पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत से पूंजीगत व्यय बढ़ने की उम्मीद, राजकोषीय दबाव बना जोखिम

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत से पूंजीगत व्यय बढ़ने की उम्मीद, राजकोषीय दबाव बना जोखिम
बंगाल में निवेश की उम्मीद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा को 207 सीटों का जनादेश मिलने के बाद राज्य में बुनियादी ढांचा आधारित निवेश मॉडल के लागू होने की संभावना बन रही है। विश्लेषकों का कहना है कि कम पूंजीगत व्यय वाले राज्य में इससे औद्योगिक पुनरुद्धार की राह खुल सकती है, हालांकि कल्याणकारी वादों का बोझ वित्तीय संतुलन को चुनौती दे सकता है।

हाइलाइट्स

  • भाजपा के सत्ता में आने पर पश्चिम बंगाल में पूंजीगत व्यय जीएसडीपी के ~2% से ओडिशा और उत्तर प्रदेश के स्तर तक बढ़ने की उम्मीद है।
  • चुनावी वादों जैसे महिला पेंशन, किसान सहायता और 30% धान एमएसपी वृद्धि से 70–100 अरब रुपये का वार्षिक वित्तीय बोझ और जीएसडीपी पर 3.4% अतिरिक्त दबाव बनेगा।
  • भाजपा के पूर्वी भारत में बढ़ते प्रभाव और बंगाल में निवेश व रोजगार वृद्धि से केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के श्रम बाजारों पर अल्पकालिक दबाव आ सकता है।

बंगाल के पूंजीगत व्यय एजेंडे की रूपरेखा

Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा का तथाकथित 'डबल इंजन' शासन मॉडल उत्तर प्रदेश, ओडिशा और असम में पूंजीगत व्यय के अनुपात को बढ़ाने के साथ जुड़ा रहा है, और अब यही ढांचा पश्चिम बंगाल में भी लागू होने की उम्मीद है। लेख में Elara Capital के विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत का पूंजीगत व्यय विस्तार अब पूर्वी भारत की ओर बढ़ सकता है, खासकर तब जब पश्चिम बंगाल में 15 साल के तृणमूल कांग्रेस शासन का अंत हो रहा है।

राज्य का पूंजीगत व्यय अभी सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 2% पर है, जो ओडिशा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से काफी नीचे है। भाजपा के घोषणापत्र में ताजपुर और कुलपी में गहरे समुद्री बंदरगाह, कोलकाता मेट्रो का विस्तार, 61 अटकी रेल परियोजनियों का पुनरुद्धार, सिंगूर में औद्योगिक पार्क, पुरुलिया, मालदा और बालुरघाट में नए हवाई अड्डे तथा जूट उद्योग के पुनर्जीवन जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

लेख के मुताबिक, राज्य की आर्थिक सुस्ती भी नई सरकार के लिए एक बड़ा संदर्भ है। वित्त वर्ष 2018 से वित्त वर्ष 2025 के बीच भारत की जीडीपी में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी 28 आधार अंकों से घटी, जबकि इसी अवधि में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ी; साथ ही 2012 से लगभग 6,888 कंपनियों के राज्य से बाहर जाने का उल्लेख किया गया है।

राजकोषीय जोखिम और व्यापक राष्ट्रीय असर

Emkay Global Financial Services की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लेख में कहा गया है कि भाजपा के अपने चुनावी वादे राजस्व व्यय को काफी बढ़ा सकते हैं। महिलाओं को प्रति माह 3,000 रुपये, किसानों को 9,000 रुपये, बेरोजगारी भत्ता और धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 30% वृद्धि जैसे वादों से 70 अरब रुपये से 100 अरब रुपये तक का आवर्ती वित्तीय बोझ पड़ सकता है, जो राज्य के जीडीपी का लगभग 3.4% अतिरिक्त दबाव बनाता है।

यह चिंता ऐसे समय में उभरती है जब 2023 के बाद से राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा केंद्र के समेकन लक्ष्य से ऊपर चल रहा है। लेख में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए राज्यों का कुल राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.4% पर रहने का अनुमान है, जबकि लक्ष्य 3.1% है, जिससे उत्पादक पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता पर दबाव पड़ सकता है।

वृहद राजनीतिक और आर्थिक संदर्भ में Elara Capital का मानना है कि ओडिशा, असम, बिहार, छत्तीसगढ़ और अब पश्चिम बंगाल में भाजपा का प्रभाव पूर्वी भारत में उसकी पकड़ को मजबूत करता है। लेख यह भी कहता है कि यदि निवेश और रोजगार का चक्र तेज होता है तो पश्चिम बंगाल में उल्टा प्रवासन बढ़ सकता है, जिसका अल्पकालिक असर केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के श्रम बाजारों पर पड़ सकता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के रुझानों पर चर्चा की गई थी, जिसमें भाजपा 294 सीटों वाली विधानसभा में 190+ सीटों पर बढ़त के साथ राज्य में पहली बार सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही थी। उस लेख में ऊंचे मतदान, सुरक्षा तैनाती और ‘भरोशार शपथ’ जैसे कल्याणकारी वादों को इस बदलाव के प्रमुख कारकों के रूप में रेखांकित किया गया था।

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