संसद में महिला आरक्षण, परिसीमन विधेयकों पर राजनीतिक टकराव बढ़ा

संसद में महिला आरक्षण, परिसीमन विधेयकों पर राजनीतिक टकराव बढ़ा
महिला आरक्षण पर बढ़ा टकराव

लोकसभा के विशेष बैठक दिवस में सरकार आज महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने वाले संवैधानिक संशोधन और परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ा रही है, जबकि मूल खबर संसदीय कार्यसूची और नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। प्रस्तावित कदम 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करने और सीटों के पुनर्निर्धारण की रूपरेखा से जुड़ा है, जिस पर विपक्ष समर्थन और विरोध, दोनों को अलग-अलग रेखाओं में रख रहा है।

हाइलाइट्स

  • संविधान संशोधन विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 संसद में पेश, सरकार महिला आरक्षण 2029 के आम चुनाव से लागू करना चाहती है।
  • विपक्ष महिला आरक्षण लागू करने के पक्ष में, लेकिन परिसीमन विधेयक में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहा है।
  • परिसीमन विधेयक से राज्य प्रतिनिधित्व, संघीय ढांचे और 2029 चुनावी संतुलन पर बहस, भाजपा ने राज्यों की सीटें घटने से किया इनकार।

विधायी एजेंडा और प्रक्रिया

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करने वाले हैं, जबकि गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने वाले हैं। सरकार लोकसभा में नियम 66 के प्रावधानों को निलंबित करने का प्रस्ताव भी ला रही है, ताकि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक को साथ लेकर पारित किया जा सके। सरकार विपक्ष से समर्थन मांग रही है, ताकि महिला आरक्षण 2029 के आम चुनाव से लागू हो सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी दलों से इस संशोधन का समर्थन करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि यह देश की महिलाओं की लंबे समय से चली आ रही अपेक्षा है और इसे सर्वसम्मति से पूरा किया जाना चाहिए। सरकार की दलील है कि यह कदम महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने और चुनावी ढांचे को अद्यतन करने के लिए आवश्यक है।

विपक्ष का समर्थन, लेकिन परिसीमन पर आपत्ति

विपक्षी दल महिला आरक्षण के शीघ्र क्रियान्वयन के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई बैठक में विपक्षी दलों ने कहा कि वे महिला आरक्षण का समर्थन जारी रखेंगे, पर मौजूदा स्वरूप में परिसीमन स्वीकार नहीं करेंगे। विपक्ष की मांग है कि आरक्षण 2029 के चुनाव से मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर लागू किया जाए।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को खतरनाक बताया और कहा कि इसे महिला आरक्षण से जोड़ना उचित नहीं है। विपक्ष का तर्क है कि प्रस्तावित व्यवस्था से दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी भारत के कई राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दल यह भी कह रहे हैं कि परिसीमन के लिए व्यापक परामर्श और सहमति आधारित पारदर्शी नीति ढांचा होना चाहिए।

प्रतिनिधित्व, संघवाद और चुनावी असर

परिसीमन विधेयक लोकसभा और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में सीटों के पुनर्समायोजन का प्रावधान करता है। इसी बिंदु पर राजनीतिक विवाद सबसे अधिक केंद्रित है, क्योंकि विपक्ष इसे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिए जोखिम के रूप में पेश कर रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया पर अत्यधिक नियंत्रण चाहती है और इससे 2029 के चुनावी संतुलन पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर विधेयकों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी को न्याय मिलेगा। बहस अब केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संसद में प्रतिनिधित्व, राज्यों के बीच शक्ति संतुलन और आने वाले आम चुनावों की राजनीतिक संरचना तक फैल चुकी है।

हमने पहले संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और इससे जुड़े परिसीमन/सीट पुनर्संरचना प्रस्ताव पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में सरकार के 2029 से महिला आरक्षण लागू करने के लक्ष्य के साथ लोकसभा सीटों में संभावित वृद्धि और जनसंख्या-आधारित पुनर्सीमांकन से दक्षिणी व कुछ छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व तथा संघीय संतुलन पर पड़ने वाले असर को रेखांकित किया गया था।

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