टाटा ट्रस्ट्स की 8 मई बैठक पर रोक की याचिका पर तत्काल सुनवाई से बॉम्बे हाई कोर्ट का इनकार

टाटा ट्रस्ट्स की 8 मई बैठक पर रोक की याचिका पर तत्काल सुनवाई से बॉम्बे हाई कोर्ट का इनकार
टाटा ट्रस्ट्स बैठक पर बहस

टाटा समूह की शासन व्यवस्था और Tata Sons में ट्रस्ट्स की भूमिका पर अहम असर डाल सकने वाली Sir Ratan Tata Trust की 8 मई की बोर्ड बैठक फिलहाल तय कार्यक्रम के अनुसार होने का रास्ता साफ हो गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बैठक पर रोक की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया, हालांकि याचिकाकर्ता को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष राहत मांगने की छूट दी।

हाइलाइट्स

  • Tata Trusts की 8 मई की बैठक पर रोक की याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया, जिससे बैठक जारी रहेगी।
  • Sir Ratan Tata Trust बोर्ड में आजीवन ट्रस्टी की संख्या वैधानिक सीमा से अधिक होने का मामला, Noel Tata समेत छह ट्रस्टियों को चुनौती दी गई।
  • Tata Sons में Tata Trusts के बहुलांश हिस्सेदारी, बोर्ड प्रतिनिधित्व, सार्वजनिक लिस्टिंग और ट्रस्टीशिप विवाद समूह की रणनीति और गवर्नेंस ढांचे पर असर डाल रहे हैं।

कानूनी चुनौती और 8 मई की बैठक

Mint की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र निवासी सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े ने Sir Ratan Tata Trust के मौजूदा बोर्ड गठन की वैधता को चुनौती देते हुए प्रस्तावित बैठक पर स्थगन की मांग की थी। अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं बनती, जिससे ट्रस्टियों की प्रस्तावित विचार-विमर्श प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

याचिका में तर्क दिया गया कि 2025 में Maharashtra Public Trusts Act में किए गए संशोधनों का उल्लंघन हो रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, जहां ट्रस्ट डीड में ऐसे प्रावधान स्पष्ट न हों, वहां स्थायी या आजीवन ट्रस्टियों की संख्या बोर्ड की कुल शक्ति के एक-चौथाई से अधिक नहीं हो सकती।

याचिका का दावा है कि SRTT में अभी छह ट्रस्टी हैं और उनमें से तीन कथित रूप से आजीवन ट्रस्टी के रूप में काम कर रहे हैं, जो वैधानिक सीमा से अधिक है। याचिका में Noel Tata, Venu Srinivasan, Vijay Singh, Jimmy Tata, Jehangir H C Jehangir और Darius Khambata सहित कई ट्रस्टियों के नाम लिए गए हैं।

टाटा समूह की शासन व्यवस्था पर असर

यह कानूनी विवाद टाटा समूह के लिए संवेदनशील समय पर सामने आया है, क्योंकि 8 मई की बैठक में Tata Sons के बोर्ड पर ट्रस्ट्स के प्रतिनिधित्व और समूह की व्यापक रणनीतिक दिशा पर चर्चा होने की उम्मीद है। Tata Trusts सामूहिक रूप से Tata Sons में बहुलांश हिस्सेदारी रखते हैं और समूह के रणनीतिक फैसलों पर उनका महत्वपूर्ण प्रभाव है।

फिलहाल Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata और वाइस चेयरमैन Venu Srinivasan, Tata Sons बोर्ड में ट्रस्ट्स का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाल की घटनाओं ने संकेत दिया है कि कुछ ट्रस्टियों के बीच मौजूदा शासन ढांचे की प्रभावशीलता और सामंजस्य को लेकर असहजता बढ़ रही है।

बैठक में स्थायी ट्रस्टीशिप का विवादित मुद्दा भी फिर उठने की संभावना है, जो अब मुकदमेबाजी के केंद्र में है। पिछले वर्ष महाराष्ट्र सरकार द्वारा सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट्स में निगरानी कड़ी करने और नियंत्रण के केंद्रीकरण को सीमित करने के लिए नियमों में बदलाव के बाद यह बहस और प्रमुख हो गई है।

Tata Sons की आगे की रणनीति, जिसमें होल्डिंग कंपनी की संभावित सार्वजनिक सूचीबद्धता पर अलग-अलग विचार भी शामिल हैं, चर्चा का एक और विषय रह सकता है। यह मुद्दा पहले भी समय-समय पर उठता रहा है, खासकर तब से जब Reserve Bank of India ने Tata Sons को पहले upper-layer non-banking finance company के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया था और बाद में कंपनी ने अपने स्वामित्व तथा शासन ढांचे में पुनर्संरचना की।

हमारी पिछली रिपोर्ट में कोविड के बाद रिकॉर्ड कॉरपोरेट मुनाफे के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की सुस्ती और पूंजीगत व्यय के कमजोर रहने की बहस पर चर्चा की गई थी। इसमें बताया गया था कि मांग को लेकर अनिश्चितता, वास्तविक मजदूरी में ठहराव और कारोबारी माहौल से जुड़ी चिंताएं निवेश बढ़ने में बाधक मानी जा रही हैं, जबकि नीति-स्तर पर निजी क्षेत्र से आत्ममंथन की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

इस सामग्री में तृतीय-पक्ष की राय शामिल हो सकती है, इस वेबपेज पर कोई भी डेटा और जानकारी हमारे अस्वीकरण के अनुसार निवेश सलाह का गठन नहीं करती है। जबकि हम सख्त संपादकीय अखंडता का पालन करते हैं, इस पोस्ट में हमारे भागीदारों के उत्पादों के संदर्भ शामिल हो सकते हैं।