पश्चिम बंगाल में सरकार गठन के लिए 148 सीटों का बहुमत अहम, 2026 मतगणना में BJP और AITC में कड़ी टक्कर
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना दो चरणों में मतदान पूरा होने के बाद जारी है, और राज्य में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का आंकड़ा सबसे महत्वपूर्ण बना हुआ है। 294 सदस्यीय विधानसभा के बीच फिलहाल 293 सीटों पर गिनती हो रही है क्योंकि एक सीट पर पुनर्मतदान होना है, लेकिन बहुमत का मानक अपरिवर्तित है।
हाइलाइट्स
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 293 सीटों पर गिनती जारी है, बहुमत के लिए 148 सीटें जरूरी हैं, एक सीट पर पुनर्मतदान होगा।
- शुरुआती रुझानों में BJP और AITC के बीच कड़ा मुकाबला दिखा, विभिन्न क्षेत्रों में दोनों पार्टियां बढ़त के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
- Election Commission of India के अनुसार मतदान प्रतिशत 92.47% रहा, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक है और परिणामों को निर्णायक बना सकता है।
मतगणना का दायरा और बहुमत का गणित
Financial Express के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना 293 निर्वाचन क्षेत्रों में चल रही है, जबकि एक सीट को पुनर्मतदान के लिए भेजा गया है और अंतिम राजनीतिक तस्वीर 294 सीटों वाली पूरी विधानसभा संरचना के आधार पर आंकी जाएगी.
राज्य में किसी भी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 148 सीटें चाहिए. मतगणना आगे बढ़ने के साथ यही बहुमत रेखा सबसे अहम पैमाना बनी हुई है, खासकर तब जब शुरुआती रुझान मुख्य मुकाबले को BJP और All India Trinamool Congress, AITC, के बीच करीबी दिखा रहे हैं.
उच्च मतदान के बीच करीबी मुकाबले पर नजर
शुरुआती रुझानों में BJP और TMC अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़त दर्ज करती दिख रही हैं, जिससे मुकाबला कड़ा बना हुआ है. गिनती के और दौर पूरे होने के साथ तस्वीर बदल रही है और अंतिम नतीजे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.Election Commission of India ने 92.47% मतदान दर्ज किया है, जो हाल के वर्षों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है. विश्लेषकों का मानना है कि इतना ऊंचा मतदान कई करीबी सीटों पर अंतिम जनादेश को प्रभावित कर सकता है, जबकि दिन बढ़ने के साथ यह भी देखा जा रहा है कि क्या कोई दल बहुमत पार करता है या स्थिति त्रिशंकु विधानसभा की ओर बढ़ती है.
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कई चरणों में होने वाली गिनती पर फोकस किया गया था। इसमें नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों के साथ उत्तर बंगाल व जंगलमहल के उन इलाकों को भी निर्णायक बताया गया था, जहां डाक मतपत्रों और आगे के दौर के साथ रुझान बदल सकते हैं।
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