प्रोजेक्ट्स टुडे के आंकड़ों के अनुसार, जिन्हें फोर्ब्स इंडिया ने संकलित किया है, Q4FY26 में कुल पूंजीगत व्यय घोषणाएं साल-दर-साल 54.9 प्रतिशत घटकर 9.1 लाख करोड़ रुपये रह गई हैं। रिपोर्ट बताती है कि सरकार और निजी क्षेत्र दोनों का जोर नए प्रोजेक्ट घोषित करने के बजाय पहले से घोषित परियोजनाओं के क्रियान्वयन और पूर्णता पर शिफ्ट हो रहा है। यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज हो रही है जब Q1FY26 और Q2FY26 में तेज उछाल के बाद निवेश गति लगातार दूसरे तिमाही चरण में कमजोर पड़ती दिख रही है।
हाइलाइट्स
- Q4FY26 में नई परियोजना घोषणाएं घटकर 3,570 रह गईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5,527 थी, जो पांच साल का निचला स्तर है।
- निजी कैपेक्स Q4FY26 में 47.5 प्रतिशत गिरकर 6.6 लाख करोड़ रुपये हुआ, जबकि सरकारी कैपेक्स 67 प्रतिशत घटकर 2.5 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
- FY27 के लिए कंपनियों द्वारा नियोजित पूंजीगत निवेश 9.55 लाख करोड़ रुपये है, जो FY26 के 11.43 लाख करोड़ रुपये से 16 प्रतिशत कम है।
Q4FY26 में निवेश गिरावट और परियोजना रफ्तार
डेटा 50,000 परियोजनाओं को कवर करता है, जिनमें शुरुआती, योजना और क्रियान्वयन चरण की परियोजनाएं शामिल हैं। Q4FY26 में ताजा निवेश परियोजनाओं की संख्या घटकर 3,570 रह गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 5,527 थी। इससे संकेत मिलता है कि नई घोषणाओं की पाइपलाइन कमजोर हुई है, भले ही पहले से स्वीकृत परियोजनाओं पर काम जारी है।
प्रोजेक्ट्स टुडे के विश्लेषकों का कहना है कि केंद्र सरकार फिलहाल नई निवेश योजनाओं की घोषणा से अधिक मौजूदा परियोजनाओं के निष्पादन पर ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, मौजूदा आंकड़े किसी संरचनात्मक कमजोरी की बजाय अस्थायी ठहराव का संकेत देते हैं। फर्म को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में नई परियोजना घोषणाओं में फिर तेजी आ सकती है।
निजी और सरकारी कैपेक्स में तेज सुधार
निजी कैपेक्स, जिसमें भारतीय और विदेशी निजी कंपनियां शामिल हैं, Q4FY26 में 47.5 प्रतिशत घटकर 6.6 लाख करोड़ रुपये रह गया है। भारतीय निजी क्षेत्र का निवेश 52 प्रतिशत गिरा है, जबकि विदेशी निवेश 22 प्रतिशत बढ़कर 90,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह बताता है कि घरेलू निजी निवेश में दबाव ज्यादा है, लेकिन विदेशी पूंजी कुछ हद तक सहारा दे रही है।
सार्वजनिक क्षेत्र में गिरावट और गहरी है। सरकारी कैपेक्स घोषणाएं 67 प्रतिशत घटकर 2.5 लाख करोड़ रुपये रह गई हैं, जिसमें राज्य सरकारों की घोषणाएं 57 प्रतिशत और केंद्र की घोषणाएं 76 प्रतिशत घटी हैं। इसके परिणामस्वरूप कुल कैपेक्स में सरकार की हिस्सेदारी Q3FY26 के 34.3 प्रतिशत से घटकर Q4FY26 में 27 प्रतिशत रह गई है, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
FY27 के लिए क्षेत्रीय रुझान और उद्योग संकेत
क्षेत्रवार आवंटन में बेसिक मेटल्स 22.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आगे हैं, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा 12.6 प्रतिशत और सड़क अवसंरचना 11.4 प्रतिशत पर है। डेटा सेंटर 8.3 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तेजी से उभरती श्रेणी बन रहे हैं, जो आवासीय भवनों के 10.7 प्रतिशत के करीब पहुंच रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि डिजिटल अवसंरचना अब मुख्यधारा के पूंजीगत निवेश का हिस्सा बन रही है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के पहले के सर्वे के अनुसार, कंपनियां FY27 में 9.55 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स करने की योजना बना रही हैं, जो FY26 के 11.43 लाख करोड़ रुपये से 16 प्रतिशत कम है। वहीं 3,800 से अधिक कंपनियों के एक छोटे समूह के अनुमान FY25 और FY26 के मुकाबले लगभग स्थिर खर्च दिखाते हैं। विनिर्माण की हिस्सेदारी FY26 के 50.2 प्रतिशत से घटकर FY27 में 44.4 प्रतिशत होने की संभावना है, जबकि बिजली और ऊर्जा आपूर्ति की हिस्सेदारी बढ़कर 14.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
हमने पहले भारत में डेटा सेंटर और एआई अवसंरचना के तेज विस्तार तथा उससे पैदा हो रही बिजली/ग्रिड योजना की चुनौतियों पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में डेटा सेंटर क्षमता के 1.2 गीगावाट से बढ़कर दशक के अंत तक करीब 10 गीगावाट तक जाने की उम्मीद, संभावित अतिरिक्त बेस-लोड और राज्यों व वितरण कंपनियों के लिए मांग को संसाधन-पर्याप्तता योजनाओं में शामिल करने की जरूरत पर चर्चा की गई थी।
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