पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान शुरू, 142 सीटों पर चुनावी मुकाबला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में आठ जिलों की 142 सीटों पर मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो रहा है। इस चरण में 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है और मतगणना 4 मई को तय है।
हाइलाइट्स
- पश्चिम बंगाल के आठ जिलों में दूसरे चरण के तहत 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए और लगभग 2,400 CAPF कंपनियां तैनात की गईं।
- तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी जीत की कोशिश में है, जबकि भाजपा 2021 के 77 सीटों के प्रदर्शन के बाद सत्ता का लक्ष्य साध रही है।
- यह मतदान राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में पश्चिम बंगाल की भूमिका और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
मतदान व्यवस्था और सुरक्षा तैनाती
ANI के अनुसार, दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में दूसरे चरण के मतदान से पहले 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल चल रहे हैं और कई संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।विशेष निर्वाचक नामावली पर्यवेक्षक सुभ्रत गुप्ता ने कहा कि प्रशासन सभी संभावित कानून व्यवस्था स्थितियों के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, राज्य पुलिस और Central Armed Police Forces, दोनों को मतदाताओं की सुरक्षा और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए लगाया गया है, जबकि लगभग 2,400 CAPF कंपनियां तैनात की गई हैं।
मुख्य राजनीतिक दांव और राज्यस्तरीय असर
यह चरण राज्य की सियासी दिशा के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी जीत दर्ज करने की कोशिश में है। वहीं भाजपा 2021 के चुनाव में 77 सीटों के बेहतर प्रदर्शन के बाद इस बार सत्ता का जनादेश हासिल करना चाहती है।वाम दल उस राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां वे दशकों तक सत्ता में रहे थे, और कांग्रेस भी अपनी मौजूदगी फिर मजबूत करना चाहती है। आठ जिलों में होने वाला यह मतदान न सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति संतुलन तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी पश्चिम बंगाल की भूमिका को प्रभावित कर सकता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान कार्यक्रम पर फोकस किया गया था, जिसमें कोलकाता सहित सात जिलों की 142 सीटों पर मतदान का समय और मतगणना की तारीख बताई गई थी। लेख में मतदाताओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी शामिल थे—जैसे वैध पहचान पत्र की अनिवार्यता, मतदान केंद्रों के भीतर मोबाइल फोन पर प्रतिबंध और VVPAT के जरिए वोट सत्यापन—ताकि प्रक्रिया सुचारु और निष्पक्ष बनी रहे।
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