दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति अवमानना मामले में AAP नेताओं से जवाब मांगा
दिल्ली आबकारी नीति विवाद से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही के बीच दिल्ली हाई कोर्ट AAP के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना मामले में जवाब तलब करता है। यह मामला कथित सोशल मीडिया पोस्टों से जुड़ा है, जिन्हें अदालत न्यायपालिका में सार्वजनिक भरोसा कमजोर करने वाली मुहिम के रूप में देखती है।
हाइलाइट्स
- दिल्ली हाई कोर्ट ने Arvind Kejriwal, Manish Sisodia समेत सात AAP नेताओं को अवमानना मामले में 19 मई को नोटिस जारी किया और चार हफ्ते में जवाब मांगा।
- जस्टिस Swarana Kanta Sharma ने आदेश में AAP नेताओं पर न्यायपालिका को निशाना बनाने और न्याय संस्थानों में जनता का भरोसा कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास बताया।
- CBI द्वारा 23 आरोपियों को मिली राहत और ED की प्रतिकूल टिप्पणियों की चुनौती से जुड़े आबकारी नीति मामले की सुनवाई के दौरान अवमानना का अगला चरण 4 अगस्त निर्धारित है।
अदालती नोटिस और आरोपों का दायरा
Financial Express के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार, 19 मई को AAP के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और पांच अन्य नेताओं को स्वत: संज्ञान आपराधिक अवमानना मामले में नोटिस जारी किया। जस्टिस Navin Chawla और जस्टिस Ravinder Dudeja की खंडपीठ आरोपित नेताओं को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देती है.
यह कार्यवाही पिछले सप्ताह जस्टिस Swarana Kanta Sharma के 14 मई के 68 पन्नों के आदेश के बाद शुरू होती है। नोटिस पाने वालों में पूर्व AAP विधायक Durgesh Pathak और Vinay Mishra, राज्यसभा सांसद Sanjay Singh, दिल्ली AAP प्रमुख Saurabh Bharadwaj और पार्टी के सोशल मीडिया संचालन से कथित रूप से जुड़े Devesh Vishwakarma भी शामिल हैं.
खंडपीठ अदालत की रजिस्ट्री को कथित अवमानना से जुड़े सभी सोशल मीडिया पोस्ट, इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशन और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश देती है। मामले में अदालत एक amicus curiae नियुक्त कर सकती है, जो सुनवाई में न्यायालय की सहायता करेगा।
सोशल मीडिया विवाद और आबकारी नीति मामले पर असर
विवाद उन सोशल मीडिया पोस्टों से जुड़ता है, जो कथित रूप से जस्टिस Swarana Kanta Sharma को निशाना बनाते हैं, जब उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले में CBI और प्रवर्तन निदेशालय की याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार किया। बाद में जस्टिस शर्मा ने CBI और ED से जुड़े मामले अपनी अदालत से स्थानांतरित किए, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को उनके अलग होने की मांग के जवाब के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.अपने आदेश में जस्टिस शर्मा AAP नेताओं पर न्यायपालिका और व्यक्तिगत रूप से उनके खिलाफ "सुनियोजित बदनामी अभियान" चलाने का आरोप लगाती हैं। अदालत की टिप्पणी है कि कथित ऑनलाइन मुहिम का उद्देश्य न्यायिक संस्थानों में जनता का भरोसा कमजोर करना था, और इसे "मनोवैज्ञानिक दबाव" के रूप में वर्णित किया गया है.
यह अवमानना मामला अब समाप्त हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ी लंबित कार्यवाहियों से जुड़ा है। CBI इस वर्ष की शुरुआत में 23 आरोपियों को राहत देने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देती है, जबकि ED एजेंसी के खिलाफ की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग करती है, और दोनों मामले अभी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित हैं.
अप्रैल में Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और Durgesh Pathak ने जस्टिस शर्मा की अदालत में कानूनी प्रतिनिधित्व लेने से इनकार किया था, जब उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई थी। नेताओं ने न्यायाधीश की कथित संबद्धताओं और संभावित हितों के टकराव को लेकर आपत्ति उठाई थी। हाई कोर्ट इस अवमानना मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को करता है।
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