आरबीआई ने रेपो दर यथावत रखी, महंगाई नरम पड़ने के बीच सतर्क रुख कायम
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 8 अप्रैल को रेपो दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखा, जबकि लेख के अनुसार केंद्रीय बैंक नरम पड़ती महंगाई, स्थिर वृद्धि संकेतकों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच धैर्यपूर्ण रुख अपना रहा है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब उपभोक्ता मूल्य वृद्धि में हाल के महीनों में कमी दिख रही है, लेकिन खाद्य कीमतों की अस्थिरता, उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की ब्याज दर दिशा और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिम अभी भी नीति निर्धारण को प्रभावित कर रहे हैं।
हाइलाइट्स
- आरबीआई ने रेपो दर यथावत रखी और एफवाई27 के लिए कोर महंगाई अनुमान 4.4 प्रतिशत पर पहली बार औपचारिक रूप से जारी किया।
- आरबीआई ने एफवाई27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, तेल कीमतों में नरमी ने महंगाई दृष्टिकोण में अस्थायी राहत दी।
- विश्लेषकों के अनुसार दरों में ढील की संभावना फिलहाल कम है, जबकि तरलता, पूंजी प्रवाह और मुद्रा उतार-चढ़ाव उभरते बाजारों के लिए जोखिम बने रहेंगे।
एफवाई27 अनुमान और नीतिगत संकेत
आरबीआई की छह सदस्यीय समिति ने कई नीतिगत चक्रों से जारी यथास्थिति को आगे बढ़ाते हुए नीति दर में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत रुख भी बरकरार रखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह कीमतों के मोर्चे पर जल्दबाजी में ढील देने के पक्ष में नहीं है। लेख के अनुसार आरबीआई ने पहली बार एफवाई27 के लिए कोर महंगाई का औपचारिक अनुमान 4.4 प्रतिशत दिया है, जिससे बाजार को अंतर्निहित मूल्य दबावों पर उसकी सोच का स्पष्ट संकेत मिला है।वृद्धि, तेल कीमतें और बाजारों पर असर
भारत की आर्थिक गतिविधि मजबूत सरकारी पूंजीगत व्यय, शहरी खपत और ग्रामीण मांग में क्रमिक सुधार से सहारा पा रही है। इसी पृष्ठभूमि में आरबीआई ने एफवाई27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5 से 7 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान जताया है, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत की तेज वृद्धि क्षमता पर भरोसा दर्शाता है। पश्चिम एशिया में 14 दिन के युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल कीमतों में नरमी आई है, और तेल आयातक भारत के लिए इससे इनपुट लागत तथा महंगाई दृष्टिकोण पर कुछ राहत मिल सकती है।विश्लेषकों की राय और आगे का जोखिम परिदृश्य
क्रिसिल की दीप्ति देशपांडे के अनुसार पश्चिम एशिया संघर्ष के असर को लेकर अभी ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, इसलिए पर्याप्त नीतिगत बफर बनाए रखना जरूरी है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की माधवी अरोड़ा का कहना है कि पारंपरिक दर वृद्धि के लिए दहलीज अभी ऊंची है, और इसके लिए लगातार आपूर्ति झटका तथा कोर महंगाई में व्यापक दबाव चाहिए। केयरएज रेटिंग्स की रजनी सिन्हा के अनुसार यदि भविष्य में दरों में ढील आती भी है, तो आरबीआई वृद्धि चिंताओं के बावजूद जल्दीबाजी नहीं करेगा; वहीं तरलता प्रबंधन, पूंजी प्रवाह और मुद्रा उतार-चढ़ाव उभरते बाजारों के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।हमने पहले पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिम के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल में तेज उछाल की स्थिति पर रिपोर्ट की थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि ब्रेंट क्रूड 110–111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने के बावजूद भारत में सामान्य पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम तत्काल नहीं बढ़े, लेकिन तेल विपणन कंपनियों पर लागत दबाव और उपभोक्ता महंगाई के लिए जोखिम बना रहा।
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