ईडी ने पंजाब के इमिग्रेशन फर्मों पर मनी लॉन्ड्रिंग अभियोजन दायर किया

ईडी ने पंजाब के इमिग्रेशन फर्मों पर मनी लॉन्ड्रिंग अभियोजन दायर किया
ईडी की बड़ी कार्रवाई

जालंधर में संगठित इमिग्रेशन और वीजा धोखाधड़ी से जुड़ी कथित अवैध कमाई पर प्रवर्तन कार्रवाई तेज होती है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय ने कई फर्मों और व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। मामला U.S. वीजा हासिल करने के लिए कथित जाली शैक्षिक दस्तावेज, फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और बनावटी फंड प्रूफ के इस्तेमाल से जुड़ा है।

हाइलाइट्स

  • ईडी ने 13.07.2026 को M/s Red Leaf Immigration Pvt. Ltd. सहित सात आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल की।
  • जांच में 154 आवेदकों के लिए लगभग 40 लाख रुपये फर्जी फंड प्रूफ के तौर पर खातों में अस्थायी रूप से जमा-निकासी और प्रति आवेदक 40,000 रुपये वसूली का खुलासा हुआ।
  • करीब 2.14 करोड़ रुपये की अपराध की आय के आकलन के बाद चल-अचल संपत्तियां फ्रीज, जिसमें 19 लाख रुपये नकदी और 1 किलोग्राम सोने की ईंट जब्त की गई।

अभियोजन शिकायत और जांच का दायरा

जैसा कि Enforcement Directorate ने बताया, जालंधर जोनल कार्यालय ने 13.07.2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत विशेष अदालत, जालंधर में M/s Red Leaf Immigration Pvt. Ltd., Amandeep Singh, Poonam Rani, Ankur Kumar Kehar, Nitin Vij, Kamaljot Kansal, M/s Overseas Partner और M/s Rudra Consultancy Services के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। एजेंसी का कहना है कि ये पक्ष संगठित इमिग्रेशन और वीजा धोखाधड़ी से उत्पन्न अपराध की आय को कथित रूप से वैध दिखाने में शामिल थे।

ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की, जो नई दिल्ली स्थित U.S. दूतावास की शिकायतों पर दर्ज हुई थीं। इन एफआईआर में छात्र और विजिटर वीजा हासिल करने के लिए जाली शैक्षिक प्रमाणपत्र, बनावटी अनुभव पत्र, फर्जी वित्तीय विवरण और धोखाधड़ीपूर्ण फंड प्रूफ तैयार कर जमा करने की कथित साजिश का उल्लेख है।

जांच में यह भी सामने आया कि Ankur Kumar Kehar द्वारा संचालित M/s Overseas Partner ने Nitin Vij की M/s Rudra Consultancy Services के साथ कथित साजिश में वीजा आवेदकों के बैंक खातों में अस्थायी रूप से धन रखवाकर उनकी वित्तीय क्षमता का झूठा आभास बनाया। ईडी के मुताबिक, इस तरीके से 154 आवेदकों को लगभग 40 लाख रुपये अल्प अवधि के लिए खातों में जमा कर और तुरंत निकालकर फर्जी फंड प्रूफ दिया गया, जबकि प्रति आवेदक करीब 40,000 रुपये वसूले गए।

एजेंसी ने यह भी कहा कि Kamaljot Kansal की M/s Infowiz Software Solution ने ऐसे आवेदकों के लिए कथित रूप से फर्जी प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और अनुभव प्रमाणपत्र तैयार किए, जिन्होंने वास्तविक रूप से ऐसा प्रशिक्षण या रोजगार नहीं लिया था। जब्त डायरियों और अन्य रिकॉर्ड से नकद भुगतान के बदले फर्जी रोजगार दस्तावेज तैयार किए जाने का समर्थन मिलने की बात कही गई है।

जब्ती, संपत्ति फ्रीज और क्षेत्रीय असर

फरवरी 2025 में जांच के दौरान ईडी ने PMLA की धारा 17 के तहत आरोपियों से जुड़े कई परिसरों और लॉकरों पर तलाशी ली। इन तलाशी कार्रवाइयों में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, कथित अवैध लेनदेन का रिकॉर्ड रखने वाली डायरियां, 19 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी और लगभग 1 किलोग्राम वजनी एक सोने की ईंट जब्त की गई।

ईडी ने अपराध की आय का आकलन लगभग 2.14 करोड़ रुपये किया है, जिसमें M/s Red Leaf Immigration Pvt. Ltd. से 1.37 करोड़ रुपये, M/s Overseas Partner और M/s Rudra Consultancy Services से 61.60 लाख रुपये, तथा M/s Infowiz Software Solution से 15 लाख रुपये शामिल बताए गए हैं। जांच के दौरान एजेंसी ने इसी राशि के बराबर चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच या फ्रीज की हैं, जिनमें आवासीय संपत्तियां और बैंक बैलेंस शामिल हैं।

यह मामला पंजाब के इमिग्रेशन परामर्श और वीजा सेवा क्षेत्र पर नियामकीय दबाव बढ़ने का संकेत देता है, खासकर उन परिचालनों पर जहां दस्तावेज सत्यापन, फंड प्रूफ और आवेदक प्रोफाइलिंग में अनियमितता का जोखिम अधिक है। ईडी का कहना है कि जांच से यह स्थापित होता है कि आरोपियों ने कथित रूप से जाली शैक्षिक दस्तावेज, फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, बनावटी वित्तीय विवरण और धोखाधड़ीपूर्ण फंड प्रूफ के जरिए अपराध की आय को अर्जित, छिपाया और उपयोग किया, ताकि उसे बेदाग संपत्ति के रूप में पेश किया जा सके।

हमारी पिछली रिपोर्ट में झारखंड के लातेहार में कथित मनी लॉन्ड्रिंग और उगाही/लेवी भुगतान से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई पर बताया गया था, जहां M/s Santosh Construction और सहयोगियों की करीब 3.87 करोड़ रुपये की 11 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गई थीं। लेख में दो FIR और NIA की जांच के आधार, कथित माओवादी हमले व नकद बरामदगी से जुड़े आरोप, तथा अपराध आय को संपत्ति खरीद के जरिए औपचारिक अर्थव्यवस्था में मिलाने की जांच की दिशा को रेखांकित किया गया था।

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