लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयकों पर विपक्ष का विरोध तेज

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयकों पर विपक्ष का विरोध तेज
महिला आरक्षण पर विवाद

पीटीआई के अनुसार, लोकसभा में पेश तीन विधेयकों को लेकर कांग्रेस उपनेता गौरव गोगोई सरकार पर महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हैं। यह विवाद ऐसे समय उभरता है जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को विभाजन मत के बाद पेश किया जाता है और विपक्ष इसे संघीय ढांचे तथा जनगणना प्रक्रिया से जोड़कर चुनौती देता है।

हाइलाइट्स

  • सरकार ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन), केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किए, जिनका उद्देश्य महिला आरक्षण लागू करना है।
  • विपक्ष ने विधेयकों पर यह कहते हुए तीखा विरोध किया कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ना संविधान, संघीय ढांचे और सामाजिक संतुलन के विपरीत है।
  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 251 समर्थन और 185 विरोध के साथ पेश हुआ, जिससे संसद में महिला आरक्षण एवं परिसीमन मुद्दों पर बड़े पैमाने पर राजनीतिक ध्रुवीकरण स्पष्ट हुआ।

विधेयकों की मंशा पर टकराव

सरकार लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करती है। इनका घोषित उद्देश्य दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित संशोधित महिला आरक्षण कानून को लागू करना है।बहस के दौरान गौरव गोगोई कहते हैं कि महिला आरक्षण को लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के आधार पर लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के बजाय परिसीमन को पीछे के रास्ते से लागू करना चाहती है, और यही वजह है कि वह इन विधेयकों को महिला विरोधी, जाति जनगणना विरोधी, संविधान विरोधी और संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हैं।

गोगोई यह भी कहते हैं कि संविधान के अनुसार परिसीमन नवीनतम जनगणना के आधार पर होना चाहिए। 815 लोकसभा सीटों के प्रस्तावित आंकड़े पर सवाल उठाते हुए वह पूछते हैं कि यह संख्या कैसे तय हुई और सरकार किस संवैधानिक आधार पर इसे आगे बढ़ा रही है।

मतविभाजन और व्यापक राजनीतिक असर

विपक्ष और सरकार के बीच यह टकराव सिर्फ महिला आरक्षण की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रतिनिधित्व, निर्वाचन सीमांकन और राज्यों के संतुलन जैसे बड़े राजनीतिक प्रश्नों तक फैलता है। गोगोई का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर निर्वाचन मानचित्र को फिर से गढ़ने की कोशिश भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकती है।उन्होंने जम्मू-कश्मीर और असम के परिसीमन का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार वही मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर दोहराना चाहती है। उनके अनुसार, यदि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन के साथ बांधा जाता है, तो इसका वास्तविक क्रियान्वयन टल सकता है और इससे नीति का राजनीतिक उपयोग बढ़ेगा।

करीब 40 मिनट की तीखी बहस के बाद विपक्ष संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पेश करने पर मतविभाजन की मांग करता है। इसके बाद विधेयक 251 सदस्यों के समर्थन और 185 सदस्यों के विरोध के साथ पेश किया जाता है, जिससे यह साफ होता है कि संसद में इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण गहरा बना हुआ है।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 को लेकर संसद में बढ़ते राजनीतिक टकराव पर हम पहले भी लिख चुके हैं। उस लेख में सरकार के महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लक्ष्य के साथ परिसीमन को जोड़ने पर विपक्ष की आपत्तियों, और राज्य प्रतिनिधित्व व संघीय संतुलन पर पड़ सकने वाले असर को रेखांकित किया गया था।

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