भारत का सुप्रीम कोर्ट ऑनलाइन गेमिंग GST को बरकरार रखता है, चुनावी सूची और नियामकीय मामलों पर असर बढ़ता है
गर्मी की छुट्टियों से पहले अपने अंतिम पूर्ण कार्य सप्ताह में भारत का सुप्रीम कोर्ट कई ऐसे मामलों पर फैसला देता है जो ऑनलाइन गेमिंग, चुनावी प्रक्रिया, बैंकिंग और सार्वजनिक नियमन पर व्यापक असर डालते हैं। अदालत का नियमित पूर्ण पीठ कार्य अब 13 जुलाई 2026 से फिर शुरू होना है, जबकि इस सप्ताह के आदेशों से कर दायित्व, अनुपालन और संस्थागत जवाबदेही पर नई स्पष्टता बनती है।
हाइलाइट्स
- सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग में पूरी प्लेयर एंट्री राशि पर GST लागू करने का सरकार का फैसला बरकरार रखते हुए 1.12 लाख करोड़ रुपये की कर मांगों का रास्ता साफ किया।
- Gameskraft, Dream Sports और Delta Corp जैसी 70 से अधिक कंपनियों पर लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का संभावित कर जोखिम अब वैध हुआ, हालांकि मुकदमेबाजी जारी रहने की संभावना है।
- सुप्रीम कोर्ट ने Amazon-Future Coupons पर Competition Commission of India की मंजूरी निलंबन रद्द कर प्रतिस्पर्धा नियमन के पूर्वानुमेय और निष्पक्ष होने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
ऑनलाइन गेमिंग कर विवाद और प्रमुख फैसले
Forbes India के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट सरकार के उस रुख को बरकरार रखता है जिसके तहत ऑनलाइन गेमिंग में खिलाड़ियों द्वारा लगाई गई पूरी राशि पर GST लगाया जाता है, न कि केवल प्लेटफॉर्म शुल्क पर। इस फैसले से 70 से अधिक कंपनियों पर 1.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कर मांगों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता है और कई वर्षों से चल रहा यह विवाद निर्णायक मोड़ पर पहुंचता है।
फैसले का असर Gameskraft, Dream Sports और Delta Corp जैसी कंपनियों पर पड़ता है, जिनके खिलाफ बड़ी कर मांगें पहले से लंबित हैं। Grant Thornton Bharat के पार्टनर मनोज मिश्रा के मुताबिक, यह निर्णय पूरे उद्योग के लिए लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के संभावित कर जोखिम को वैध ठहरा सकता है, हालांकि कारण बताओ नोटिसों और अपीलीय उपायों को लेकर मुकदमेबाजी अभी भी जारी रहने की संभावना है।
27 मई को अदालत चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया, SIR, को भी वैध ठहराती है और कहती है कि सटीक मतदाता सूची स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए बुनियादी है। पीठ यह भी स्पष्ट करती है कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र नहीं है, और संदेह की स्थिति में मामला केंद्र सरकार की सक्षम प्राधिकारी के पास जाना चाहिए।
इसी सप्ताह अदालत Amazon के Future Coupons सौदे में Competition Commission of India और NCLAT के उन आदेशों को रद्द करती है जिन्होंने मंजूरी को निलंबित किया था। पीठ कहती है कि प्रतिस्पर्धा विनियमन पूर्वानुमेय, निष्पक्ष और कानून पर आधारित रहना चाहिए, और घरेलू बाजार की रक्षा का अर्थ केवल घरेलू खिलाड़ियों की रक्षा नहीं है।
नियामकीय जवाबदेही, स्वास्थ्य ढांचा और बैंकिंग पर संकेत
सुप्रीम कोर्ट यह भी कहता है कि ट्रॉमा केयर तक पहुंच संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत करने, हेल्पलाइन को 112 से जोड़ने, ट्रॉमा रजिस्ट्री बनाने, एंबुलेंस मानक सुधारने और 2025 की कैशलेस उपचार योजना को तीन महीने के भीतर लागू करने का निर्देश देती है।खाद्य सुरक्षा कानूनों के कमजोर प्रवर्तन को लेकर सुनवाई के दौरान अदालत केंद्र, FSSAI, CAG और अन्य प्राधिकरणों को नोटिस जारी करती है। याचिका में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कमी, परीक्षण ढांचे की कमजोरी, लाइसेंसिंग अनियमितताओं, कमजोर दंड और निर्णय में देरी जैसे मुद्दे उठाए गए हैं, और अदालत पूछती है कि देशव्यापी प्रदर्शन ऑडिट क्यों न कराया जाए।
State Bank of India से जुड़े एक ऋण वसूली मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए भी अदालत बैंकों की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। पीठ का कहना है कि बड़े कॉरपोरेट उधारकर्ताओं को आसानी से कर्ज मिलता दिखता है, जबकि छोटे उधारकर्ताओं पर अधिक कठोर जांच लागू होती है, और इस मामले में यह भी संदेह उठता है कि ऋण मंजूरी से पहले पर्याप्त आकलन हुआ था या नहीं।
अदालत NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई भी जारी रखती है और NTA, केंद्र तथा CBI से जवाब मांगती है। अलग से, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम चार हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ता V Mohana को शीर्ष अदालत में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश करता है, जब केंद्र अदालत की स्वीकृत न्यायिक संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर चुका है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर प्रकाश डाला गया था जिसमें चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया गया। लेख में अदालत के इस निष्कर्ष का संदर्भ था कि सटीक मतदाता सूची स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए जरूरी है, साथ ही यह भी बताया गया था कि विभिन्न राज्यों में SIR कैसे लागू/जारी है और इसके चुनावी प्रशासन पर क्या व्यापक असर पड़ सकता है।
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