राम माधव ने रूस तेल आयात दावे पर स्पष्टीकरण जारी किया, भारत की ऊर्जा नीति पर रुख दोहराया
वॉशिंगटन डीसी में एक नीति सम्मेलन के बाद भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस फिर केंद्र में आ गई है। भाजपा नेता राम माधव ने कहा कि भारत ने रूस से तेल आयात रोकने पर कभी सहमति नहीं दी और उनकी पहले की टिप्पणी तथ्यात्मक रूप से गलत थी।
हाइलाइट्स
- राम माधव ने X पर स्पष्ट किया कि भारत ने रूस से तेल आयात रोकने या 50 प्रतिशत टैरिफ स्वीकारने पर कभी सहमति नहीं दी।
- भारत-U.S. का द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 131.84 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का अधिशेष 41.18 अरब डॉलर रहा।
- भारत-रूस व्यापार 68.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जिसमें 63.8 अरब डॉलर का आयात और भारत को 58.9 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
वॉशिंगटन कार्यक्रम के बाद स्पष्टीकरण
Financial Express के अनुसार, राम माधव ने शुक्रवार को X पर जारी पोस्ट में अपनी पहले की टिप्पणी वापस लेते हुए कहा कि भारत ने रूस से तेल आयात रोकने पर कभी सहमति नहीं दी थी और 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने का उसने जोरदार विरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह पैनल चर्चा में दूसरे वक्ता के तर्क का सीमित जवाब देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनका बयान तथ्यात्मक रूप से गलत था।
हडसन इंस्टीट्यूट की न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए माधव ने पहले कहा था कि नई दिल्ली ने U.S. के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें ईरान और रूस से तेल आयात रोकना तथा U.S. टैरिफ स्वीकार करना शामिल है। उसी चर्चा में उन्होंने पूछा था कि भारत आखिर और क्या कर सकता है, जबकि वह द्विपक्षीय संबंधों को लेकर पहले ही काफी लचीलापन दिखा चुका है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब रियायती रूसी कच्चे तेल की भारत की खरीद, पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद, वैश्विक निगरानी में बनी हुई है। नई दिल्ली लगातार कहती रही है कि ऊर्जा आयात से जुड़े उसके फैसले राष्ट्रीय हित और बाजार परिस्थितियों के आधार पर होते हैं।
U.S. और रूस के साथ व्यापारिक संतुलन
भारत और U.S. के आर्थिक संबंध व्यापक और विविध बने हुए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 131.84 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें भारत का निर्यात 11.6 प्रतिशत बढ़कर 86.51 अरब डॉलर और आयात 7.4 प्रतिशत बढ़कर 45.33 अरब डॉलर रहा, जिससे 41.18 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष बना।मुख्य निर्यात क्षेत्रों में इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण शामिल रहे, जबकि आयात में कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला और विमान पुर्जे प्रमुख रहे। दोनों देश अब 2030 तक कुल व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रख रहे हैं।
इसके विपरीत, भारत-रूस व्यापार 68.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद संरचनात्मक रूप से असंतुलित बना हुआ है। यह संबंध मुख्यतः रियायती कच्चे तेल के आयात पर आधारित है, जिसमें भारत का आयात 63.8 अरब डॉलर और निर्यात केवल 4.9 अरब डॉलर रहा, जिससे लगभग 58.9 अरब डॉलर का बड़ा व्यापार घाटा बना।
ऊर्जा क्षेत्र को छोड़ दें तो दोनों देशों के बीच गैर-ऊर्जा व्यापार अपेक्षाकृत सीमित, लगभग 12 अरब डॉलर के आसपास रहता है। भारत का रूस को निर्यात मुख्यतः फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और विद्युत मशीनरी पर केंद्रित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रूस के साथ व्यापारिक रिश्ता अभी भी बड़े पैमाने पर ऊर्जा निर्भर है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत और U.S. के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी वाली पोस्ट दोबारा साझा करने से पैदा हुई कूटनीतिक संवेदनशीलता पर चर्चा की गई थी। इसमें विदेश मंत्रालय की सतर्क प्रतिक्रिया और यह भी रेखांकित किया गया था कि दोनों देश 2030 तक 500 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य की दिशा में वार्ताओं को जारी व रचनात्मक बता रहे हैं।
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