नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा ने वाणिज्यिक परिचालन शुरू किया, दिल्ली-एनसीआर की विमानन और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ी
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती हवाई यात्रा मांग के बीच जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा सोमवार से वाणिज्यिक परिचालन शुरू करता है। इस शुरुआत के साथ क्षेत्र को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के अलावा दूसरा बड़ा हवाईअड्डा मिलता है, जिससे यात्रा, माल ढुलाई, रियल एस्टेट और औद्योगिक विकास को नया आधार मिलने की उम्मीद है।
हाइलाइट्स
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने 1.2 करोड़ सालाना यात्री क्षमता के साथ परिचालन शुरू किया, IndiGo पहली एयरलाइन बनी।
- पहले चरण की लागत 11,200 करोड़ रुपये रही, दीर्घकालिक योजना में यात्री क्षमता 7 करोड़ से अधिक करने का लक्ष्य है।
- हवाईअड्डे के शुरू होने के बाद 2020 से क्षेत्र में अपार्टमेंट की कीमतें तीन गुना हुईं, 2027 तक 22-28 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान।
शुरुआती परिचालन और विस्तार योजना
Forbes India के अनुसार, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहली निर्धारित उड़ान IndiGo की लखनऊ से सुबह करीब 8 बजे पहुंचती है, जबकि शुरुआती यात्रियों में उन लगभग 170 किसानों को शामिल किया जाता है जिनके परिवारों ने परियोजना के लिए जमीन दी थी। इसके तुरंत बाद लखनऊ के लिए एक और IndiGo उड़ान रवाना होती है, जिसमें किसान, स्थानीय अधिकारी और जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह शामिल होते हैं, जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में भाग लेते हैं।IndiGo हवाईअड्डे से परिचालन शुरू करने वाली पहली एयरलाइन बनती है। एयरलाइन जेवर को 16 से अधिक शहरों से जोड़ने की योजना बताती है, जिनमें बेंगलुरु, हैदराबाद, जम्मू, चंडीगढ़, जयपुर, अमृतसर, देहरादून, धर्मशाला और लखनऊ के साथ Pantnagar, Bareilly और Kishangarh जैसे छोटे शहर भी शामिल हैं। कंपनी के मुख्य रणनीति अधिकारी Aloke Singh कहते हैं कि यह नेटवर्क टियर-2 और टियर-3 शहरों को बड़े महानगरों से एक-स्टॉप कनेक्टिविटी देने में मदद करता है।
Akasa Air मंगलवार से बेंगलुरु और नवी मुंबई के लिए दैनिक उड़ानों के साथ परिचालन शुरू करने वाली है। वहीं Air India Express, जिसे शुरुआती उड़ान संचालकों में शामिल होना था, व्यापक लागत कटौती के तहत अपनी योजना अनिश्चितकाल के लिए रोकती है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू कहते हैं कि हवाईअड्डा आगे चलकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों का केंद्र बनता है। शुरुआती चरण में इसकी सालाना क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की है और इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाना है।
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र पर आर्थिक असर
यह ग्रीनफील्ड हवाईअड्डा सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत Yamuna International Airport Private Limited द्वारा विकसित किया जाता है। Flughafen Zürich AG की इकाई Zurich Airport International ने नवंबर 2019 में विकास और संचालन का ठेका जीता था, जबकि जून 2022 में Tata Projects को पहले चरण के सिविल निर्माण का अनुबंध मिला। कई देरी के बाद शुरू हुए इस पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल है, जो सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकता है, जबकि दीर्घकालिक योजना क्षमता को 7 करोड़ से अधिक तक ले जाने की है।पहले चरण की लागत 11,200 करोड़ रुपये रही। उड़ान परिचालन पहले सितंबर 2024 में शुरू होना था, जिसे बाद में अक्टूबर 2025 तक टाला गया। परियोजना पर बातचीत 2001 में शुरू हुई थी, जुलाई 2017 में साइट क्लीयरेंस मिला और नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री ने इसकी आधारशिला रखी। मार्च में उद्घाटन के बाद वाणिज्यिक परिचालन की समयसीमा पर सवाल भी उठे थे, क्योंकि BCAS ने भारतीय ग्रीनफील्ड हवाईअड्डों में गैर-भारतीय CEO नियुक्ति से जुड़े सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद Christoph Schnellmann पद छोड़ते हैं और Nitu Samra कार्यभार संभालती हैं।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानें आने वाले महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल यात्रियों के लिए टैक्सी, ऐप-आधारित कैब और दिल्ली-एनसीआर तथा उत्तर भारत के अन्य शहरों के लिए बस सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि मेट्रो और रेल संपर्क अभी योजनाबद्ध हैं।
हवाईअड्डे से यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और औद्योगिक परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म Square Yards की एक रिपोर्ट कहती है कि 2020 के बाद से इलाके में अपार्टमेंट की कीमतें लगभग तीन गुना हो चुकी हैं, जबकि कुछ हिस्सों में जमीन के दाम तेज बढ़े हैं; रिपोर्ट 2027 तक आवासीय कीमतों में 22 से 28 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान लगाती है। M3M Noida के निदेशक Yash Garg और AU Real Estate के निदेशक Ashish Agarwal का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी, कारोबारी आकर्षण और रोजगार सृजन के साथ यह हवाईअड्डा नोएडा के रियल एस्टेट, कार्यालय और निवेश बाजार को मजबूत करता है।
आगे और परिवहन संपर्कों की भी योजना बन रही है। केंद्र और National Highways Authority of India दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और जेवर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए संभावित सुरंग नेटवर्क का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में IndiGo के खिलाफ पुडुचेरी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के आदेश पर चर्चा की गई थी, जिसमें जुलाई 2023 की देरी से प्रभावित उड़ान के मामले में एक बुजुर्ग दंपति को सेवा में कमी के लिए कुल 1.2 लाख रुपये (मुआवजा और वाद व्यय सहित) देने को कहा गया। लेख में बताया गया था कि लंबी देरी के दौरान समय पर सूचना, पर्याप्त सहायता और यात्रियों के लिए उचित आराम न उपलब्ध कराना आयोग के अनुसार परिचालन विफलता और सेवा में कमी के दायरे में आता है।
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