Ashutosh Sureka

Rockland Hospitals मामले में ED ने 158.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं

Rockland Hospitals मामले में ED ने 158.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं
ED की बड़ी कार्रवाई

दिल्ली में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में आए Rockland Hospitals Limited मामले में प्रवर्तन कार्रवाई अब कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों तक पहुंच गई है। यह कदम 158.37 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय दुरुपयोग, फर्जी बिलिंग और निर्माण लागत बढ़ाने के आरोपों से जुड़ी जांच के बीच उठाया गया है।

हाइलाइट्स

  • ED ने Prevention of Money Laundering Act, 2002 के तहत Rockland Hospitals Limited की 158.37 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
  • कंपनी प्रमोटरों ने 71 शेल कंपनियों और आवासीय एंट्री ऑपरेटर्स के जरिए 76.03 करोड़ रुपये के फर्जी इम्प्लांट इनवॉइस बनवाए और 82.34 करोड़ रुपये तक निर्माण लागत बढ़ा दी।
  • यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कॉरपोरेट गवर्नेंस, परियोजना लागत सत्यापन और वित्तीय प्रवाह की पारदर्शिता हेतु नियामकीय दबाव और कड़ा कर सकती है।

जांच का आधार और कथित धन के दुरुपयोग का तरीका

जांच प्रवर्तन निदेशालय की Enforcement Directorate के अनुसार सामने आई है। दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने Prevention of Money Laundering Act, 2002 के तहत M/s. Rockland Hospitals Limited और अन्य के खिलाफ चल रही जांच में 158.37 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। जांच की शुरुआत Serious Fraud Investigation Office द्वारा 31.01.2020 को द्वारका, नई दिल्ली स्थित विशेष अदालत, Companies Act, के समक्ष दायर शिकायत के आधार पर हुई थी।

जांच में आरोप है कि कंपनी के प्रवर्तकों ने 71 कंपनियों का उपयोग कर 76.03 करोड़ रुपये के फर्जी इम्प्लांट इनवॉइस बनवाए और संबंधित कंपनी M/s. Somya Constructions Private Limited के जरिए अस्पताल निर्माण लागत को 82.34 करोड़ रुपये तक बढ़ाकर धन की निकासी की। ED का कहना है कि इस प्रक्रिया में आवासीय एंट्री ऑपरेटरों और शेल इकाइयों का इस्तेमाल कथित अवैध धन के स्रोत को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए किया गया।

अस्पताल क्षेत्र और प्रवर्तन कार्रवाई पर असर

एजेंसी ने कहा कि ऊपर बताए गए तौर-तरीकों से उत्पन्न कुल अपराध आय 158.37 करोड़ रुपये आंकी गई है, और इसी मूल्य का प्रतिनिधित्व करने वाली संपत्तियों को कुर्क किया गया है। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कॉरपोरेट गवर्नेंस, संबंधित पक्षों के लेनदेन और परियोजना लागत के सत्यापन पर नियामकीय निगरानी को और कड़ा कर सकती है।

मामला यह भी रेखांकित करता है कि वित्तीय धोखाधड़ी की जांच अब केवल मूल लेनदेन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कथित धन से जुड़ी संपत्तियों तक बढ़ती है। इससे अस्पताल और व्यापक कॉरपोरेट क्षेत्र में अनुपालन, लेखा जांच और फंड फ्लो की पारदर्शिता पर दबाव बढ़ सकता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में जालंधर में संगठित इमिग्रेशन और U.S. वीजा धोखाधड़ी से जुड़ी कथित अवैध कमाई पर ED की कार्रवाई का विवरण था, जहां PMLA के तहत कई फर्मों और व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई। लेख में जाली दस्तावेजों और फर्जी फंड-प्रूफ के जरिए अपराध की आय को छिपाने/वैध दिखाने के आरोप, साथ ही 2.14 करोड़ रुपये की अनुमानित अपराध आय के बराबर चल-अचल संपत्तियों के फ्रीज/जब्ती का संदर्भ दिया गया था।

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