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लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
भारतीय उद्योगों में निवेश और विस्तार की प्रक्रिया पर Rajeev Mantri ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। उनके अनुसार, न केवल सरकारें बल्कि प्रत्येक क्षेत्र में 5 या 7 बड़े समूहों और प्रभुत्वशाली कंपनियों द्वारा भी नई कंपनियों के लिए प्रवेश और विस्तार की राह में बाधाएँ उत्पन्न की जाती हैं। फार्मा, आईटी, एफएमसीजी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ये बड़ी कंपनियाँ नवाचार और प्रतिस्पर्धा को सीमित करती हैं। ऐसी स्थिति में नई कंपनियों के लिए बाजार में स्थापित होना और फलना-फूलना चुनौतीपूर्ण बन जाता है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा की गुंजाइश कम हो सकती है। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, ये प्रवृत्तियाँ लंबी अवधि में स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास और निवेश के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकती हैं।
Mantri has previously questioned sustained beliefs about the USD/INR exchange rate, arguing that the decline is often misunderstood in financial circles (link). He has also evaluated challenges in India's gold mining sector, citing issues in resource extraction and industry structure (link). These earlier analyses highlight his ongoing focus on structural barriers within Indian industries.