भारत एंटरप्राइज AI प्रतिभा में वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर, GCC मॉडल उन्नयन पर जोर

भारत एंटरप्राइज AI प्रतिभा में वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर, GCC मॉडल उन्नयन पर जोर
AI में भारत की बढ़त

नई दिल्ली में उद्योग-सरकार सहयोग पर आयोजित CII GCC Business Summit 2026 में भारत के Global Capability Centres की बदलती भूमिका को अर्थव्यवस्था की एक अहम संरचनात्मक उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि देश अब एंटरप्राइज AI प्रतिभा का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र है, जबकि AI के बढ़ते इस्तेमाल से पुराने GCC मॉडल के कुछ हिस्सों पर दबाव भी बन रहा है।

हाइलाइट्स

  • भारत में 1,800-2,100 से अधिक GCC कार्यरत हैं, 20 लाख पेशेवरों को रोजगार देते हैं, और $64 अरब राजस्व के साथ GDP में 2 प्रतिशत योगदान करते हैं।
  • AI और डेटा क्षेत्र में गहरे तकनीकी कौशल की बदौलत कई वैश्विक कंपनियों के निर्णय अब भारत स्थित केंद्रों से लिए जा रहे हैं, जैसे Merck के बेंगलुरु परिसर में 3,300 पेशेवर कार्यरत हैं।
  • सरकार ने 2024 के बजट में GCC के लिए transfer-pricing safe harbour उपायों को सरल और व्यापक बनाया तथा Tier II और III शहरों तक विस्तार को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया।

GCC क्षेत्र का पैमाना और क्षमता आधारित बदलाव

Forbes India के अनुसार, मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि भारत के GCC अब कम लागत वाले बैक-ऑफिस ढांचे से आगे बढ़कर गहरी तकनीकी क्षमता वाले केंद्र बन चुके हैं। उनके मुताबिक इन केंद्रों में वास्तविक बौद्धिक संपदा बन रही है, पेटेंट यहीं दाखिल हो रहे हैं और उत्पाद यहीं से भेजे जा रहे हैं, जबकि भारत में आधारित पेशेवर वैश्विक नेतृत्व भूमिकाएं भी तेजी से संभाल रहे हैं।

नागेश्वरन ने कहा कि भारत में 1,800 से अधिक GCC हैं, जबकि कुछ उद्योग आकलन यह संख्या 2,100 से ऊपर बताते हैं, और यह क्षेत्र 20 लाख से अधिक पेशेवरों को रोजगार देता है। GCC राजस्व 64 अरब डॉलर से ऊपर जा चुका है और यह क्षेत्र अब भारत के GDP में लगभग 2 प्रतिशत योगदान दे रहा है, जबकि दुनिया के कुल GCC में लगभग आधे भारत में स्थित हैं।

उनके अनुसार इस क्षेत्र की स्थिरता अब लागत पर नहीं, बल्कि क्षमता पर टिकी है। उन्होंने कहा कि कंपनियां भारत में पहले लागत के कारण आई थीं, लेकिन टिके रहने का कारण कौशल, इंजीनियरिंग, डिजाइन, अनुसंधान और उत्पाद विकास की बढ़ती गहराई रही, जहां कई वैश्विक कंपनियों में महत्वपूर्ण फैसले अब भारत स्थित केंद्रों से लिए जा रहे हैं।

उन्होंने Merck के नए बेंगलुरु परिसर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां डेटा, AI और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी में 3,300 पेशेवर कार्यरत हैं। यह केंद्र Merck की वैश्विक डिजिटल क्षमता का सबसे बड़ा संकेंद्रण बन गया है और भारत अब Germany, the U.S. और China के बाद कंपनी का चौथा सबसे बड़ा कार्यबल केंद्र है।

AI व्यवधान, नीति समर्थन और रोजगार प्रभाव

नागेश्वरन ने माना कि AI स्वचालन से वही नियमित और नियम-आधारित काम सबसे अधिक प्रभावित होता है, जिस पर GCC मॉडल की शुरुआती नींव खड़ी थी। हालांकि उन्होंने कहा कि भारत के केंद्र अब मुख्य रूप से उसी काम तक सीमित नहीं हैं, और जो केंद्र ऊंचे मूल्य वाले कार्यों, डिजाइन, परिनियोजन और शासन की दिशा में बढ़ेंगे, वे आगे फलेंगे-फूलेंगे।

उन्होंने कहा कि AI स्वयं को न तो बनाता है, न तैनात करता है और न ही नियंत्रित करता है, इसलिए इन प्रणालियों को डिजाइन करने, उनके उपयोग की सीमाएं तय करने और विफलता की जिम्मेदारी लेने के लिए मानव निर्णय जरूरी रहेगा। उनके मुताबिक अच्छी तरह संचालित केंद्रों में AI हर कर्मचारी के काम का मूल्य बढ़ाता है और काम का दायरा सिमटने के बजाय फैल रहा है, जिसका बड़ा और बढ़ता हिस्सा भारत में किया जा रहा है।

नीतिगत मोर्चे पर उन्होंने इस वर्ष के बजट में GCC के लिए transfer-pricing safe harbour को सरल और व्यापक बनाने, एक समान मार्जिन, ऊंची सीमा और तेज, अधिक पूर्वानुमेय मंजूरी जैसे उपायों का उल्लेख किया। उन्होंने Tier II और III शहरों तक GCC विस्तार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ढांचे का भी जिक्र किया, लेकिन साथ ही कहा कि सरकार केवल आधारभूत ढांचा तैयार कर सकती है, संचालन उद्योग को ही करना होगा।

उन्होंने कौशल अंतर को एक प्रमुख बाधा बताया और कहा कि कुछ आकलनों के अनुसार भारत के आधे से कम स्नातक पहले दिन से नौकरी के लिए तैयार होते हैं। बढ़ती लागत, विशेषज्ञ प्रतिभा की कमी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी उन्होंने जोखिम बताया, जबकि यह भी कहा कि GCC नौकरियां पारंपरिक सेवा भूमिकाओं की तुलना में अधिक वेतन देती हैं, गहरे कौशल की मांग करती हैं, प्रतिभा को देश में बनाए रखती हैं और महिलाओं तथा छोटे शहरों के पेशेवरों के लिए अवसर बढ़ाती हैं।

हमारे पिछले कवरेज में ServiceNow (NOW) के स्टॉक में गिरावट और इसके पीछे का तकनीकी सेटअप केंद्र में था, जहां कीमत प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे और $108.37 के रेजिस्टेंस के आसपास दबाव में दिखी। उसी लेख में यह भी बताया गया था कि कंपनी सरकार व रक्षा जैसे नियंत्रित क्षेत्रों में AI-आधारित पहलों और साझेदारियों के जरिए विस्तार कर रही है, लेकिन निकट अवधि में मोमेंटम संकेत मिश्रित बने हुए हैं।

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