पूर्वी भारत की वृद्धि के लिए कोलकाता पुनरुद्धार को अहम बताते हैं Sanjeev Sanyal

पूर्वी भारत की वृद्धि के लिए कोलकाता पुनरुद्धार को अहम बताते हैं Sanjeev Sanyal
कोलकाता पुनरुद्धार का महत्त्व

पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक और आर्थिक बहस के बीच कोलकाता की आर्थिक भूमिका फिर से केंद्र में है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य Sanjeev Sanyal का कहना है कि भारत की पूर्व-पश्चिम आर्थिक खाई कम करने के लिए शहर का पुनरुद्धार जरूरी है।

हाइलाइट्स

  • Sanjeev Sanyal ने बताया कि पश्चिम बंगाल की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी विभाजन के बाद 11% थी, अब यह घटकर करीब 5.5% रह गई है।
  • उन्होंने कहा भारत को 7–8% GDP वृद्धि और 2047 तक 'Viksit Bharat' लक्ष्य के लिए कोलकाता का पुनरुद्धार केवल क्षेत्रीय नहीं, राष्ट्रीय आवश्यकता है।
  • Sanyal ने सुझाव दिया कि पूर्वी भारत को बेहतर बुनियादी ढाँचे, औद्योगिक विस्तार और निर्यात बढ़ाकर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से गहराई से जोड़ना होगा।

पूर्व-पश्चिम आर्थिक अंतर पर जोर

ANI के अनुसार, मुंबई में “The Relative Economic Performance of Bharatiya States” विषय पर बोलते हुए Sanyal कहते हैं कि भारत की सबसे बड़ी आर्थिक असमानता उत्तर-दक्षिण नहीं, बल्कि पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच है। उनका कहना है कि 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद पश्चिमी और दक्षिणी राज्य तेजी से आगे बढ़े, जबकि पूर्वी भारत पीछे रह गया।

Sanyal के मुताबिक, विभाजन के बाद राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी करीब 11% थी, जो अब लगभग 5.5% रह गई है। उनका तर्क है कि इस अंतर को पाटने के लिए कोलकाता को फिर से एक प्रमुख औद्योगिक और वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करना होगा, ताकि वह पूरे पूर्वी समुद्री क्षेत्र के लिए एक “anchor engine” की भूमिका निभा सके।

वह यह भी कहते हैं कि यदि भारत 7% से 8% की GDP वृद्धि दर बनाए रखना चाहता है और 2047 तक “Viksit Bharat” का लक्ष्य हासिल करना चाहता है, तो कोलकाता का पुनरुद्धार केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक आवश्यकता है।

कोलकाता की गिरावट और क्षेत्रीय असर

Sanyal का कहना है कि पूर्वी भारत की कमजोरी की बड़ी वजह यह है कि कोलकाता, जो कभी क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण वाणिज्यिक शहर था, कई दशकों से आर्थिक चालक की भूमिका नहीं निभा रहा है। उनके अनुसार, 1980 के दशक में शुरू हुए औद्योगिक क्षरण ने न केवल उद्योगों को प्रभावित किया, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थानों को भी कमजोर किया, जिससे बंगाल से बड़ी संख्या में युवा प्रतिभा का पलायन हुआ।

वह कहते हैं कि पूर्वी भारत को बेहतर बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विस्तार और निर्यात-उन्मुख विकास के जरिए वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से अधिक गहराई से जोड़ना होगा। उनके मुताबिक, बंगाल की अगुवाई में कोलकाता फिर से दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेशद्वार बन सकता है और विनिर्माण तथा सेवा निर्यात की नई लहर को गति दे सकता है।

Sanyal का कहना है कि पूर्वी भारत के बदलते राजनीतिक और आर्थिक माहौल में अब विकास-समर्थक सोच के लिए अधिक अनुकूलता दिख रही है। वह कोलकाता के पुनर्निर्माण को एक “national project” बताते हैं और कहते हैं कि शहर की औद्योगिक और वित्तीय ताकत बहाल करना भारत की दीर्घकालिक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों और उससे जुड़े संभावित सत्ता परिवर्तन पर चर्चा की गई थी, जिसमें भाजपा को बढ़त और कारोबारी समुदाय में निवेश व रोजगार को लेकर बढ़ती उम्मीदों का जिक्र था। उसी संदर्भ में मतगणना प्रक्रिया पर विवाद और ममता बनर्जी की आपत्तियों का भी उल्लेख हुआ था, साथ ही यह रेखांकित किया गया था कि परिणामों की दिशा राज्य के निवेश माहौल और औद्योगिक गतिविधि के लिए अहम मोड़ मानी जा रही है।

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