आंध्र प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर YSRCP ने CAG आंकड़ों के आधार पर सवाल उठाए

आंध्र प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर YSRCP ने CAG आंकड़ों के आधार पर सवाल उठाए
YSRCP ने उठाए सवाल

आंध्र प्रदेश में सरकार की तेज आर्थिक वृद्धि की दावेदारी अब राज्य के कर संग्रह और कर्ज प्रबंधन के आंकड़ों पर केंद्रित राजनीतिक बहस में बदल रही है। YSRCP प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने FY26 के अनंतिम वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राजस्व दबाव सरकार के 10.75% GSDP वृद्धि दावे से मेल नहीं खाता।

हाइलाइट्स

  • CAG के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में आंध्र प्रदेश के कर राजस्व में 3.22% गिरावट आई जबकि सरकार ने 10.75% GSDP वृद्धि का अनुमान रखा था।
  • 2023-24 में कर राजस्व 85,922 करोड़ रुपये रहा, जबकि FY26 के लिए मामूली 8% वार्षिक वृद्धि के बाद भी अनंतिम संग्रह केवल 86,553 करोड़ रुपये तक पहुंचा।
  • मई 2025 में आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा 9,000 करोड़ रुपये के NCD को गैर-कर राजस्व दिखाए जाने पर विपक्ष ने संवैधानिक मानकों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

FY26 के आंकड़ों पर विपक्ष का हमला

जैसा कि FinancialExpress.com ने बताया, जगन मोहन रेड्डी ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, CAG, के अनंतिम खातों का हवाला देते हुए कहा कि 2025-26 में आंध्र प्रदेश के कर राजस्व में 3.22% की गिरावट आई, जबकि सरकार ने 10.75% GSDP वृद्धि का अनुमान रखा है। उनका कहना है कि यदि अर्थव्यवस्था वास्तव में तेजी से बढ़ रही होती, तो उपभोग, निवेश और कर संग्रह में अधिक मजबूती दिखती।

जगन मोहन रेड्डी ने X पर कहा कि पिछले दो वर्षों में नीति गतिरोध, भ्रष्टाचार और कर्ज जुटाने के असंवैधानिक व अस्वस्थ तरीकों के संकेत दिखते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि संशोधित अनुमानों में कर राजस्व वृद्धि 9.60% मानी गई थी, लेकिन वास्तविक संग्रह में गिरावट सरकार की वृद्धि कथा के विपरीत संकेत देती है।

उन्होंने 2023-24 के आंकड़ों से तुलना करते हुए कहा कि उस वर्ष राज्य का कर राजस्व 85,922 करोड़ रुपये था। उनके अनुसार, यदि इसके बाद भी केवल 8% वार्षिक वृद्धि मान ली जाए, तो FY26 तक संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर होना चाहिए था, जबकि अनंतिम आंकड़े 86,553 करोड़ रुपये दिखाते हैं.

कर्ज, गैर-कर राजस्व और राजनीतिक असर

जगन मोहन रेड्डी ने मई 2025 में आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर, NCD, के जरिए जुटाए गए 9,000 करोड़ रुपये का मुद्दा भी फिर उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस धन का उपयोग परिसंपत्ति निर्माण के बजाय राजस्व व्यय में हुआ और यह राशि 2025-26 के खातों में गैर-कर राजस्व के रूप में दिखाई गई।

उनका कहना है कि इस उधारी ढांचे ने निजी NCD धारकों को राज्य की समेकित निधि तक पहुंच दी, जो संवैधानिक मानकों के खिलाफ है। TDP की ओर से इन टिप्पणियों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह विवाद जून में TDP-नेतृत्व वाली सरकार के दो वर्ष पूरे होने से पहले राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।

राज्य सरकार लगातार कहती है कि बुनियादी ढांचा खर्च और औद्योगिक गतिविधि के सहारे आंध्र प्रदेश तेज वृद्धि के रास्ते पर है। इसके विपरीत, विपक्ष अब यही दिखाने की कोशिश कर रहा है कि कर राजस्व, गैर-कर आय और कर्ज के स्वरूप जैसे वित्तीय संकेतक राज्य की अर्थव्यवस्था पर अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

Tata Motors के FY26 समेकित नतीजों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि UK लक्जरी ब्रांड JLR की कमजोरी के चलते कंपनी का समेकित राजस्व और EBITDA मार्जिन दबाव में रहा, जबकि भारत का घरेलू यात्री वाहन कारोबार बिक्री और राजस्व के मोर्चे पर मजबूत बना रहा। लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि एकमुश्त लाभ के कारण शुद्ध लाभ में तेज उछाल दिखा, लेकिन परिचालन स्तर पर शुल्क, चीन की मांग और साइबर घटना जैसे कारकों का असर बना रहा।

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