राज्यों की प्रतिभूति नीलामी में 20,461.29 करोड़ रुपये जुटे, गुजरात, पंजाब और उत्तराखंड में आंशिक स्वीकृति

राज्यों की प्रतिभूति नीलामी में 20,461.29 करोड़ रुपये जुटे, गुजरात, पंजाब और उत्तराखंड में आंशिक स्वीकृति
राज्यों की नीलामी अपडेट

भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ताजा प्रतिभूति नीलामी में कुल 21,600 करोड़ रुपये के मुकाबले 20,461.29 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार की गई हैं। इस प्रक्रिया में कई पुनः जारी राज्य विकास ऋण शामिल हैं, जबकि गुजरात ने 12 वर्षीय प्रतिभूति में कोई राशि स्वीकार नहीं की और पंजाब तथा उत्तराखंड ने कुछ निर्गमों में आंशिक स्वीकृति दी है।

हाइलाइट्स

  • राज्य सरकार प्रतिभूतियों की नीलामी में 21,600 करोड़ रुपये लक्ष्य के मुकाबले 20,461.29 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
  • गुजरात, पंजाब और उत्तराखंड ने अपने कुछ निर्गमों में क्रमशः 12 वर्षीय, 7 वर्षीय और 9 वर्षीय प्रतिभूतियों में आंशिक या शून्य राशि स्वीकृत की।
  • मज़बूत मांग और पुनः जारी कागजों में पूर्ण स्वीकृति से संकेत मिलता है कि निवेशक दीर्घकालिक प्रतिभूतियों के चयन और मूल्य निर्धारण पर भिन्न व्यवहार दिखा रहे हैं।

नीलामी परिणाम और स्वीकृत राशि

भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह यील्ड और मूल्य आधारित नीलामी राज्य सरकार प्रतिभूतियों के लिए आयोजित की गई, जिसमें आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल रहे। कुल 21,600 करोड़ रुपये जुटाने की योजना के मुकाबले 20,461.29 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए, जिससे कुछ निर्गमों में मांग और मूल्य निर्धारण में अंतर दिखाई देता है।Reserve Bank of India ने यह जानकारी दी।

आंध्र प्रदेश ने अपने सभी निर्गमों में पूरी राशि स्वीकार की, जिनमें 6 वर्षीय कागज के साथ 2042 और 2056 परिपक्वता वाले पुनः जारी ऋण शामिल हैं। असम और राजस्थान ने भी अपने निर्धारित निर्गमों में पूर्ण स्वीकृति दी, जबकि महाराष्ट्र और तेलंगाना ने विभिन्न अवधियों के पुनः जारी बॉन्डों में पूरी नियोजित राशि जुटाई।

जम्मू और कश्मीर ने जून 10, 2026 को जारी 7.81% जम्मू और कश्मीर एसजीएस 2051 के पुनः निर्गम में 500 करोड़ रुपये की पूरी राशि स्वीकार की। दूसरी ओर, गुजरात ने 8 वर्षीय प्रतिभूति में 1,000 करोड़ रुपये स्वीकार किए, लेकिन 12 वर्षीय प्रतिभूति में कोई राशि स्वीकार नहीं की। पंजाब ने 7 वर्षीय प्रतिभूति में 1,000 करोड़ रुपये के मुकाबले 934.159 करोड़ रुपये ही स्वीकार किए, जबकि उसके 2041 और 2044 परिपक्वता वाले पुनः जारी ऋणों में पूरी राशि ली गई। उत्तराखंड ने 9 वर्षीय प्रतिभूति में 500 करोड़ रुपये के मुकाबले 427.131 करोड़ रुपये स्वीकार किए।

राज्य उधारी बाजार पर असर

यह नीलामी दिखाती है कि राज्यों की उधारी रणनीति अब भी अलग-अलग अवधियों और पुनः जारी प्रतिभूतियों पर आधारित है, ताकि वे बाजार स्थितियों के अनुरूप लागत और मांग का संतुलन बना सकें। कट-ऑफ यील्ड और कीमतों से यह भी संकेत मिलता है कि लंबी अवधि वाले कागजों में निवेशकों की मांग राज्य और निर्गम संरचना के अनुसार बदल रही है।

गुजरात, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ निर्गमों में आंशिक या शून्य स्वीकृति यह बताती है कि राज्य सरकारें हर बोली को स्वीकार करने के बजाय उधारी लागत पर अनुशासन बनाए रख रही हैं। पूर्ण स्वीकृति वाले निर्गमों से यह भी स्पष्ट है कि मजबूत मांग वाले राज्यों और पुनः जारी कागजों को बाजार में अपेक्षाकृत बेहतर प्रतिसाद मिल रहा है, जो राज्य विकास ऋण बाजार में मूल्य निर्धारण का महत्वपूर्ण संकेतक बना रहता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए सरकार और आरबीआई के कदमों पर चर्चा की गई थी, जिनमें एफपीआई के लिए सरकारी बॉन्ड पर कर राहत, Fully Accessible Route का विस्तार और विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने के उपाय शामिल थे। उस लेख में बताया गया था कि इन नीतिगत बदलावों से भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, हालांकि आवश्यक पूंजी प्रवाह के मुकाबले इसे आंशिक समाधान माना गया।

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