह चश्मे को सस्ता बना सके, तो वितरण का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है। इसी सोच के तहत उसने केवल ऑनलाइन बिक्री तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आंखों की जांच, घरेलू सेवा और बाद में स्टोर नेटवर्क को एक साथ जोड़ा। कंपनी का कहना है कि वेबसाइट और स्टोर अनुभव को एक समान रखने से विपणन लागत पर भी नियंत्रण रहता है।

लेख में यह भी बताया गया है कि Lenskart ने फ्रेम, लेंस, डिजाइन और उपभोक्ता अनुभव को केवल रिटेल समस्या नहीं माना, बल्कि इंजीनियरिंग और सप्लाई चेन की समस्या के रूप में देखा। इसी कारण कंपनी ने अपने प्रौद्योगिकी ढांचे और आपूर्ति प्रणालियों को बड़े पैमाने पर खुद विकसित किया। उपभोक्ताओं को क्लिनिकल माहौल से दूर रखने के लिए स्टोर डिजाइन, भाषा और सेवा पद्धति में भी बदलाव किए गए। यह दृष्टिकोण Lenskart को केवल विक्रेता नहीं, बल्कि श्रेणी-निर्माता के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।

शुरुआती निवेश दौर में कंपनी ने पूंजी जुटाई, हालांकि Bansal स्वीकार करते हैं कि उस समय टीम को टर्म शीट पर बातचीत का अनुभव नहीं था। बाद में निवेशकों के दबाव के बीच कंपनी ने घड़ियां, ज्वेलरी और बैग जैसे अन्य क्षेत्रों में भी कदम रखा, लेकिन फिर केवल चश्मे पर लौटने का फैसला किया। लेख के अनुसार, यही फोकस कंपनी के लिए निर्णायक मोड़ बनता है। इससे Lenskart को दीर्घकालिक रूप से समस्या-समाधान, उत्पाद नवाचार और ब्रांड निर्माण पर केंद्रित रहने का रास्ता मिलता है।

आईपीओ, अंतरराष्ट्रीय पहुंच और क्षेत्रीय प्रभाव

कंपनी का 7,278 करोड़ रुपये का आईपीओ नवंबर 2025 में सूचीबद्ध हुआ और उसे 28 गुना से अधिक अभिदान मिला। Bansal के अनुसार, सूचीबद्ध होने का उद्देश्य केवल शुरुआती निवेशकों को निकास देना नहीं था, बल्कि संस्थागत अनुशासन और दीर्घकालिक जवाबदेही को मजबूत करना भी था। तिमाही नतीजों की समीक्षा अब कंपनी के लिए पूंजी बाजार के दबाव और दीर्घकालिक रणनीति के बीच संतुलन का नया ढांचा तैयार करती है। इस संदर्भ में Lenskart खुद को एक संस्थापक-चालित कंपनी से संस्थान में बदलने की प्रक्रिया में देखता है।

भारत के बाहर विस्तार के लिए Lenskart ने पारंपरिक निकटवर्ती बाजारों के बजाय सिंगापुर जैसे बाजार को चुना, जहां मायोपिया की समस्या अधिक है। लेख के मुताबिक, बाद में जून 2022 में कंपनी ने जापानी आईवियर ब्रांड Owndays में बहुलांश हिस्सेदारी खरीदी, जिसकी वैल्यू लगभग 400 मिलियन डॉलर बताई गई। यह कदम बोर्ड के भीतर लोकप्रिय नहीं था, लेकिन बाद में इसे सही रणनीतिक निर्णय के रूप में देखा गया। इस विस्तार ने Lenskart को भारतीय कंपनी के रूप में वैश्विक उपभोक्ता ब्रांड बनने की दिशा में आगे बढ़ाया।

क्षेत्रीय स्तर पर इसका महत्व इस बात में है कि भारत से गैर-फिनटेक, उत्पाद-केंद्रित स्टार्टअप का बहु-देशीय विस्तार अब भी अपेक्षाकृत दुर्लभ है। Lenskart का मॉडल संकेत देता है कि भारतीय उपभोक्ता ब्रांड विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और खुदरा को जोड़कर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में जगह बना सकते हैं। इससे घरेलू स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पाद विकास और ब्रांड स्वामित्व पर नया जोर बढ़ सकता है।

एआई चश्मे और अगला विकास चरण

लेख के अनुसार, Lenskart अब B by Lenskart नाम से एआई-सक्षम स्मार्ट ग्लासेज पर काम कर रहा है। कंपनी इस परियोजना पर पिछले दो वर्षों से काम कर रही है और इसका उद्देश्य चश्मे को रोजमर्रा की उपयोगिता, रिकॉर्डिंग, स्वास्थ्य और कंटेंट निर्माण जैसे कार्यों के लिए अधिक सक्षम बनाना है। Bansal का कहना है कि तकनीक इन-हाउस विकसित की गई है और कंपनी के विभिन्न उत्पाद समूह स्मार्ट ग्लासेज, जियो-एनालिटिक्स, कंप्यूटर विजन और एआई आधारित आंख परीक्षण पर काम कर रहे हैं।

कंपनी फिलहाल इस उत्पाद का व्यापक व्यावसायीकरण करने की जल्दी में नहीं है और शुरुआती प्रोटोटाइप कुछ सौ उपयोगकर्ताओं, खासकर कंटेंट क्रिएटर्स, को दिए जा रहे हैं। लेख में कहा गया है कि Sony, Qualcomm और Google के इंजीनियर भी इन चश्मों का परीक्षण कर रहे हैं। यह चरण Lenskart की उस व्यापक रणनीति के अनुरूप है जिसमें वह चश्मे को केवल दृष्टि-सुधार उत्पाद के बजाय प्रौद्योगिकी मंच के रूप में विकसित करना चाहता है।

उद्योग के नजरिये से यह पहल दिखाती है कि कंपनी खुद को केवल आईवियर रिटेलर तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थ-टेक के संगम पर नई मांग तलाश रही है। Bansal के मुताबिक, दुनिया में अब भी 500 मिलियन से अधिक लोग ऐसे हैं जिन्हें चश्मे की जरूरत है लेकिन वे उसे पहन नहीं रहे हैं, जबकि Lenskart अभी लगभग 25 मिलियन लोगों तक पहुंचता है। इससे कंपनी के लिए मौजूदा बाजार में गहराई और नई तकनीकी श्रेणियों में विस्तार, दोनों तरह की वृद्धि की संभावना बनी रहती है।

हमने पहले फरवरी 2026 के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) आंकड़ों पर रिपोर्ट किया था, जिसमें कुल वृद्धि 5.2% रही और इसका मुख्य सहारा विनिर्माण क्षेत्र की 6% बढ़त थी। उस रिपोर्ट में पूंजीगत वस्तुओं और अवसंरचना/निर्माण वस्तुओं में दो अंकों की वृद्धि के साथ मांग की मजबूती पर जोर था, जबकि उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में गिरावट और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण मार्च के लिए इनपुट लागत व उपलब्धता को लेकर सतर्कता भी बताई गई थी।

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