कांग्रेस ने महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए

कांग्रेस ने महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए
महिला आरक्षण पर विवाद

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 11 अप्रैल की अपनी चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष संसद सत्र के निमंत्रण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि महिलाओं के आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया चुनावों के बीच राजनीतिक लाभ के लिए तेज की जा रही है। पत्र के अनुसार, उन्होंने परिसीमन के ब्योरे पर पारदर्शिता और 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की है, ताकि कानून से जुड़ी संवैधानिक और संघीय चिंताओं पर सार्थक चर्चा हो सके। यह विवाद ऐसे समय उभर रहा है जब कई राज्यों में चुनाव जारी हैं और विपक्ष कानून के समय निर्धारण को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहा है।

हाइलाइट्स

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, लेकिन क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन पर निर्भर है।
  • विशेष सत्र में लोकसभा की सीटें 816 करने और इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले विधेयकों पर चर्चा संभव है।
  • कांग्रेस ने परिसीमन प्रक्रिया पर जल्दबाजी और सर्वदलीय परामर्श के अभाव से संभावित संवैधानिक एवं संघीय परिणामों को लेकर विपक्षी रणनीति तेज की।

विशेष सत्र और विपक्ष की आपत्तियां

खड़गे का कहना है कि सरकार व्यापक सहमति और दलों से संवाद का दावा कर रही है, लेकिन विपक्ष लंबे समय से चुनाव समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग करता रहा है। उनके मुताबिक, परिसीमन के ठोस विवरण साझा किए बिना विशेष सत्र बुलाने से उपयोगी चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों दोनों को प्रभावित करने वाले ऐसे संशोधनों पर छोटे दलों और छोटे राज्यों की राय भी शामिल होनी चाहिए।

पत्र में खड़गे ने सरकार के पिछले निर्णयों, जैसे नोटबंदी, जीएसटी क्रियान्वयन, लंबित जनगणना, वित्त आयोग की सलाह और कर बंटवारे के मुद्दों का हवाला देते हुए भरोसे की कमी जताई है। उनका तर्क है कि यदि सरकार का उद्देश्य वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करना है, तो उसे चुनाव के बाद सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का ढांचा

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था। यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करता है, लेकिन इसका क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पर निर्भर है। खड़गे ने कहा है कि उन्होंने उस समय तत्काल लागू करने की मांग की थी, जबकि अब सरकार 30 महीने बाद इसे आगे बढ़ा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, विशेष सत्र में ऐसे विधेयकों पर चर्चा हो सकती है जिनसे लोकसभा की सीटें बढ़कर 816 हो जाएं और इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों। इसी प्रस्तावित ढांचे और उसके समय ने चुनावी राज्यों, जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी, के संदर्भ में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

राजनीतिक असर और आगे की रणनीति

यह पत्राचार 16 से 18 अप्रैल तक प्रस्तावित संसद बैठक से पहले हो रहा है और कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी पर महिला आरक्षण को राजनीतिक मुद्दे में बदलने का आरोप लगा रही है। विपक्ष का कहना है कि परिसीमन से जुड़ी प्रक्रिया पर जल्दबाजी के गंभीर संवैधानिक और संघीय परिणाम हो सकते हैं। इसी वजह से कांग्रेस नेतृत्व शीर्ष विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाकर साझा रुख तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।

खड़गे इस मुद्दे को संघवाद की कसौटी के रूप में पेश कर रहे हैं और कह रहे हैं कि विधायिकाओं के ढांचे को बदलने वाले फैसलों में सभी पक्षों की भागीदारी जरूरी है। समर्थक इसे लंबे समय से लंबित कदम मानते हैं, जबकि आलोचक इसे चुनावी समय के कारण राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रहे हैं।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के घोषणापत्र और उसके प्रमुख वादों पर चर्चा की गई थी। इसमें महिलाओं के लिए मासिक नकद सहायता, सरकारी कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग के त्वरित क्रियान्वयन, और राज्य में नीतिगत बदलावों के जरिए चुनावी समर्थन जुटाने की रणनीति को रेखांकित किया गया था।

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