केंद्र सरकार ने 2020 में लागू सीमा-पार निवेश जांच व्यवस्था में बदलाव करते हुए चीनी कंपनियों के लिए भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रक्रिया को आसान किया है। पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रेस नोट 3 से जुड़े निर्देशों में संशोधन को मंजूरी दी, जो भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले एफडीआई के लिए सरकारी स्वीकृति अनिवार्य करता था। यह कदम ऐसे समय आया है जब विनिर्माण क्षेत्र की चीनी घटकों पर निर्भरता और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की जरूरत को लेकर नीति-स्तर पर दबाव बढ़ा है।
हाइलाइट्स
- भारत ने प्रेस नोट 3 के नियमों में ढील देकर चीन सहित सीमा साझा करने वाले देशों से एफडीआई हेतु मंजूरी प्रक्रिया सरल की।
- डिक्सन टेक्नोलॉजीज को HKC के साथ संयुक्त उद्यम और फ्लिपकार्ट को होल्डिंग ट्रांसफर सहित, चीनी निवेश प्रस्तावों को हाल ही में स्वीकृति मिली है।
- नीति में बदलाव का उद्देश्य वैश्विक निर्यात हब बनने और इलेक्ट्रॉनिक्स-सेमीकंडक्टर क्षेत्र में चीनी विशेषज्ञता से घरेलू कंपोनेंट इकोसिस्टम मजबूत करना है।
प्रेस नोट 3 में बदलाव और पृष्ठभूमि
Forbes India की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2020 में लाए गए नियमों के तहत चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से एफडीआई के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी थी। चीन का नाम सीधे नहीं था, लेकिन जून 2020 में गलवान, लद्दाख में हुए सीमा संघर्ष के बाद इस नीति ने व्यावसायिक रूप से चीनी पूंजी के प्रवाह को सीमित कर दिया था। अब इस ढील को भारत के सबसे बड़े पड़ोसी और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के प्रति रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में यह तर्क मजबूत हुआ कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को गति देने के लिए सप्लाई चेन और पूंजी की उपलब्धता अहम है।
हालिया मंजूरियां और निवेश गतिविधि
प्रेस नोट 3 के तहत सख्ती के बावजूद, हाल के समय में कुछ प्रस्तावों को मंजूरी मिलनी शुरू हो गई थी। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता डिक्सन टेक्नोलॉजीज को चीनी डिस्प्ले कंपोनेंट कंपनी एचकेसी के साथ संयुक्त उद्यम के लिए अनुमति मिली, जिसे विश्लेषक घरेलू डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए सहायक मानते हैं। वहीं वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट ने सरकार की मंजूरी के बाद अपनी होल्डिंग कंपनी को भारत में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, क्योंकि फ्लिपकार्ट में चीनी टेक कंपनी टेनसेंट की 5-6 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पीटीआई के मुताबिक, अप्रैल 2020 से दिसंबर 2025 के बीच कुल इक्विटी इनफ्लो में चीन की हिस्सेदारी 0.32 प्रतिशत रही और वह विदेशी निवेशकों में 23वें स्थान पर था।नीति का उद्देश्य और उद्योग पर असर
रिपोर्ट में कहा गया कि यह बदलाव आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसमें वैश्विक निर्यात केंद्र बनने के लिए चीनी सप्लाई चेन के साथ एकीकरण की जरूरत पर जोर दिया गया था। सर्वेक्षण के मुताबिक, चीन भारत का शीर्ष आयात साझेदार है और उसके साथ व्यापार घाटा बढ़ रहा है, ऐसे में केवल व्यापार पर निर्भर रहने के बजाय एफडीआई को रणनीति के तौर पर देखना अधिक लाभकारी हो सकता है। लेख के अनुसार, अमेरिका द्वारा पिछले साल भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और बाद में इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने से भी नीति बदलाव की तात्कालिकता बढ़ी, और दिसंबर में चीनी कामगारों के लिए वीजा नियमों में ढील दी गई थी। नई दिल्ली अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में चीनी विशेषज्ञता आकर्षित कर साधारण असेंबली से आगे बढ़कर घरेलू कंपोनेंट इकोसिस्टम मजबूत करना चाहती है, हालांकि व्यापक कूटनीतिक तनाव बने रहने का संकेत भी रिपोर्ट में दिया गया है।हमने पहले रायसीना डायलॉग में विदेश मंत्री एस जयशंकर की उस रूपरेखा पर रिपोर्ट किया था, जिसमें भारत की वैश्विक भूमिका को घरेलू आर्थिक मजबूती और हिंद महासागर क्षेत्र में व्यावहारिक साझेदारी से जोड़ा गया था। उस रिपोर्ट में समुद्री सुरक्षा, संकटग्रस्त जहाजों पर मानवीय प्रतिक्रिया और व्यापारिक मार्गों में व्यवधान का सप्लाई चेन व बीमा लागत पर असर जैसे बिंदुओं पर भी चर्चा की गई थी।
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