ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
राजीव मंतरी ने ट्विटर के माध्यम से बताया कि भारतीय कंपनियों को व्यवसाय और तकनीकी उपलब्धियों के लिए उतनी ही पूंजी की आवश्यकता नहीं होती, जितनी अमेरिकी कंपनियों को होती है। उन्होंने संकेत दिया कि 40,00,00,000 डॉलर जुटाने का अमेरिकी उदाहरण भारतीय परिदृश्य में लागू नहीं किया जा सकता। मंतरी के अनुसार, अमेरिकी निवेशकों और उनके जैसी सोच रखने वालों को यह गलती अक्सर होती है, जिससे भारत में पूंजी आवंटन की जरूरतों को गलत तरीके से समझा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार की विशिष्ट आर्थिक परिस्थितियां कंपनियों की वित्तीय आवश्यकताओं को विभिन्न बनाती हैं। इसलिए, निवेशकों को स्थानीय व्यापारिक आवश्यकताओं और परिचालन लागतों को ध्यान में रखते हुए निवेश रणनीति बनानी चाहिए।
Mantri has previously commented on regional business trends, noting the role of public-private partnerships in the growth of New Bengal’s garment sector in recent remarks. He also observed strong investor demand when Adani Enterprises raised ₹15,000 crore via QIP and secured 3.8 times subscription in 48 hours, as reported in another post. These perspectives provide context to his views on capital requirements for Indian firms.