तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा मतदान शुरू, 386 सीटों पर राजनीतिक मुकाबला तेज
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू हो रहा है, जहां कुल 386 सीटों पर मुकाबला राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक दिशा तय करता है। दोनों राज्यों में 12 करोड़ से अधिक मतदाता हिस्सा ले रहे हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होनी है और इसके नतीजे इस वर्ष आगे होने वाले चुनावों के लिए शुरुआती राजनीतिक संकेत दे सकते हैं।
हाइलाइट्स
- पश्चिम बंगाल में 152 निर्वाचन क्षेत्रों और तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर विधानसभा मतदान शुरू, दोनों राज्यों में प्रमुख राजनीतिक टकराव तेज।
- पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर, नंदीग्राम में बहुकोणीय मुकाबला; तमिलनाडु में 4,023 उम्मीदवार, 5.73 करोड़ मतदाता और त्रिकोणीय प्रतिस्पर्धा।
- तमिलनाडु में 1.40 लाख मतदान केंद्रों पर ईवीएम तैनात, 4 मई की मतगणना के परिणाम राष्ट्रीय चुनावी रुझानों के लिए प्रारंभिक संकेतक माने जा रहे हैं।
मतदान का दायरा और मुख्य मुकाबले
Financial Express के लाइव अपडेट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हो रहा है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में वोट डाले जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में यह चरण कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे सीमा जिलों से लेकर झारग्राम, पश्चिम बर्दवान, पुरुलिया, बांकुड़ा, मालदा, मुर्शिदाबाद, पश्चिम मेदिनीपुर, बीरभूम और नदिया के हिस्सों तक फैला है।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा टकराव केंद्र में है। नंदीग्राम इस चरण का सबसे चर्चित क्षेत्र बना हुआ है, जहां भाजपा के सुवेंदु अधिकारी, तृणमूल के पवित्र कर, कांग्रेस के शेख जरियातुल हुसैन और सीपीआई की शांति गिरी के बीच बहुकोणीय मुकाबला हो रहा है।
तमिलनाडु में करीब 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं और 5.73 करोड़ मतदाता 234 सीटों पर फैसला कर रहे हैं। डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला मोर्चा आमने-सामने हैं, जबकि अभिनेता विजय की तमिलगा वेत्री कषगम की एंट्री मुकाबले को त्रिकोणीय रंग दे रही है।
प्रशासनिक तैयारी और व्यापक राजनीतिक असर
तमिलनाडु में 1.40 लाख मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें भेजी गई हैं और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक ने छेड़छाड़ के प्रति शून्य-सहनशीलता की नीति लागू की है, जिसमें उम्मीदवार बटन पर स्याही या कवर जैसी किसी भी गड़बड़ी पर पुनर्मतदान की चेतावनी शामिल है।चुनाव प्रचार 21 अप्रैल को तेज बयानबाजी और रैलियों के बीच समाप्त हुआ था। अब ध्यान मतदान प्रतिशत और 4 मई की मतगणना पर है, जिसे देश के अन्य हिस्सों में इस वर्ष होने वाले चुनावों से पहले मतदाताओं के रुझान का शुरुआती संकेतक माना जा रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से पश्चिम बंगाल में भाजपा अपने पिछले मजबूत प्रदर्शन वाले क्षेत्रों को बचाने की कोशिश कर रही है, जबकि तृणमूल खोई जमीन वापस लेने पर जोर दे रही है। दूसरी ओर तमिलनाडु में द्रविड़ दलों की पारंपरिक प्रतिस्पर्धा के बीच नए दल की मौजूदगी युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के रुझान पर खास असर डाल सकती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की कुछ चुनिंदा निर्णायक सीटों पर फोकस किया गया था, जहां डीएमके-एआईएडीएमके की पारंपरिक प्रतिस्पर्धा को गठबंधन बदलाव और टीवीके जैसे नए दल की एंट्री से बहुकोणीय चुनौती मिल रही है। उस विश्लेषण में एडप्पडी, कोलाथुर, चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी, मायलापुर और त्रिची ईस्ट जैसी सीटों को संभावित ट्रेंड-सेटर बताया गया था, जिनके नतीजे यह संकेत दे सकते हैं कि राज्य की राजनीति में तीसरा ध्रुव कितना असर डाल पाएगा।
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