ED ने 32nd Avenue Group मामले में 71.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं

ED ने 32nd Avenue Group मामले में 71.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं
ED की बड़ी कुर्की

दिल्ली और गुरुग्राम में दर्ज कई आपराधिक मामलों से जुड़ी जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने 32nd Avenue Group मामले में 71.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। कार्रवाई में गुरुग्राम की वाणिज्यिक इकाइयों के साथ गोवा और महाराष्ट्र की संपत्तियां, कई बैंक खातों की शेष राशि और एक अंतर्देशीय पोत भी शामिल हैं।

हाइलाइट्स

  • ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत 32nd Avenue Group की कुल 71.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं।
  • जांच में 76 अचल और 38 चल संपत्तियां कुर्क की गईं, जिनमें गुरुग्राम की वाणिज्यिक इकाइयां, गोवा-महाराष्ट्र की जमीनें और बैंक खातों की शेष राशि शामिल है।
  • समूह और निदेशकों पर निवेशकों को फर्जी लीज व बिक्री वादे, नकली दस्तावेजों, और टैक्स चोरी के आरोप के तहत ED और पुलिस की जांच जारी है।

कुर्की की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत की गई है और जांच दिल्ली पुलिस तथा गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई थी। मामले में समूह, उसके प्रमोटर-डायरेक्टर Anubhav Sharma, Dhruv Sharma और अन्य पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और साजिश जैसे आरोपों की जांच चल रही है।

जांच में एक संगठित कार्यप्रणाली सामने आई है, जिसमें निवेशकों को दीर्घकालिक आश्वस्त लीज, निश्चित किराया आय, बाय-बैक व्यवस्था और समय-समय पर बढ़ते रिटर्न का वादा कर वाणिज्यिक इकाइयां खरीदने के लिए प्रेरित किया गया। कई मामलों में कब्जा नहीं दिया गया या बाद में वापस ले लिया गया, जबकि एक ही वाणिज्यिक स्थान को कथित तौर पर कई लोगों को बेचा या लीज पर दिया गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि यूनिट नंबर, क्षेत्रफल और लेआउट में बदलाव के बाद मूल इकाइयों को छोटे हिस्सों में बांटकर तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करने के लिए कथित रूप से फर्जी बिक्री और हस्तांतरण दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। कथित धोखे को बनाए रखने के लिए शुरुआती अवधि तक किराया भुगतान किया गया, लेकिन बाद में उसे रोक दिया गया, जबकि संपत्तियों पर नियंत्रण बरकरार रखा गया।

संपत्तियों का दायरा और क्षेत्रीय असर

जांच में TDS काटे जाने लेकिन आयकर विभाग में जमा नहीं किए जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक निवेशकों से जुटाई गई रकम को 50 से अधिक कंपनियों और LLP के नेटवर्क के जरिये घुमाया और परतदार बनाया गया, जिनमें से कई समान या गैर-कार्यशील पतों पर पाई गईं।

जांच में यह भी पता चला है कि 32nd Avenue और संबंधित परियोजनाओं में संपत्तियों की बिक्री से मिली राशि का इस्तेमाल गोवा और महाराष्ट्र में संपत्तियां खरीदने में किया गया। कुल 76 अचल संपत्तियां कुर्क की गई हैं, जिनमें गुरुग्राम की वाणिज्यिक इकाइयां और गोवा व महाराष्ट्र की जमीन तथा अन्य संपत्तियां शामिल हैं, जबकि 38 चल संपत्तियों में कई बैंक खातों की शेष राशि और एक अंतर्देशीय पोत शामिल है।

इससे पहले ED ने 13.04.2026 और 14.04.2026 को दिल्ली-NCR, गोवा, जयपुर और मुंबई के सात परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। प्रमुख आरोपी Anubhav Sharma, Dhruv Sharma, Mamta Sharma और Shirin Sharma फिलहाल मूल आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि आगे की जांच जारी है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में दाहोद फर्जी सरकारी दफ्तर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 22.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों की अस्थायी कुर्की और PMLA के तहत चल रही जांच का विवरण दिया गया था। उस लेख में बताया गया था कि कथित तौर पर फर्जी कार्यालयों और दस्तावेजों के जरिए सरकारी अनुदान हासिल कर रकम को कई खातों के माध्यम से घुमाया गया, साथ ही नागरिकों को बैंक खाते/केवाईसी दस्तावेज साझा करने के जोखिमों पर भी आगाह किया गया था।

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