भाजपा तमिलनाडु में महिला सहायता, मुफ्त एलपीजी और रेल परियोजनाएं देने का वादा करती है
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए जारी अपने घोषणापत्र में भाजपा ने कहा है कि अगर एनडीए सत्ता में आता है तो महिला मुखियाओं को हर महीने 2,000 रुपये, हर परिवार को एकमुश्त 10,000 रुपये और साल में तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर दिए जाएंगे। पार्टी ने यह भी कहा कि वह राज्य के रेल नेटवर्क के विस्तार, महिलाओं की सुरक्षा के लिए तेज न्यायिक तंत्र और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को रियायती वित्तीय सहायता जैसी योजनाएं लागू करेगी। यह घोषणा पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह एआईएडीएमके के साथ गठबंधन में 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
हाइलाइट्स
- भाजपा ने तमिलनाडु में हर परिवार को साल में तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और महिलाओं के लिए नकद सहायता देने का वादा किया।
- घोषणापत्र में चेन्नई-बेंगलुरु, चेन्नई-हैदराबाद हाई-स्पीड रेल सहित कई अधोसंरचना परियोजनाओं और महिला एमएसएमई को 50 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण का प्रस्ताव है।
- एआईएडीएमके जैसे सहयोगियों के समान वादों के जरिये भाजपा ने महिला वोटर्स को साधने और डीएमके के शासन रिकॉर्ड पर आक्रमण तेज किया।
घोषणापत्र में नकद सहायता और परिवहन विस्तार
भाजपा ने अपने चुनावी दस्तावेज में महिला कल्याण को प्रमुख स्थान दिया है और परिवारों के लिए प्रत्यक्ष नकद सहायता का वादा रखा है। पार्टी के अनुसार, साल में तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर पोंगल, तमिल पुथंडु और दीपावली के अवसर पर दिए जाएंगे। घोषणापत्र में यह भी कहा गया है कि उचित मुआवजे पर भूमि अधिग्रहण कर चेन्नई-बेंगलुरु, चेन्नई-हैदराबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, कोयंबटूर-तिरुप्पुर-सलेम आरआरटीएस, विल्लुपुरम-चेन्नई सेमी-अर्बन रेल और अन्य परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
पार्टी ने चेन्नई को दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से जोड़ने वाली नई स्लीपर वंदे भारत सेवाओं तथा एक हाइड्रो पावर ट्रेन परियोजना का भी वादा किया है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य राज्य में लंबी दूरी और शहरी-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। घोषणापत्र का फोकस बुनियादी ढांचे को चुनावी कल्याण योजनाओं के साथ जोड़ने पर दिखता है।
महिला सुरक्षा, धार्मिक मुद्दे और उद्योग समर्थन
भाजपा ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए जीरो-एफआईआर रिपोर्टिंग को सुव्यवस्थित करने, पीड़ित और गवाह सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और गंभीर मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने का वादा किया है। पार्टी ने बसों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में 100 प्रतिशत ब्लाइंड-स्पॉट-फ्री सीसीटीवी कवरेज तथा निर्भया फंड के बेहतर उपयोग की भी बात कही है। इसके साथ ही महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और एमएसएमई को विनिर्माण इकाइयों के लिए 50 लाख रुपये तक ब्याज-मुक्त ऋण और 20 प्रतिशत सरकारी खरीद कोटा देने का प्रस्ताव रखा गया है।
घोषणापत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को भी शामिल किया गया है, जो पार्टी की व्यापक राजनीतिक रेखा के अनुरूप हैं। भाजपा ने थाइपूसम को राज्य उत्सव घोषित करने और तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने की परंपरा को फिर से शुरू कर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा किया है। यह मामला पहले मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश, राज्य सरकार और भाजपा के बीच टकराव, तथा पिछले वर्ष संसद तक पहुंची बहस के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन चुका है।
गठबंधन प्रतिस्पर्धा और चुनावी असर
भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने सत्तारूढ़ डीएमके पर कानून-व्यवस्था और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर हमला बोला है और कहा है कि एनडीए सरकार बनाएगा। उनकी टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि घोषणापत्र केवल वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि डीएमके के शासन रिकॉर्ड पर सीधा राजनीतिक आक्रमण भी है। भाजपा ने अपने सहयोगी एआईएडीएमके के समान महिला सहायता और मुफ्त गैस सिलेंडर जैसे वादों के जरिए मतदाताओं के एक साझा आधार को साधने की कोशिश की है।
एआईएडीएमके पहले ही महिला मुखियाओं के लिए 2,000 रुपये मासिक सहायता, राशन कार्डधारकों को दाल और रेफ्रिजरेटर, पुरुषों तक मुफ्त बस यात्रा का विस्तार और मुफ्त गैस सिलेंडर का वादा कर चुकी है। इससे गठबंधन के भीतर कल्याणकारी एजेंडा काफी हद तक समन्वित दिखता है, जबकि प्रतिस्पर्धा डीएमके के खिलाफ शासन, पहचान और वितरण-आधारित राजनीति पर केंद्रित है। तमिलनाडु में यह मुकाबला अब बुनियादी ढांचे, कल्याण योजनाओं और सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों के मिश्रण पर आकार ले रहा है।
हमने पहले तमिलगा वेट्ट्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख विजय द्वारा तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान कई रैलियां और रोडशो रद्द किए जाने पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में सुरक्षा व लॉजिस्टिक दिक्कतों, 2025 के करूर भगदड़ हादसे के बाद बढ़ी भीड़-प्रबंधन सतर्कता और चेन्नई में कथित पुलिस प्रतिबंधों के चलते शहरी पहुंच पर पड़ने वाले संभावित असर का जिक्र था।
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