ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
Atul Londhe ने कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में उतार-चढ़ाव का हवाला देते हुए सरकार की ईंधन मूल्य निर्धारण नीति पर प्रकाश डाला। ट्वीट में जानकारी दी गई कि मनमोहन सरकार के कार्यकाल में कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल था, तब पेट्रोल व डीजल के दाम क्रमशः 72 व 58 रुपए थे। वहीं, मोदी सरकार के 12 वर्षों का औसत में कच्चा तेल $50 प्रति बैरल के ऊपर नहीं गया, पर आम जनता को राहत कम मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा कीमत घटने पर टैक्स बढ़ाए जाते हैं, जबकि दाम बढ़ने पर बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है।
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Atul Londhe has previously commented on sectoral profits, noting rising earnings in the Gujarat paneer market. He also highlighted how higher domestic gas prices have increased the pressure on household budgets in a separate analysis on domestic gas costs. These observations add context to his recent remarks on fuel pricing policies.