आरबीआई के सरकारी बॉन्ड नीलामी में 6.68% GS 2040 और 7.43% GS 2076 के लिए मजबूत मांग

आरबीआई के सरकारी बॉन्ड नीलामी में 6.68% GS 2040 और 7.43% GS 2076 के लिए मजबूत मांग
सरकारी बॉन्ड्स की भारी मांग

भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों की ताजा नीलामी में दो लंबी अवधि के बॉन्ड के लिए अधिसूचित राशि के मुकाबले कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बोलियां आती हैं। 6.68% GS 2040 के लिए 17,000 करोड़ रुपये और 7.43% GS 2076 के लिए 11,000 करोड़ रुपये की पेशकश पर क्रमश: 62,938 करोड़ रुपये और 29,635 करोड़ रुपये की बोलियां मिलती हैं।

हाइलाइट्स

  • 6.68% GS 2040 के लिए कट-ऑफ मूल्य 96.71, प्रतिफल 7.0530% और आवंटन 16,990.345 करोड़ रुपये के साथ 279 प्रतिस्पर्धी बोलियां मिलीं।
  • 7.43% GS 2076 के लिए कट-ऑफ मूल्य 98.64, प्रतिफल 7.5346% और आवंटन 10,983.189 करोड़ रुपये पर 173 प्रतिस्पर्धी बोलियां प्राप्त हुईं।
  • दोनों प्रतिभूतियों की अधिसूचित राशि पूरी तरह प्राइमरी डीलरों से स्वीकार हुई और कोई डिवॉल्वमेंट नहीं हुआ, बाजार मांग मजबूत रही।

नीलामी के नतीजे और मूल्य निर्धारण

Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 6.68% GS 2040 के लिए कट-ऑफ मूल्य 96.71 और प्रतिफल 7.0530% तय होता है, जबकि भारित औसत मूल्य 96.72 और भारित औसत प्रतिफल 7.0518% रहता है। इस प्रतिभूति में 279 प्रतिस्पर्धी बोलियां प्राप्त होती हैं, जिनमें से 4 स्वीकार की जाती हैं, और 16,990.345 करोड़ रुपये का आवंटन होता है।

7.43% GS 2076 के लिए कट-ऑफ मूल्य 98.64 और प्रतिफल 7.5346% तय होता है, जबकि भारित औसत मूल्य 98.69 और भारित औसत प्रतिफल 7.5307% रहता है। इस बॉन्ड में 173 प्रतिस्पर्धी बोलियां मिलती हैं, 21 स्वीकार की जाती हैं, और 10,983.189 करोड़ रुपये का आवंटन होता है।

आंशिक आवंटन 6.68% GS 2040 में 99.7560% और 7.43% GS 2076 में 12.4095% दर्ज होता है। गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 2040 बॉन्ड के लिए 9.655 करोड़ रुपये और 2076 बॉन्ड के लिए 16.811 करोड़ रुपये की सभी बोलियां स्वीकार की जाती हैं।

बाजार संकेत और प्राइमरी डीलरों पर प्रभाव

उच्च बोली राशि यह संकेत देती है कि निवेशकों की रुचि लंबी अवधि की सरकारी प्रतिभूतियों में बनी रहती है, खासकर 2040 और 2076 जैसी परिपक्वताओं में जहां प्रतिफल स्तर संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहता है। 2040 प्रतिभूति में अधिसूचित राशि के मुकाबले बहुत अधिक मांग अपेक्षाकृत आक्रामक बोली भागीदारी को दिखाती है, जबकि 2076 बॉन्ड में भी पेशकश से काफी अधिक मांग दर्ज होती है।

अंडरराइटिंग के मोर्चे पर दोनों प्रतिभूतियों के लिए अधिसूचित राशि, क्रमश: 17,000 करोड़ रुपये और 11,000 करोड़ रुपये, पूरी तरह प्राइमरी डीलरों से स्वीकार की जाती है। हालांकि, किसी भी प्रतिभूति में प्राइमरी डीलरों पर डिवॉल्वमेंट नहीं होता, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार मांग नीलामी को बिना अतिरिक्त बोझ के समाहित कर लेती है।

हमारी पहले की रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन के पीछे पूंजी की ऊंची लागत और लगभग 7% जोखिम-मुक्त दर की भूमिका पर चर्चा की गई थी। इसमें बताया गया था कि 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड के ऊपर 5-6% जोखिम प्रीमियम जुड़ने से इक्विटी के लिए अपेक्षित रिटर्न बढ़ जाता है, जिससे घरेलू निवेशकों को कमजोर रिटर्न का सामना करना पड़ सकता है और विदेशी पूंजी ऊंचे वैल्यूएशन का लाभ उठा सकती है।

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