Ashutosh Sureka

पश्चिम बंगाल में 635 करोड़ रुपये के विज्ञापन लेनदेन की जांच, ममता बनर्जी पर कानूनी और राजनीतिक दबाव बढ़ा

पश्चिम बंगाल में 635 करोड़ रुपये के विज्ञापन लेनदेन की जांच, ममता बनर्जी पर कानूनी और राजनीतिक दबाव बढ़ा
बंगाल विज्ञापन घोटाला जांच

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी पर वित्तीय, कानूनी और राजनीतिक मोर्चों से दबाव बढ़ रहा है। 635 करोड़ रुपये के संदिग्ध विज्ञापन लेनदेन की जांच उनकी पार्टी के भीतर बढ़ते विद्रोह और चुनावी भाषणों को लेकर दर्ज नई शिकायतों के बीच सामने आई है।

हाइलाइट्स

  • पश्चिम बंगाल सरकार ने उज्ज्वल सिन्हा की कोलकाता आधारित विज्ञापन कंपनी से जुड़े 635 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की।
  • मामले को सार्वजनिक धन के दुरुपयोग व धनशोधन की संभावित जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को भेजने की संभावना है।
  • तृणमूल कांग्रेस में असंतोष गहराया, कम से कम 19 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को अलग रुख की सूचना दी और औपचारिक विभाजन के संकेत मिले।

विज्ञापन लेनदेन जांच और कानूनी कार्रवाई

Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की नई BJP नीत सरकार कोलकाता की एक विज्ञापन कंपनी से जुड़े करीब 635 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच शुरू करती है, जिसे कारोबारी उज्ज्वल सिन्हा से जुड़ा बताया जाता है और जिनके ममता बनर्जी के राजनीतिक दायरे से करीबी संबंध होने की बात कही जाती है। अधिकारियों के अनुसार, कंपनी से जुड़े तीन बैंक खातों के जरिये करीब 20 बड़े वित्तीय लेनदेन की जांच हो रही है और यह देखा जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में यह रकम कैसे स्थानांतरित हुई।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार इस मामले को सार्वजनिक धन के संभावित दुरुपयोग के रूप में देखती है। मामले को आगे धनशोधन से जुड़े संभावित उल्लंघनों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को भेजे जाने की संभावना भी बताई जाती है।

जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या ममता बनर्जी के कार्यकाल में दिए गए सरकारी ठेकों के जरिये राज्य के धन को विज्ञापन और प्रचार खर्च के माध्यम से गलत तरीके से प्रवाहित किया गया। यदि वित्तीय अनियमितता के प्रमाण सामने आते हैं, तो जांच राज्य ठेकों, सरकारी खर्च के पैटर्न और धनशोधन निरोधक कानूनों के संभावित उल्लंघनों तक फैल सकती है।

इसी बीच, ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में चुनावी सभा के दौरान कथित सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर एक नई पुलिस शिकायत भी दर्ज हुई है। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि शिकायत पहले जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज हुई और अब आगे की जांच के लिए इसे हेयर स्ट्रीट थाने को स्थानांतरित किया गया है। मई में सिलीगुड़ी में भी चुनावी अवधि के दौरान कथित घृणा भाषण को लेकर उनके खिलाफ एक अलग मामला दर्ज किया गया था।

तृणमूल कांग्रेस में बढ़ता विद्रोह और राजनीतिक असर

ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आते हैं जब तृणमूल कांग्रेस हाल के वर्षों के अपने सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक का सामना करती है। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर इस्तीफों और वरिष्ठ नेताओं के असंतोष की लहर तेज होती है।

कम से कम 19 असंतुष्ट सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपने अलग रुख की औपचारिक सूचना दे चुके हैं। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं, जो पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाते दिखते हैं।

विद्रोह को और बल तब मिला जब काकोली घोष दस्तिदार ने हाल में संकेत दिया कि करीब 20 सांसदों के समूह ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग को लेकर संसदीय अधिकारियों से संपर्क किया है। इस कदम को तृणमूल कांग्रेस में संभावित औपचारिक विभाजन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले हफ्तों में और वरिष्ठ नेताओं के अलग होने की अटकलें तेज होती हैं।

पश्चिम बंगाल के नए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता की नियुक्ति और राज्य की आर्थिक चुनौतियों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि धीमी वृद्धि, कम प्रति व्यक्ति आय और निवेश की कमी के बीच उनके सामने राजकोषीय अनुशासन कायम रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। उस लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि बिना नए कर लगाए राजस्व बढ़ाना, अनुत्पादक खर्च घटाना और निजी निवेश आकर्षित करना उनके एजेंडे का केंद्र होगा, जिसकी असली परीक्षा पहले बजट में दिखेगी।

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