उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा बचत अभियान शुरू किया, टिकाऊ विकास और लागत नियंत्रण पर जोर
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा लागत के दबाव के बीच उत्तराखंड सरकार ने राज्य भर के विभागों के लिए ऊर्जा संरक्षण, ईंधन बचत और टिकाऊ विकास से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह पहल सरकारी दफ्तरों से लेकर परिवहन, पर्यटन, कृषि और निवेश मंजूरी तक प्रशासनिक कामकाज के कई हिस्सों को प्रभावित करती है।
हाइलाइट्स
- उत्तराखंड सरकार ने सभी सरकारी विभागों को ऊर्जा बचत, AC तापमान 24-26°C और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थागत उपायों के निर्देश दिए।
- Visit My State और Made in Uttarakhand अभियानों के तहत स्थानीय पर्यटन, MSME उत्पादों और GI टैग वस्तुओं को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई।
- PM Surya Ghar Yojana तहत रूफटॉप सोलर, ठोस कचरे से CBG और इलेक्ट्रिक वाहन इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार की योजनाओं पर विशेष बल दिया गया।
राज्यव्यापी दिशा-निर्देश और प्रशासनिक बदलाव
FinancialExpress.com के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने सभी विभागों, मंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को ये निर्देश भेजे हैं। सरकार का कहना है कि COVID-19 महामारी के आर्थिक असर, रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसी वैश्विक परिस्थितियों के बीच संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग की जरूरत बढ़ गई है।
नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाएगा। विभागों को बिजली, प्रकाश व्यवस्था और अन्य ऊर्जा-उपयोगी उपकरणों के अनावश्यक इस्तेमाल पर सख्त नियंत्रण, नियमित निगरानी और ऊर्जा संरक्षण पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
ईंधन खपत घटाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और साझा गतिशीलता प्रणालियों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभागों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर अधिक जोर देने, अनावश्यक भौतिक बैठकों को सीमित करने और प्रशासनिक कामकाज को वर्चुअल मंचों पर स्थानांतरित करने को कहा गया है।
सरकार Work From Home, No Vehicle Day, कर्मचारी बस सेवाओं और साइकिल-शेयरिंग प्रणाली को भी बढ़ावा देना चाहती है। साथ ही, उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने और EV चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार की योजना भी इस अभियान का हिस्सा है।
पर्यटन, स्थानीय उद्योग और हरित निवेश पर असर
दिशा-निर्देशों में टिकाऊपन को स्थानीय आर्थिक वृद्धि के साथ जोड़ा गया है। Visit My State और Holiday in India अभियान के जरिए धार्मिक, सांस्कृतिक, ग्रामीण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना है, जबकि डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली लाने का प्रस्ताव रखा गया है।सरकार का मानना है कि स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने से लंबी दूरी की यात्रा और ईंधन खपत कम हो सकती है, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलेगा। इसी क्रम में Made in Uttarakhand अभियान के तहत MSME और स्वयं सहायता समूहों को Amazon Karigar और Flipkart Samarth जैसे मंचों तक पहुंच दिलाने, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और GI-टैग वस्तुओं को बढ़ावा देने की योजना है।
कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और बायो-इनपुट आधारित पद्धतियों पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को Natural Farming और Zero Budget Farming का प्रशिक्षण देने तथा FPOs और सहकारी समितियों के माध्यम से Bio-input Resource Centres स्थापित करने की तैयारी है।
ऊर्जा मोर्चे पर विभागों को PNG, LPG और सौर ऊर्जा के प्रसार, खासकर PM Surya Ghar Yojana के तहत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश मिले हैं। शहरी स्थानीय निकायों और विभागों से Compressed Bio Gas परियोजनाओं में तेजी लाने और ठोस कचरे से CBG उत्पादन की संभावनाएं तलाशने को कहा गया है, जबकि खनन, सौर ऊर्जा और अन्य बड़े निवेश प्रस्तावों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती ईंधन कीमतों की पृष्ठभूमि में राज्यों द्वारा ईंधन खपत व प्रशासनिक खर्च घटाने के कदमों पर चर्चा की गई थी। इसमें वीआईपी काफिलों का आकार कम करने, सरकारी यात्राएं सीमित करने और वर्क फ्रॉम होम व वर्चुअल बैठकों को फिर से प्राथमिकता देने जैसे उपायों को रेखांकित किया गया था।
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