मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद बैठक में ईंधन कीमतों और संभावित फेरबदल पर फोकस

मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद बैठक में ईंधन कीमतों और संभावित फेरबदल पर फोकस
मंत्रीमंडल पर बड़े फैसले

केंद्र सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के लगभग दो वर्ष पूरे होने के बीच गुरुवार को मंत्रिपरिषद की अहम बैठक कर रही है, जिसमें शासन, महंगाई और राजनीतिक प्राथमिकताओं की समीक्षा होने की उम्मीद है। बैठक ऐसे समय हो रही है जब घरेलू ईंधन कीमतों पर वैश्विक कच्चे तेल के दबाव बढ़ रहे हैं और BJP संगठनात्मक बदलावों के साथ राज्यसभा रणनीति को भी अंतिम रूप दे रही है।

हाइलाइट्स

  • दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये/लीटर और डीजल 91.58 रुपये/लीटर तक पहुंची, इस सप्ताह औसतन 90 पैसे/लीटर की वृद्धि दर्ज हुई।
  • प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में मंत्रिपरिषद बैठक में ईंधन मूल्य वृद्धि, पश्चिम एशिया तनावजनित आपूर्ति दबाव और अल्पकालिक नीतिगत प्रतिक्रिया चर्चा का केंद्र है।
  • भाजपा जून-नवंबर 2024 में राज्यसभा की 34 रिक्त सीटों, संगठनात्मक फेरबदल और संभावित 15 जून के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव पर सक्रिय विचार-विमर्श कर रही है।

बैठक का एजेंडा और संभावित फैसले

Financial Express के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में शाम करीब 5 बजे मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं, जिसे सरकार के प्रदर्शन और प्राथमिकताओं की मध्यावधि समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल होने वाले हैं।

चर्चा का एक प्रमुख मुद्दा घरेलू ईंधन कीमतों में हालिया तेज बढ़ोतरी रहने वाला है। इस सप्ताह दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया, जबकि देशभर में औसतन करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधानों से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में अल्पकालिक नीतिगत प्रतिक्रिया और जनचिंताओं पर सरकार की संचार रणनीति पर भी विचार होने की संभावना है। यह बैठक प्रधानमंत्री की पांच देशों की यात्रा के समापन के तुरंत बाद हो रही है, जिससे संकेत मिलता है कि आर्थिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को फिर से समन्वित करने की कोशिश की जा रही है।

BJP पुनर्गठन, राज्यसभा गणित और व्यापक असर

BJP नेतृत्व समानांतर रूप से संगठनात्मक फेरबदल पर काम कर रहा है, जिसमें कई राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्तियां शामिल हो सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली, हरियाणा, त्रिपुरा, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में बदलाव पर चर्चा चल रही है, जबकि उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और असम के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी हाल की विचार-विमर्श प्रक्रिया में हिस्सा लिया है।

पार्टी राज्यसभा के लिए संभावित नामों और संगठन में नई जिम्मेदारियों को भी अंतिम रूप दे रही है, जिनसे आगे चलकर केंद्रीय मंत्रालय में पदोन्नति का रास्ता खुल सकता है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में सहयोगी दलों, जैसे TDP, JanaSena और JD(S), के हितों को संतुलित करना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

इस वर्ष जून से नवंबर के बीच राज्यसभा की 34 सीटें रिक्त होने वाली हैं, जिनमें 11 सीटें उत्तर प्रदेश से हैं। भाजपा के पास अभी राज्यसभा में 113 सदस्य हैं, जबकि NDA की कुल संख्या 148 है, जो 245 सदस्यीय सदन में संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से कम है।

पार्टी सूत्र संकेत दे रहे हैं कि कोई बड़ा केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल 15 जून के बाद हो सकता है, जब 'अधिक मास' समाप्त होगा। इससे संगठनात्मक बदलाव, राज्यसभा उम्मीदवारी और मंत्री पदों पर नियुक्तियों को एक साथ समायोजित करने में सहूलियत मिल सकती है, और आने वाले संसदीय तथा चुनावी चरणों से पहले सरकार और पार्टी दोनों के संदेश को स्पष्ट किया जा सकता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद महंगाई और घरेलू खर्च पर पड़ने वाले असर के साथ-साथ इस मुद्दे पर तेज हुए राजनीतिक टकराव को रेखांकित किया गया था। उसमें यह भी बताया गया था कि ऊंचे कच्चे तेल दाम और आयात निर्भरता के कारण आगे चलकर तेल व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे मुद्रास्फीति का जोखिम बना रहता है।

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