RBI ने वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर AI निवेश और NBFI जोखिमों को प्रमुख खतरा बताया
पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरुआती झटके के बाद वैश्विक बाजारों में आई रिकवरी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने चेतावनी दी है कि AI से जुड़ा निवेश उत्साह अब वित्तीय स्थिरता के लिए नई नाजुकता पैदा कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने साथ ही कहा कि भारत की घरेलू वित्तीय प्रणाली अब भी लचीली बनी हुई है, हालांकि फंडिंग लागत, विदेशी पोर्टफोलियो निकासी और गोल्ड लोन की तेज वृद्धि पर निगरानी जरूरी है।
हाइलाइट्स
- RBI की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में S&P 500 रिटर्न का लगभग 50% केवल पांच AI-केंद्रित शेयरों से आया, जिससे बाजार में संकेंद्रण का जोखिम बढ़ा।
- गैर-बैंक वित्तीय मध्यस्थ (NBFI) वैश्विक स्तर पर बैंकों की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहे हैं, जिससे वित्तीय अस्थिरता और संकट का खतरा गहरा रहा है।
- 2024 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से रिकॉर्ड $30.7 अरब निकाले हैं, तथा गोल्ड लोन 40% से अधिक वार्षिक दर से बढ़ते हुए सबसे बड़ा गैर-आवासीय रिटेल ऋण खंड बन गए हैं।
जून स्थिरता रिपोर्ट में वैश्विक जोखिम
Forbes India के अनुसार, RBI की जून वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक बाजारों की मजबूती का बड़ा हिस्सा AI से जुड़ी कंपनियों के प्रति उत्साह पर टिका है, जबकि यह तेजी कुछ चुनिंदा शेयरों में अत्यधिक संकेंद्रण भी बना रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, U.S. में इस साल S&P 500 के रिटर्न का लगभग आधा हिस्सा सिर्फ पांच शेयरों से आया है, जबकि कोरिया और ताइवान में भी दो-दो कंपनियों ने बाजार प्रदर्शन में बड़ी हिस्सेदारी दी है।RBI का कहना है कि यह रुझान व्यापक आर्थिक मजबूती के बजाय सीमित कंपनियों की असाधारण बढ़त को दिखाता है, जिससे बिकवाली की स्थिति में बड़े बाजारों में गिरावट और दूसरे बाजारों में भी असर फैलने का खतरा बढ़ता है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि AI निवेश का दबाव अब बॉन्ड बाजार तक पहुंच रहा है, जहां बड़े क्लाउड सेवा प्रदाता AI अवसंरचना पर पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए ज्यादा कर्ज उठा रहे हैं।
रिपोर्ट में Microsoft, Meta, Google, Nvidia, Amazon और Anthropic जैसी कंपनियों का उल्लेख है, जिन्होंने पिछले दो वर्षों में कर्ज निर्गम बढ़ाया है। RBI के मुताबिक, यदि AI-प्रेरित परिसंपत्ति मूल्यों में सुधार आता है, तो निजी ऋण फर्मों और अन्य मध्यस्थों के जरिये बैंकों का परोक्ष जोखिम भी प्रणालीगत दबाव में बदल सकता है।
भारत की स्थिति और उभरते दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, गैर-बैंक वित्तीय मध्यस्थ, या NBFI, वैश्विक स्तर पर बैंकिंग क्षेत्र की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं, जिससे बाजार झटकों के बढ़ने और अस्थिरता के वित्तीय संकट में बदलने का जोखिम बढ़ता है। हेज फंडों की संप्रभु बॉन्ड और ब्याज दर डेरिवेटिव में हिस्सेदारी 2020 के 9 ट्रिलियन डॉलर से कम स्तर से बढ़कर 2025 में 18 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गई है, और उच्च लीवरेज वाली आर्बिट्राज रणनीतियां तनाव के समय तेज अनवाइंडिंग का खतरा पैदा करती हैं।RBI ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के बाद कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड यील्ड 20 साल के उच्च स्तर तक पहुंची है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची ऊर्जा कीमतों से जुड़ा मुद्रास्फीति दबाव, केंद्रीय बैंक दर वृद्धि की अपेक्षाएं, लगातार राजकोषीय घाटे, बढ़ा बॉन्ड निर्गम, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग इस दबाव को बढ़ा रहे हैं।
घरेलू मोर्चे पर RBI का आकलन अपेक्षाकृत आश्वस्त करने वाला है। भारत के बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी पर्याप्तता मजबूत बनी हुई है, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां घटी हैं, और 19 जून तक 672.6 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी वित्तपोषण जरूरतों को आराम से कवर करता है।
फिर भी, रिपोर्ट कहती है कि फंडिंग अब एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभर रही है, क्योंकि बैंकों का फंडिंग मिश्रण कम लागत वाले चालू और बचत जमा से महंगे सावधि जमा की ओर खिसक रहा है। इसी बीच, इस वर्ष विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से रिकॉर्ड 30.7 अरब डॉलर निकाले हैं, जिससे घरेलू शेयरों में उनकी हिस्सेदारी दो दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
RBI ने गोल्ड लोन की तेज वृद्धि पर भी ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड लोन 40 प्रतिशत से अधिक वार्षिक दर से बढ़ रहे हैं, मुख्य रूप से ऊंची सोने की कीमतों का उपयोग कर रहे मौजूदा उधारकर्ताओं के कारण, और यह श्रेणी गैर-आवासीय रिटेल ऋणों में सबसे बड़ा खंड बन चुकी है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में Microsoft के शेयर में तेज गिरावट और AI से जुड़े पूंजीगत खर्च को लेकर बढ़ी चिंताओं पर चर्चा की गई थी। लेख में बताया गया था कि Copilot AI टूल से जुड़े कानूनी/नियामकीय जोखिमों के साथ-साथ भारी AI निवेश और मोनेटाइजेशन अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया, जिससे शेयर प्रमुख तकनीकी स्तरों के नीचे बना रहा।
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