दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला, भारत में Google की कीवर्ड विज्ञापन नीति पर असर डाल सकता है

दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला, भारत में Google की कीवर्ड विज्ञापन नीति पर असर डाल सकता है
AdWords नीति पर नया फैसला

भारत के ऑनलाइन विज्ञापन बाजार में एक अहम कानूनी मोड़ आता है, क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय Google के AdWords ढांचे में ट्रेडमार्क वाले कीवर्ड के इस्तेमाल को लेकर Hindware के पक्ष में फैसला देता है। यह आदेश केवल एक ब्रांड विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्च विज्ञापन, प्लेटफॉर्म जवाबदेही और प्रतिस्पर्धी ब्रांड बोली प्रक्रिया पर व्यापक असर डाल सकता है।

हाइलाइट्स

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने Google को Hindware के ट्रेडमार्क 'HINDWARE' को कीवर्ड विज्ञापन में इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया और 30 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया।
  • अदालत ने माना कि कीवर्ड के रूप में पंजीकृत ट्रेडमार्क का उपयोग ट्रेड मार्क्स अधिनियम की धारा 29(6) के तहत विज्ञापन में ट्रेडमार्क उपयोग के समान है।
  • यह फैसला भारत में सर्च विज्ञापन प्लेटफार्मों की ट्रेडमार्क नीतियों, प्रतिस्पर्धी कीवर्ड बोली और ब्रांड सुरक्षा अनुपालन पर व्यापक पुनर्विचार का दबाव बना सकता है।

अदालती आदेश और AdWords मॉडल पर निष्कर्ष

अदालती बयान के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना कि Google ने प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को Hindware के पंजीकृत ट्रेडमार्क “HINDWARE” को Google Ads में कीवर्ड के रूप में खरीदने की अनुमति देकर ट्रेडमार्क अधिकारों का उल्लंघन किया और यह अनुचित वाणिज्यिक व्यवहार है। न्यायमूर्ति Mini Pushkarna ने Google LLC और Google India Private Limited के खिलाफ दायर दो वाणिज्यिक वादों में यह आदेश दिया।

अदालत Google को स्थायी रूप से Hindware के ट्रेडमार्क को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने से रोकती है। साथ ही, कंपनी को कुल 30 लाख रुपये का हर्जाना और वाद व्यय चुकाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें दोनों वादों में 15-15 लाख रुपये दिए गए हैं और भुगतान आठ सप्ताह के भीतर करना है।

मामला 2013 और 2014 में शुरू हुआ था, जब उस समय HSIL Limited के रूप में काम कर रही Hindware ने पाया कि Cera Sanitaryware Limited और उसकी वेब डेवलपर Omkara Infoweb Private Limited ने “HINDWARE” कीवर्ड खरीदा था। इससे Google पर यह विज्ञापन ऊपर दिखते थे जब उपयोगकर्ता उस शब्द को खोजते थे। बाद में ये कंपनियां Hindware के साथ समझौते पर पहुंच गईं, लेकिन Google ने मुकदमे का अंत तक विरोध किया।

अदालत के दस्तावेजों में बताया गया कि Google का AdWords कार्यक्रम विज्ञापनदाताओं को विशेष कीवर्ड आरक्षित करने देता है। जब उपयोगकर्ता उन शब्दों को खोजते हैं, तब सर्च परिणाम पृष्ठ के शीर्ष पर प्रायोजित विज्ञापन दिखते हैं, और Pay-Per-Click मॉडल के तहत भुगतान क्लिक होने पर होता है। अदालत ने खास तौर पर कहा कि भारत में Google की नीति किसी अन्य कंपनी के ट्रेडमार्क को कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने से विज्ञापनदाताओं को नहीं रोकती, जबकि यूरोपीय संघ में इसके लिए अधिक सख्त नियम लागू हैं।

Google की दलीलें खारिज, डिजिटल विज्ञापन क्षेत्र पर असर

Google ने तर्क दिया कि कीवर्ड उपयोग केवल अदृश्य बैकएंड ट्रिगर है और इसे ट्रेडमार्क का उपयोग नहीं माना जाना चाहिए। कंपनी ने यह भी कहा कि कीवर्ड और विज्ञापन सामग्री का चुनाव विज्ञापनदाता करते हैं, जबकि वह केवल मंच उपलब्ध कराती है।

अदालत ने यह बचाव स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति Pushkarna ने कहा कि Google केवल निष्क्रिय मध्यस्थ नहीं है, क्योंकि वह बोली प्रक्रिया चलाती है, विज्ञापन समझौते करती है, नीलामी संचालित करती है और इस प्रक्रिया से राजस्व कमाती है। इसी आधार पर अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत Google की मध्यस्थ सुरक्षा वाली दलील भी खारिज कर दी।

क्षेत्राधिकार को लेकर Google की आपत्ति भी अस्वीकार हुई। अदालत ने कहा कि Google की वेबसाइट और विज्ञापन दिल्ली सहित पूरे भारत में सुलभ हैं, इसलिए कारण-ए-दावा का एक हिस्सा दिल्ली में उत्पन्न होता है और दिल्ली उच्च न्यायालय को मामले की सुनवाई का अधिकार है।

मुख्य ट्रेडमार्क प्रश्न पर अदालत ने माना कि “HINDWARE” जैसे शब्द को कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करना ट्रेड मार्क्स अधिनियम की धारा 29(6) के तहत विज्ञापन में उपयोग के बराबर है, भले ही उपयोगकर्ता उसे सीधे विज्ञापन पाठ में न देखें। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि “HINDWARE” कोई सामान्य शब्द नहीं, बल्कि एक विशिष्ट और प्रसिद्ध ट्रेडमार्क है, जिसे 2017 में भी दिल्ली उच्च न्यायालय एक well-known trademark के रूप में मान्यता दे चुका है।

यह फैसला भारत के डिजिटल विज्ञापन और ब्रांड सुरक्षा ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सर्च विज्ञापन प्लेटफॉर्मों को ट्रेडमार्क वाले कीवर्ड, प्रतिस्पर्धी बोली और विज्ञापन अनुपालन नीतियों की फिर से समीक्षा करनी पड़ सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ब्रांड पहचान और ऑनलाइन ग्राहक अधिग्रहण सीधे सर्च विज्ञापन पर निर्भर करते हैं।

हमारी पिछली रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के उस व्यस्त सप्ताह के फैसलों का सार बताया गया था, जिनका ऑनलाइन गेमिंग, चुनावी प्रक्रिया, प्रतिस्पर्धा नियमन और सार्वजनिक जवाबदेही पर व्यापक असर पड़ता है। इसमें ऑनलाइन गेमिंग में पूरी प्लेयर एंट्री राशि पर GST लागू रखने, चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैध ठहराने और Amazon–Future Coupons मामले में प्रतिस्पर्धा नियमन को अधिक पूर्वानुमेय व निष्पक्ष रखने की जरूरत पर अदालत की टिप्पणियों को रेखांकित किया गया था।

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