Nasscom का कहना है, AI से भारतीय IT नौकरियां बदलती हैं, खत्म नहीं होतीं
भारतीय IT-ITeS क्षेत्र में बड़े पैमाने पर AI अपनाने और agentic AI आधारित automation को लेकर रोजगार पर दबाव की चिंता बनी हुई है। Nasscom के अनुसार उद्योग में काम की प्रकृति तेजी से बदल रही है, लेकिन उद्यमों में AI लागू करने, legacy systems के आधुनिकीकरण और नए software निर्माण से रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं।
हाइलाइट्स
- FY26 में भारतीय IT सेवाओं का उद्योग 6.1 प्रतिशत बढ़ता है, जबकि रोजगार वृद्धि 2.3 प्रतिशत रहती है, राजस्व-हायरिंग संबंध कमजोर पड़ता दिखाई देता है।
- AI प्रशिक्षण अब तक करीब 13 लाख कर्मचारियों को मिल चुका है और entry-level प्रतिभा AI-fluent होती जा रही है, जबकि middle layer पर बदलाव का दबाव है।
- भारत में 2,117 GCCs हैं और औसतन हर सप्ताह दो नए केंद्र जुड़ते हैं, जिनमें अब engineering design और AI agenda ownership जैसे उच्च-मूल्य कार्य होते हैं।
AI अपनाने, भर्ती और कौशल बदलाव
Forbes India के अनुसार, Nasscom के अध्यक्ष Rajesh Nambiar कहते हैं कि भारतीय IT सेवाओं की कंपनियों के लिए AI अवसर का दायरा बढ़ा रहा है, भले ही बाजार की अनिश्चितता और शेयरों में दबाव बना हुआ है। उनके अनुसार enterprise स्तर पर AI अभी संचालन मॉडल को पूरी तरह नहीं बदलता, लेकिन legacy code modernization, context-based programming और human-in-the-loop deployment जैसे क्षेत्रों में भारतीय tech services कंपनियों की भूमिका मजबूत होती है।Nambiar के मुताबिक FY26 में उद्योग 6.1 प्रतिशत बढ़ता है, जबकि रोजगार वृद्धि 2.3 प्रतिशत रहती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राजस्व और हायरिंग के बीच पुराना सीधा संबंध कमजोर पड़ रहा है। उनका कहना है कि automation दोहराए जाने वाले कार्यों को बदलती है, पूरी नौकरियों को नहीं, जबकि कई कंपनियां नई जरूरतों के मुताबिक अपनी workforce और hiring mix को फिर से तैयार कर रही हैं।
उनके अनुसार सभी कर्मचारियों को reskill करना संभव नहीं है और कुछ लोग इस बदलाव के साथ कदम नहीं मिला पाते, लेकिन उद्योग अब भी शुद्ध रोजगार वृद्धि पैदा करता है। Nasscom का कहना है कि करीब 60 लाख कर्मचारियों वाले इस क्षेत्र में लगभग 13 लाख लोग AI प्रशिक्षण पा चुके हैं, जबकि entry-level प्रतिभा का बड़ा हिस्सा अब AI-fluent बनने की दिशा में है और middle layer के कर्मचारियों पर बदलाव का दबाव ज्यादा दिखता है।
GCC, निवेश रणनीति और वैश्विक बाजार प्रभाव
Nambiar का कहना है कि AI क्षमता बढ़ाने के लिए acquisition और organic build-out, दोनों रास्ते खुले हैं, और कंपनियां तकनीकी बदलाव की रफ्तार देखते हुए अधिक inorganic growth पर भी विचार कर रही हैं। उनके अनुसार भारत को AI value chain की कई परतों, जैसे infrastructure, semiconductors, data, applications और talent, सभी में मौजूद रहना चाहिए, हालांकि हर परत में नेतृत्व की भूमिका समान नहीं होगी।उन्होंने कहा कि data centres जरूरी हैं, लेकिन वे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का साधन नहीं बनते, जबकि services और GCC मॉडल अपेक्षाकृत अधिक मूल्य और कौशल-आधारित अवसर दे सकते हैं। भारत दुनिया का 20 प्रतिशत data पैदा करता है, लेकिन केवल 2 प्रतिशत host करता है, इसलिए data localisation, latency और data sovereignty जैसे मुद्दे enterprise demand को प्रभावित करते रहते हैं।
GCC विस्तार पर Nasscom का कहना है कि भारत में 2,117 GCCs हैं और औसतन हर सप्ताह दो नए केंद्र जुड़ते हैं, जबकि पिछले वर्ष 109 GCCs जुड़े थे। Nambiar के अनुसार इन केंद्रों में अब केवल back-office काम नहीं, बल्कि engineering design, innovation और parent companies के लिए AI agenda ownership जैसे उच्च-मूल्य कार्य भी हो रहे हैं।
वैश्विक व्यापार माहौल पर उन्होंने कहा कि भारतीय IT-ITeS उद्योग की लगभग 63 प्रतिशत बाजार निर्भरता U.S. पर है, इसलिए शुल्क, रोजगार नियमों और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बने रहते हैं। Nasscom UK FTA और U.S. के साथ प्रस्तावित BTA जैसे ढांचों के जरिये सदस्य कंपनियों के लिए कारोबार सुगमता बढ़ाने पर काम करता है, जबकि UK में reciprocal Double Contributions Convention clause जैसी व्यवस्था अल्पकालिक assignments की लागत कम करने में मदद करती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारतीय और वैश्विक टेक कंपनियों के एआई पर बढ़ते फोकस को बड़े सौदों, निवेश और नेतृत्व फैसलों के जरिए समझाया गया था। इसमें Infosys के CEO उत्तराधिकार योजना, Coforge के एआई-आधारित बहुवर्षीय अनुबंध, ServiceNow के निवेश और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च के दबाव जैसे संकेतों के जरिए बताया गया था कि एआई रणनीति किस तरह कंपनियों के राजस्व, लागत और ऑपरेटिंग मॉडल को नए सिरे से आकार दे रही है।
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