पश्चिम बंगाल के प्रमुख मुकाबले 2026 मतगणना से पहले चुनावी नतीजों की दिशा तय करते हैं
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरण पूरे हो चुके हैं और अब ध्यान 4 मई की मतगणना पर है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर के बीच भवानीपुर, नंदीग्राम, भांगर, समसेरगंज और पानीहाटी जैसी सीटें राज्य के व्यापक राजनीतिक संतुलन पर असर डाल सकती हैं।
हाइलाइट्स
- पश्चिम बंगाल की कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर 91 लाख नाम हटाए जाने पर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया और राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है।
- भवानीपुर, नंदीग्राम, भांगर और पानीहाटी जैसी प्रमुख सीटों पर तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस और ISF के उम्मीदवारों के बीच सख्त मुकाबला हो रहा है।
- 4 मई को घोषित होने वाले इन सीटों के परिणाम राज्यव्यापी राजनीतिक समीकरण और प्रमुख दलों की शक्ति संतुलन को निर्धारित करेंगे।
प्रमुख सीटों पर मुकाबले और चुनावी संदर्भ
Financial Express के अनुसार, इस चुनाव में कई हाई-प्रोफाइल सीटें राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गई हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण, SIR, को लेकर भी विवाद बना रहा, और रिपोर्ट के मुताबिक करीब 91 लाख नाम हटाए जाने के दावे पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भवानीपुर में सबसे ज्यादा नजरें ममता बनर्जी और उनके पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी के मुकाबले पर हैं। तृणमूल का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर 2021 में शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भाजपा के रुद्रनील घोष को हराया था, बाद में सीट खाली होने पर बनर्जी ने उपचुनाव में प्रियंका टिबरेवाल को पराजित किया।
नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी फिर केंद्र में हैं, जहां 2021 में उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था। इस बार उनका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के पबित्र कर से है, और 2007 के भूमि आंदोलन से जुड़ी इस सीट की प्रतीकात्मक अहमियत बनी हुई है।
भांगर में बहुकोणीय संघर्ष चुनाव को और जटिल बनाता है। 2021 में जीतने वाले इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नौशाद सिद्दीकी फिर मैदान में हैं और उनका सामना तृणमूल के साउकत मुल्ला, कांग्रेस के महबूबुल इस्लाम और भाजपा के जयंता गायेन से है।
क्षेत्रीय असर और 4 मई के नतीजों का महत्व
समसेरगंज में तृणमूल के मोहम्मद नूर आलम, कांग्रेस के नजमे आलम और भाजपा के सस्ती चरण घोष चुनावी मैदान में हैं। 2016 और 2021 में यह सीट तृणमूल के पास रही, लेकिन मुर्शिदाबाद में हालिया अशांति ने इस बार मुकाबले में नया आयाम जोड़ दिया है।पानीहाटी में मुकाबला भावनात्मक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है। भाजपा ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले के एक पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता निर्मल घोष के पुत्र तीर्थंकर घोष को उतारा है।
यह सीट 2011 से तृणमूल के पास है, इसलिए यहां का परिणाम पार्टी की पकड़ के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। मतदान पूरा हो जाने के बाद इन चुनिंदा सीटों के नतीजे 4 मई को राज्यव्यापी परिणाम की दिशा और प्रमुख दलों की राजनीतिक स्थिति पर उल्लेखनीय प्रभाव डाल सकते हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान पर फोकस किया गया था, जिसमें आठ जिलों की 142 सीटों पर वोटिंग का कार्यक्रम और 4 मई को होने वाली मतगणना का उल्लेख था। इसमें 41,001 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के लिए करीब 2,400 CAPF कंपनियों की तैनाती और तृणमूल कांग्रेस, भाजपा समेत प्रमुख दलों के लिए इस चरण के राजनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया गया था।
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