भारत ने चीनी निवेश पर चयनात्मक रुख दोहराया, RCEP में शामिल होने से किया इनकार
मुंबई में वित्तीय क्षेत्र के एक प्रमुख आयोजन के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत वांछनीय क्षेत्रों में चीन सहित पड़ोसी देशों से निवेश के लिए खुला है। उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी सरकार के RCEP में शामिल होने की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि इससे रणनीतिक और विनिर्माण संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।
हाइलाइट्स
- पीयूष गोयल ने कहा कि भारत स्थल सीमा वाले देशों से निवेश को लेकर चयनात्मक है, संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी जारी रहेगी; Press Note 2 (2026) के जरिए 10% से कम हिस्सेदारी को कुछ छूट मिली।
- भारत ने RCEP में शामिल होने से दोबारा इनकार किया, गोयल ने कहा कि इस व्यापार समूह की संरचना भारतीय उद्योग और विनिर्माण के लिए हानिकारक हो सकती थी।
- सरकार ने कुल 200 हितधारक परामर्श किए, जिनमें सिर्फ तीन ने RCEP समर्थन किया; उद्योग, किसान और अन्य वर्गों ने व्यापार असंतुलन पर गहरी चिंता जताई।
निवेश नियमों और व्यापार नीति पर सरकार का रुख
Financial Express के अनुसार, पीयूष गोयल ने Financial Express Best Banks Awards 2026 में कहा कि भारत चीन से निवेश का विरोध नहीं करता, बशर्ते वह अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम न बने और रणनीतिक परिसंपत्तियों के अवसरवादी अधिग्रहण का माध्यम न हो। उन्होंने कहा कि सरकार सभी देशों से निवेश को प्रोत्साहित करती है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतना जरूरी है।
गोयल ने कहा कि 2020 की Press Note 3 केवल चीन के लिए नहीं, बल्कि भारत के साथ स्थल सीमा साझा करने वाले सभी देशों पर लागू होती है। उनके मुताबिक यह ढांचा आर्थिक दबाव के दौर में कम कीमत पर परिसंपत्तियों के अधिग्रहण को रोकने के लिए बनाया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि 2026 की Press Note 2 के जरिए हाल में नियमों में संशोधन किया गया है, जिसके तहत 10 प्रतिशत तक की लाभकारी स्वामित्व हिस्सेदारी स्वतः इस दायरे में नहीं आती। गोयल ने दोहराया कि पाकिस्तान को छोड़कर भारत स्थल सीमा वाले देशों से निवेश के खिलाफ नहीं है।
चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर गोयल ने कहा कि निष्कर्ष निकालने से पहले आयात की प्रकृति को समझना जरूरी है। उनके अनुसार नीति निर्माताओं को यह देखना चाहिए कि भारत चीन से किन उत्पादों का आयात करता है और उनका घरेलू अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।
RCEP पर सख्त विरोध और उद्योग की आशंकाएं
गोयल ने 15 देशों वाले एशिया-प्रशांत व्यापार समूह RCEP पर सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इसकी बुनियादी संरचना में ऐसी कठिनाइयां हैं जिनका वह विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की बिल्कुल कोई संभावना नहीं है और निकट भविष्य में भी भारत के इसमें शामिल होने की उन्हें उम्मीद नहीं दिखती।मंत्री ने सवाल उठाया कि भारत ने मूल रूप से RCEP वार्ताओं में प्रवेश ही क्यों किया, जबकि उसके पास पहले से ASEAN के 10 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते थे और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी वार्ता काफी आगे बढ़ चुकी थी। उन्होंने कांग्रेस पर चीन से जुड़े व्यापारिक ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार ठहराया और इसे गैरजिम्मेदार रणनीति बताया।
गोयल के अनुसार, यदि भारत RCEP में शामिल होता तो घरेलू विनिर्माण पर गंभीर असर पड़ सकता था और सस्ते आयात से भारतीय उद्योग कमजोर हो सकता था। उन्होंने कहा कि जून 2019 में वाणिज्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद सरकार ने देशभर में 200 हितधारक परामर्श किए, जिनमें केवल तीन ने RCEP में शामिल होने का समर्थन किया।
उनके मुताबिक उद्योग, किसान और अन्य हितधारक इस बात से चिंतित थे कि व्यापार समूह में शामिल होने से भारतीय उत्पादकों पर अनुचित प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ेगा और व्यापार असंतुलन और गहरा होगा। मुंबई में 7 जून को आयोजित इस पुरस्कार समारोह में बैंक, NBFC, स्मॉल फाइनेंस बैंक और fintech क्षेत्र की संस्थाओं को सम्मानित किया गया, जहां गोयल ने व्यापक व्यापार और निवेश नीति पर सरकार का मौजूदा दृष्टिकोण सामने रखा।
हमारी पिछली रिपोर्ट में FY26 के अनंतिम जीडीपी अनुमान और Q4 के 7.8% ग्रोथ प्रिंट का सार सामने रखा गया था, जिसमें पूरे वित्त वर्ष के लिए 7.7% वास्तविक जीडीपी वृद्धि और 7.9% वास्तविक जीवीए का अनुमान शामिल था। उस विश्लेषण में सेवाओं व विनिर्माण जैसी प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती के साथ-साथ पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी ऊर्जा कीमतों और El Niño/कमजोर मानसून को FY27 के लिए प्रमुख डाउनसाइड जोखिम के तौर पर रेखांकित किया गया था।
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