MOSPI भारत की ज्ञान अर्थव्यवस्था मापने के लिए पांच संकेतक अपनाने की तैयारी में

MOSPI भारत की ज्ञान अर्थव्यवस्था मापने के लिए पांच संकेतक अपनाने की तैयारी में
ज्ञान अर्थव्यवस्था की दिशा में

भारत सरकार सांख्यिकीय ढांचे में ज्ञान आधारित गतिविधियों को अधिक औपचारिक रूप से शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। इस प्रक्रिया के तहत पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन और भौगोलिक संकेतकों का इस्तेमाल कर देश की ज्ञान अर्थव्यवस्था का आकलन करने की तैयारी हो रही है।

हाइलाइट्स

  • MOSPI जल्द ही ज्ञान अर्थव्यवस्था के चार क्षेत्रों के लिए पांच नए संकेतक अपनाने हेतु चर्चा पत्र जारी करेगा, जिसमें NIC 2025 वर्गीकरण में influencers के लिए नई श्रेणी जोड़ी गई है।
  • FY24 में भारत में पेटेंट मंजूरी 1 लाख के पार पहुंची, भौगोलिक संकेत 160 और कॉपीराइट पंजीकरण 38,000 से अधिक हुए, जबकि ट्रेडमार्क FY20 के 2.9 लाख से FY24 में 2.7 लाख पर आ गए।
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के 2022-23 आधार वर्ष और नए क्षेत्रों के समावेशन के साथ साथ आय, प्रवासन और निवेश से जुड़े कई सर्वेक्षणों की तैयारी जारी है।

मापन ढांचे और चर्चा पत्र की तैयारी

Forbes India से बातचीत में MOSPI के सचिव Saurabh Garg ने कहा कि मंत्रालय जल्द ही इस विषय पर एक चर्चा पत्र जारी करने वाला है। उनके अनुसार, ज्ञान अर्थव्यवस्था में चार क्षेत्र शामिल हैं, अनुसंधान एवं विकास, रचनात्मक, साहित्यिक और मनोरंजन गतिविधियां, सॉफ्टवेयर, तथा खनिजों की खोज।

यह कवायद अर्थव्यवस्था में मौजूद डेटा अंतराल को कम करने और विभिन्न सरकारी निकायों की डेटा संबंधी मांगों को पूरा करने के लिए MOSPI के जारी प्रयासों का हिस्सा है। Garg ने कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से मापने और औपचारिक मान्यता देने के लिए मंत्रालय विशेष संकेतक विकसित करने पर भी काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि नए NIC 2025 वर्गीकरण में influencers के लिए अलग आर्थिक गतिविधि जोड़ी गई है। उनके मुताबिक, जब ऐसी गतिविधियां NIC में शामिल होती हैं, तब उन्हें सांख्यिकीय रूप से मापना आसान हो जाता है।

नवाचार संकेतकों और आगामी सर्वेक्षणों का प्रभाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में FY24 में एक लाख से अधिक पेटेंट मंजूर हुए, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और FY20 की तुलना में चार गुना से अधिक है। इसी अवधि में भौगोलिक संकेतकों की संख्या 22 से बढ़कर 160 हो गई, जबकि कॉपीराइट पंजीकरण बढ़कर 38,000 से अधिक हो गए और औद्योगिक डिजाइन 30,000 के पार पहुंच गए।

ट्रेडमार्क इस अवधि में एकमात्र श्रेणी रही जिसमें मामूली गिरावट दर्ज हुई, और यह FY20 के 2.9 लाख से घटकर FY24 में 2.7 लाख रह गया। मंत्रालय का मानना है कि ऐसे संकेतक भारत में नवाचार, सृजनात्मक उत्पादन और बौद्धिक संपदा गतिविधियों के पैमाने को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे।

आगे देखते हुए, मंत्रालय आय सर्वेक्षण, प्रवासन सर्वेक्षण, सहकारी समितियों पर सर्वेक्षण और अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण सहित कई अध्ययनों की तैयारी कर रहा है। सेवा उत्पादन सूचकांक भी तैयार किया जा रहा है, जबकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का आधार वर्ष 2011-12 से 2022-23 किया जा रहा है और अद्यतन सूचकांक मई के अंत तक आने की उम्मीद है।

Garg ने कहा कि IIP में rare earth, renewable energy, water supply, gas और sewage जैसे अधिक क्षेत्रों को शामिल करने से इसकी कवरेज और व्यापक होगी। इससे भारत की औद्योगिक और ज्ञान आधारित आर्थिक गतिविधियों की माप में गहराई बढ़ने की संभावना है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में Skyroot Aerospace के 60 मिलियन डॉलर जुटाकर 1.1 अरब डॉलर वैल्यूएशन के साथ भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बनने और Vikram-I/Vikram-II रॉकेट कार्यक्रम के विस्तार की योजना पर चर्चा की गई थी। लेख में यह भी बताया गया था कि इस फंडिंग से स्थानीय MSME सप्लाई चेन को बल मिलता है, जबकि प्रक्षेपण में संभावित देरी जैसे जोखिमों के बावजूद निवेशक भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष बाजार में दीर्घकालिक अवसर देख रहे हैं।

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