विलावनकोड में मतगणना शुरू, तमिलनाडु सीट पर कांग्रेस और भाजपा पर नजर
कन्याकुमारी जिले की विलावनकोड विधानसभा सीट के लिए 2026 चुनाव की मतगणना 4 मई को हो रही है, जबकि इस सीट पर मतदान 23 अप्रैल को हुआ था। अंतिम नतीजा सभी चरणों की गिनती पूरी होने के बाद घोषित होगा, और इस सीट पर क्षेत्रीय राजनीतिक महत्व के कारण प्रमुख दलों के प्रदर्शन पर करीबी नजर है।
हाइलाइट्स
- विलावनकोड सीट पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ, कांग्रेस के प्रवीण टी.टी. और भाजपा की विजयधरनी एस प्रमुख उम्मीदवार हैं।
- तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान प्रतिशत 75.71% रहा, विकास, रोजगार और स्थानीय मुद्दे प्रमुख रहे।
- 2021 के पिछले चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट 28,669 वोटों के अंतर से जीती थी, और 2016 व 2021 दोनों में विजयधरनी एस विजेता रहीं।
मतगणना, उम्मीदवार और चुनावी पृष्ठभूमि
Financial Express के अनुसार, विलावनकोड सीट के लिए वोटों की गिनती जारी है और आधिकारिक परिणाम निर्वाचन प्रक्रिया के सभी राउंड पूरे होने के बाद सामने आएंगे। उपलब्ध सूची में भाजपा की विजयधरनी एस, कांग्रेस के प्रवीण टी.टी, तमिलगा वेत्री कझगम के माइकल कुमार के साथ कई निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवार शामिल हैं, जबकि अधिकांश उम्मीदवारों की स्थिति अभी प्रतीक्षित है।
इस सीट पर मतदान 23 अप्रैल को हुआ था। प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, जीतने वाले उम्मीदवार, जीत का अंतर, उपविजेता और वोट शेयर से जुड़े आंकड़े मतगणना पूरी होने के बाद स्पष्ट होंगे।
राज्यव्यापी रुझान और सीट का राजनीतिक महत्व
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में राज्य का मतदान प्रतिशत लगभग 75.71% दर्ज किया गया। चुनाव प्रचार के दौरान विकास, रोजगार, स्थानीय बुनियादी ढांचा और राज्य से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे, जिससे इस सीट पर मुकाबला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया।एग्जिट पोल ने राज्य में कड़े मुकाबले का संकेत दिया था और प्रमुख दलों के लिए बढ़त के अनुमान सामने आए थे, लेकिन अंतिम परिणाम केवल भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक मतगणना के बाद ही तय होगा। 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह सीट 28,669 वोटों के अंतर से जीती थी, और उपलब्ध पिछले नतीजों के अनुसार 2016 और 2021, दोनों चुनावों में विजयधरनी एस विजेता रहीं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में DMK बनाम AIADMK की मुख्य टक्कर के बीच उन कारकों पर फोकस किया गया था जो नतीजों को पलट सकते हैं—जैसे 46 अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों की निर्णायक भूमिका, कोंगु बेल्ट और वन्नियार प्रभाव वाले क्षेत्रों की सियासी गणित, तथा विजय की TVK से संभावित वोट-कटाई। लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि ऐसे संकेत और अनुमान अंतिम तस्वीर नहीं होते, और वास्तविक स्थिति मतगणना के बाद ही स्पष्ट होती है।
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