भारत के इक्विटी बेंचमार्क बाजार में उत्पाद दायरा बढ़ाते हुए NSE Indices Limited ने Nifty Next 100 नाम का नया व्यापक सूचकांक शुरू किया है। यह सूचकांक Nifty Next 50 और Nifty Midcap 150 से चुने गए 100 शेयरों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है, जिससे एसेट मैनेजरों और निष्क्रिय निवेश उत्पादों के लिए एक नया संदर्भ मानक मिलता है।
हाइलाइट्स
- NSE Indices ने Nifty Next 100 सूचकांक लॉन्च किया, जिसमें Nifty Next 50 के 50 और Nifty Midcap 150 के 50 शीर्ष शेयर शामिल किए गए।
- फ्री-फ्लोट मार्केट कैप वेटेड यह सूचकांक 1 अक्टूबर 2010 को बेस डेट और 1000 बेस वैल्यू के साथ शुरू हुआ, जिसमें अर्धवार्षिक पुनर्संतुलन मार्च और सितंबर में होगा।
- नया सूचकांक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स, इंडेक्स फंड्स और स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स जैसे निष्क्रिय निवेश उत्पादों के लिए बेंचमार्क के रूप में कार्य करेगा।
सूचकांक की संरचना और पुनर्संतुलन
जैसा कि NSE India द्वारा जारी और National Stock Exchange of India के अनुसार, नया Nifty Next 100 सूचकांक 100 शेयरों के ऐसे पोर्टफोलियो का प्रदर्शन मापता है जिसमें 50 शेयर Nifty Next 50 से और 50 शेयर Nifty Midcap 150 के शीर्ष घटकों में से लिए जाते हैं। इन 50 मिडकैप शेयरों का चयन 6 महीने के औसत फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण के आधार पर होता है।सूचकांक फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण वेटेड है। इसका आधार दिनांक 1 अक्टूबर 2010 रखा गया है और आधार मान 1000 है। सूचकांक का पुनर्गठन हर साल अर्धवार्षिक आधार पर मार्च और सितंबर में होता है।
निष्क्रिय निवेश उत्पादों के लिए संभावित उपयोग
यह नया सूचकांक एसेट मैनेजरों के लिए बेंचमार्क के रूप में काम करने की उम्मीद है। साथ ही, इसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स, इंडेक्स फंड्स और स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स जैसे निष्क्रिय निवेश साधनों द्वारा ट्रैक किए जाने वाले संदर्भ सूचकांक के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.इस लॉन्च से NSE के सूचकांक पोर्टफोलियो में एक ऐसा उत्पाद जुड़ता है जो लार्जकैप और मिडकैप खंडों के बीच निवेशकों को व्यापक बाजार एक्सपोजर देने पर केंद्रित है। इससे उन फंड हाउसों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं जो सूचीबद्ध, नियम-आधारित और विविधीकृत इक्विटी रणनीतियों पर आधारित उत्पाद विकसित करना चाहते हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में NSE Indices के निफ्टी फिक्स्ड इनकम सूचकांकों में 31 जुलाई 2026 से लागू होने वाले पुनर्संतुलन और कुछ G-Sec व डेट उप-सूचकांकों में बदलावों का विवरण दिया गया था। इसमें प्रमुख सरकारी प्रतिभूतियों के शामिल/बहिष्कृत किए जाने और Nifty Ultra Short Duration Debt Index A-I में Nifty 3 Month CD Index-A के वेट में कटौती जैसे कदमों पर चर्चा की गई, जो बेंचमार्क को ट्रैक करने वाले निवेशकों और निष्क्रिय डेट उत्पादों की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।
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