भारत सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच आपूर्ति सुरक्षा उपाय तेज करती है
प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में ऊर्जा, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में आवश्यक आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की और मंत्रालयों को नागरिकों पर पड़ रहे असर को कम करने के लिए समन्वित कदम तेज करने को कहा। बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग मार्गों पर दबाव बना हुआ है, और सरकार सार्वजनिक सूचना प्रणाली को मजबूत रखकर अफवाहों तथा गलत सूचना पर भी अंकुश लगाना चाहती है।
हाइलाइट्स
- भारत सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच LNG और LPG की आपूर्ति के लिए नए स्रोत जोड़े, घरेलू LPG कीमतें स्थिर रखीं।
- Shell ने पेट्रोल के दाम 129 रुपये और डीजल के दाम 133 रुपये किए, जिससे वैश्विक ऊर्जा दबाव का असर खुदरा बाजार तक पहुंचा।
- सरकार ने 7-8 GW गैस पावर प्लांट्स को गैस पूल से छूट, कोयला आपूर्ति बढ़ाने व उर्वरक वितरण पर सख्ती के उपाय अपनाए।
आपूर्ति प्रबंधन और तात्कालिक सरकारी कदम
यह इस मुद्दे पर दूसरी विशेष सीसीएस बैठक है, पहली बैठक 22 मार्च को हुई थी। सरकार के अनुसार, कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन ने पेट्रोलियम उत्पादों, खासकर एलएनजी और एलपीजी, तथा बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। एलपीजी की खरीद के लिए नए देशों से आपूर्ति स्रोत जोड़े जा रहे हैं और एलएनजी भी अलग-अलग देशों से मंगाई जा रही है।
सरकार ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी कीमतें यथावत हैं और जमाखोरी तथा काला बाजारी रोकने के लिए नियमित प्रवर्तन कार्रवाई चल रही है। पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन बढ़ाने की पहल भी की गई है। साथ ही, 7 से 8 गीगावाट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों को गैस पूलिंग व्यवस्था से छूट देने और तापीय बिजलीघरों के लिए अधिक कोयला उपलब्ध कराने जैसे उपायों पर काम हो रहा है, ताकि गर्मियों के चरम महीनों में बिजली उपलब्ध रहे।
उर्वरक आपूर्ति पर भी बैठक में विशेष ध्यान दिया गया। सरकार यूरिया उत्पादन बनाए रखने, डीएपी और एनपीकेएस की विदेशी आपूर्ति के साथ समन्वय करने और राज्यों के साथ मिलकर दैनिक निगरानी, छापों और सख्त कार्रवाई के जरिए जमाखोरी तथा डायवर्जन रोकने पर जोर दे रही है।
ऊर्जा, कृषि और लॉजिस्टिक्स पर बढ़ता दबाव
बैठक में कृषि, नागरिक उड्डयन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के लिए उभरती चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने कहा कि खाद्य वस्तुओं के खुदरा दाम पिछले एक महीने में स्थिर रहे हैं, जबकि कृषि उत्पादों, सब्जियों और फलों की कीमतों की अलग से निगरानी की जा रही है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मूल्य स्थिति तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रवर्तन पर लगातार संपर्क के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
पश्चिम एशिया में संघर्ष 28 फरवरी से जारी है, जब U.S. और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था और उसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा ढुलाई होती है, और इस मार्ग पर रुकावट से भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसी पृष्ठभूमि में भारत ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आपूर्ति शृंखलाओं के स्रोतों को वैश्विक स्तर पर विविध बनाने की कोशिश कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, नीदरलैंड, मलेशिया, इजराइल, ईरान और U.S. के नेताओं से बातचीत की है। सरकार सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने और आपूर्ति व्यवधान कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी आगे बढ़ा रही है।
बाजार संकेत और नीतिगत महत्व
समाचार सारांश में शेल द्वारा पेट्रोल के दाम 129 रुपये और डीजल के दाम 133 रुपये किए जाने का जिक्र है, जो बताता है कि युद्धजनित ऊर्जा दबाव का असर खुदरा ईंधन बाजार तक पहुंच रहा है। हालांकि सरकारी समीक्षा का केंद्र बिंदु घरेलू एलपीजी, बिजली, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति को स्थिर रखना है, लेकिन वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से आयात लागत और वितरण तंत्र पर जोखिम बना रहता है। इससे ऊर्जा, परिवहन और कृषि से जुड़े क्षेत्रों के लिए लागत प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।
सरकार की मौजूदा रणनीति दो मोर्चों पर केंद्रित दिखती है, पहला, आवश्यक वस्तुओं और ऊर्जा की भौतिक उपलब्धता बनाए रखना, और दूसरा, बाजार में घबराहट तथा गलत सूचना को सीमित करना। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा लंबी चलती है, तो आयात निर्भर क्षेत्रों पर दबाव और बढ़ सकता है, इसलिए वैकल्पिक स्रोतों और प्रशासनिक निगरानी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
हमने पहले पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति तंत्र पर संभावित असर की सरकारी समीक्षा पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में खाद्य, ऊर्जा, ईंधन, उर्वरक और बिजली जैसे क्षेत्रों में अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक जोखिमों के आकलन के साथ-साथ आपूर्ति निरंतरता बनाए रखने के लिए मंत्रालयों के समन्वित कदम और शमन रणनीतियों पर फोकस था।
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